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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पकड़ टाइट करने की तैयारी, मुस्लिम देश संग क्या खिचड़ी पका रहा ईरान?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

युद्ध के बीच दुनिया का प्रमुख जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इस समुद्री रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस का व्यापार होता है, जो बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका इजरायल के जारी छिड़ी जंग के बीच दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज युद्ध का अखाड़ा बन गया है। इस जलमार्ग के प्रभावी रूप से बंद होने से खलबली मची हुई है, जहां कई देशों पर ईंधन संकट बन आई है। इस बीच अब ईरान इस जलमार्ग पर अपना शिकंजा और कसने की तैयारी कर रहा है। ईरान ने दावा किया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ‘निगरानी’ के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

ईरान की एक सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ ने ईरान के राजनयिक काजिम घारीबबादी के हवाले से यह जानकारी दी है। गुरुवार को घारीबबादी ने कहा है कि ईरान ओमान के साथ इसकी मिलकर निगरानी की योजना तैयार कर रहा है। ईरानी अधिकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव का उद्देश्य ‘इस मार्ग को जहाजों के आवागमन के लिए सुरक्षित और सुगम बनाना तथा बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना’ है।

जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से ठप

बता दें कि यह जलमार्ग ईरान और ओमान के जलक्षेत्र में है, लेकिन इसे एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग माना जाता है और यहां से जहाजों के निर्बाध और स्वतंत्र आवागमन की अपेक्षा की जाती है। क्षेत्र में जहाजों पर ईरान के हमलों और होर्मुज से गुजरने के लिए कथित तौर पर 20 लाख अमेरिकी डॉलर तक मांगे जाने ने इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से ठप है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिकी और पश्चिमी देशों के हितों वाले जहाजों को किसी भी हाल में इस रास्ते से गुजरने नहीं देगा। हालांकि ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई है।

युद्ध में शांतिकाल के नियम लागू नहीं- ईरान

प्रस्ताव का मसौदा क्या है और इसके प्रभाव क्या होंगे, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। ओमान ने भी इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरानी अधिकारी घारीबबादी ने इस पर बात करते हुए आगे कहा कि जहाजों को हमला बनाना ईरान के खिलाफ आक्रामकता का नतीजा है। उन्होंने कहा, ”जब हम आक्रामक कार्रवाई का सामना करते हैं तो नौवहन पर गंभीर असर पड़ता है और यह उसी आक्रामकता का नतीजा है। हम इस समय युद्ध में हैं और ऐसे में यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि शांतिकाल के नियम युद्धकालीन परिस्थितियों में भी लागू हों।”

बैठक में शामिल हुआ भारत

इस बीच भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए हुई एक अहम बैठक में शामिल हुआ। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन में आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज के माध्यम से वैश्विक मार्गों को सुरक्षित करना था। मिसरी ने डिजिटल माध्यम से चर्चा में भाग लेते हुए क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन मार्गों की सुरक्षा पर भारत का रुख स्पष्ट किया।

विदेश सचिव ने बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध आवागमन और नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के महत्व पर जोर दिया। मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है। विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में बताया, “उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN