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सुपर पावर अमेरिका को क्यों पड़ी कर्ज मांगते पाकिस्तान की जरूरत, ये हैं 4 बड़े कारण

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर धोखा देने के आरोप लगाए थे। हालांकि, दूसरे कार्यकाल में तस्वीर बदली और पाकिस्तान और अमेरिका में संबंध बेहतर होते नजर आए।

अमेरिका और ईरान के सीजफायर का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर पाकिस्तान उभरा है। खबरें ये भी आईं कि अमेरिका की तरफ से ही पाकिस्तान पर ईरान को मनाने का दबाव बनाया गया था। साथ ही यह भी कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तरफ से सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट पर भी पहले अमेरिका ने मंजूरी दी थी। हालांकि, इन्हें लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। चर्चाएं तेज हो गईं हैं कि सुपर पावर माने जाने वाले अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत क्यों पड़ गई।

क्यों सीजफायर चाह रहे थे ट्रंप

28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध मार्च के अंत तक भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था। कहा जा रहा है कि ट्रंप को लग रहा था कि ईरान जल्द ही घुटने टेक देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसने जवाबी कार्रवाई मध्य पूर्व में अमेरिका के कई बेस पर हमले कर दिए। इधर, अमेरिका में युद्ध का बिल तेजी से बढ़ रहा था, स्थानीय लोग विरोध पर उतर आए थे। इतना ही नहीं ट्रंप के खिलाफ अभियोग के सुर जोर पकड़ रहे थे।

पाकिस्तान को तैयार कर रहा था अमेरिका

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि अमेरिका ही ईरान के साथ सीजफायर चाहता था। उन्होंने कहा कि हफ्तों से अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस्लामाबाद पर ईरान को मनाने का दबाव बना रहा था। इसके बाद पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई में हुई बैक चैनल बातचीत में तीनों मुल्क दो सप्ताह के सीजफायर के लिए तैयार हुए।

ट्रंप निकलना चाह रहे थे

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप 21 मार्च को ईरान के पावर प्लांट को खत्म करने की धमकी देने के बाद से ही सीजफायर चाहते थे। खबर है कि वह तेल की बढ़ती कीमतों से चिंतित थे और ईरानी शासन की जवाबी कार्रवाई से हैरान भी थे। लगातार बयानबाजी कर रहे ट्रंप को ईरान की तरफ से भी जवाब मिल रहे थे। ईरान ने सबसे बड़ी कार्रवाई कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया था, जिससे कई देशों में तेल संकट जैसे हालात हो गए थे।

ट्रंप को क्यों पड़ी पाकिस्तान की जरूरत

अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने पाकिस्तान पर धोखा देने के आरोप लगाए थे। हालांकि, दूसरे कार्यकाल में तस्वीर बदली और पाकिस्तान और अमेरिका में संबंध बेहतर होते नजर आए। एक मौके पर तो ट्रंप ने ऐसी संभावनाएं भी जता दी थीं कि कभी पाकिस्तान भी भारत को तेल बेच सकता है।

ट्रंप जानते थे कि पाकिस्तान के ईरान से बेहतर संबंध हैं। साथ ही पाकिस्तान 1000 किमी सीमा ईरान के साथ साझा करता है। अब पाकिस्तान ने अपने बैक चैनल्स का इस्तेमाल कर दोनों मुल्कों के बीच मैसेंजर की भूमिका भी निभाई। बीते कुछ महीनों में पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर, ट्रंप के ‘फेवरेट’ बन गए थे। कहा जाता है कि मुनीर के ईरान के IRGC से भी संबंध मजबूत हैं। ईरान में फैसले लेने में IRGC निर्णायक भूमिका निभाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का यह भी मानना था कि अगर ईरान को मुस्लिम बहुल पड़ोसी मुल्क की तरफ से अमेरिका का प्रस्ताव मिले, तो वह इसे स्वीकार कर सकता है। साथ ही वजह चीन को भी माना जा रहा है। ट्रंप यह जानते हैं कि पाकिस्तान और चीन के संबंध मजबूत हैं और चीन का ईरान पर प्रभाव भी है। बीते महीने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने चीन की यात्रा की थी।

इस्लामाबाद मैं बैठक

2 सप्ताह के सीजफायर के बाद अमेरिका और ईरान शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता करने जा रहे हैं। हालांकि, लेबनान के मुद्दे को लेकर चिंताएं बनी हुईं हैं। इजरायल और अमेरिका साफ कर चुके हैं कि सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है। जबकि, शरीफ ने कहा था कि इसमें लेबनान भी शामिल होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN