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अचानक नहीं, पूरी तैयारी के साथ ईरान पर हुआ हमला; डोनाल्ड ट्रंप को दी गई थी ब्रिफिंग्स

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ऐसा मालूम होता है कि पहला हमला ईरान सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालयों के आसपास के इलाकों में हुआ। ईरानी मीडिया ने देशभर में हमलों की खबरें दी और राजधानी तेहरान से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले से पहले जोखिम को लेकर ब्रिफिंग्स दिए गए थे, जिसमें अमेरिकी सैनिकों के बड़े नुकसान की आशंका जताई गई थी। साथ ही, मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों के पक्ष में बड़े बदलाव की संभावना भी बताई गई। सीनियर अधिकारी के अनुसार, यह ऑपरेशन हाई रिस्क-हाई रिवॉर्ड के रूप में पेश किया गया था। शनिवार को शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका और इजरायल ने ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हमले किए, जिससे क्षेत्र में नया संघर्ष शुरू हो गया।

ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर जवाबी हमले किए। डोनाल्ड ट्रंप ने वीडियो संबोधन में कहा कि अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है, लेकिन यह भविष्य के लिए और बड़े उद्देश्यों वाली कार्रवाई है। उन्होंने 47 वर्षों से ईरान की ओर से हिंसा की नीति का जिक्र कर इसे अब बर्दाश्त न करने की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों से पहले ट्रंप को कई ब्रिफिंग्स मिलीं। इनमें सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन केन, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ शामिल थे। सेंट्रल कमांड प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर भी व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में शामिल हुए।

US को किस तरह का खतरा

अधिकारियों ने ईरान के मिसाइल हमलों से अमेरिकी ठिकानों पर खतरा, इराक और सीरिया में प्रॉक्सी हमलों और हवाई रक्षा प्रणालियों की सीमाओं की चेतावनी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि संघर्ष खतरनाक मोड़ ले सकता है और पेंटागन की योजना किसी निश्चित नतीजे की गारंटी नहीं देती। कार्नेगी एंडोमेंट की निकोल ग्राजेवस्की ने कहा कि ईरानी विपक्ष खंडित है और जनता के विद्रोह की संभावना साफ नहीं है। ट्रंप ने हमलों से पहले मध्य पूर्व में बड़े सैन्य जमावड़े का आदेश दिया था। योजना में ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाना शामिल था।

अमेरिका के टारगेट पर क्या

इजरायली अधिकारी के अनुसार, सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को टारगेट बनाया गया, लेकिन नतीजे साफ नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि वे ईरान की मिसाइलों, नौसेना और परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करेंगे। क्षेत्रीय आतंकवादी प्रॉक्सी को खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने ईरानियों से सरकार गिराने की अपील की। यह कार्रवाई इराक युद्ध 2003 के बाद अमेरिका की सबसे जोखिमपूर्ण सैन्य कार्रवाई है, जो वेनेजुएला और जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों से भी बड़ी है।

मिसाइल, ड्रोन, साइबर हमलों के विकल्प

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास मिसाइल, ड्रोन और साइबर हमलों के कई विकल्प हैं। पूर्व अमेरिकी राजदूत डैनियल शापिरो ने कहा कि ईरान के पास अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने वाली अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जबकि अमेरिका के इंटरसेप्टर सीमित हैं। कुछ हथियार रक्षा प्रणाली को भेद सकते हैं। यह एक मुश्किल स्थित है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक प्रभाव पड़ सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN