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होली का जश्न देश की अर्थव्यवस्था को दे रहा रफ्तार, कम हो रहा चीनी समानों का दबदबा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Happy Holi 2026: इस साल होली के बाजार में खरीदारी तकरीबन 25 फीसदी बढ़ी है। इसकी वजह से देश में होली का कारोबार बढ़कर 80 हजार करोड़ होने का अनुमान है। रिपोर्ट बताती हैं कि 2021 के बाद से होली के बाजारों में चीन के उत्पादों में कमी आई है। ग्राहक अब भारत में बने उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

होली का त्योहार देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में भी बड़ा सहयोग दे रहा है। देश के बड़े व्यापारिक संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मुताबिक इस साल होली के बाजार में खरीदारी तकरीबन 25 फीसदी बढ़ी है। इसकी वजह से देश में होली का कारोबार बढ़कर 80 हजार करोड़ होने का अनुमान है। सिर्फ दिल्ली में ही होली पर 15 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान है।

स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ी

कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है कि अब होली महज एक सांस्कृतिक त्योहार से बदलकर व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक त्योहार बन गया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री व सांसद प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि धीरे-धीरे त्योहार का ट्रेंड बदल रहा है। अब बड़े स्तर पर होली महोत्सव मनाए जा रहे हैं और इनमें घरेलू उत्पादों की मांग बढ़ी है। इसकी वजह से भी कारोबार में बढ़ोतरी हुई है।

पहले चीन के बने उत्पादों का था दबदबा

करीब एक दशक पहले होली पर बिकने वाले उत्पादों पर भी चीन का दबदबा था। पिचकारी, मोटर चलित वॉटर गन और सजावटी सामान चीन से आयात करके लाए जाते थे। अब धीरे-धीरे भारतीय उद्यमी और उत्पाद बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। रिपोर्ट बताती हैं कि 2021 के बाद से होली के बाजारों में चीन के उत्पादों में कमी आई है। ग्राहक अब भारत में बने उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इनकी मांग बढ़ी

  • रंग और गुलाल।
  • पानी की बंदूकें, पंप वाली पिचकारी और आकर्षक कार्टून कैरेक्टर वाली पिचकारियां
  • रंग बिरंगे टी-शर्ट, स्कार्फ, होली स्पेशल कुर्ते और कैजुअल कपड़े, होली थीम के प्रिंट, स्लोगन और रंगीन परिधान
  • गुजिया, नमकपारा, मठरी, पारंपरिक नमकीन और छोटे पैक वाले स्नैक्स।
  • चंदन, लड्डू गोपाल के परिधान, फूल, टेंट, कैटरिंग, लाइटिंग, साउंड सिस्टम, बैंक्वेट हॉल

साल दर साल बढ़ रहा कारोबार

वर्ष — देश में कारोबार की रकम (करोड़ में)

2016 —– 18,000

2021 —– 20,000

2022 —– 25,000

2024 —– 50,000

2025 —– 60,000

SOURCE : LIVE HINDUSTAN