Home  लाइफस्टाइल समाचार सिर्फ पढ़ाई काफी नहीं! बच्चे में ये 5 स्किल्स होना भी जरूरी...

सिर्फ पढ़ाई काफी नहीं! बच्चे में ये 5 स्किल्स होना भी जरूरी है, फिर लाइफ में कभी नहीं टूटेगा

15
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

लाइफ में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही काफी नहीं होती। बल्कि पैरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वो बच्चों को कुछ ऐसी लाइफ स्किल्स भी सिखाएं, जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करें। ताकि वो जीवन की चुनौतियों का सामना निराशा नहीं, बल्कि पॉजिटिविटी के साथ करें।

पैरेंट्स हमेशा चाहते हैं कि उनका बच्चा जीवन में एक सफल इंसान बने। लेकिन सफलता सिर्फ पढ़ाई-लिखाई, अच्छे नंबर या बड़ी डिग्री से नहीं मिलती है बल्कि सफलता तब मिलती है, जब बच्चा अंदर से एक मजबूत इंसान बनता है। यह मजबूती उसे उन छोटी-छोटी लाइफ स्किल्स से मिलती है, जो उसे मुश्किल समय में संभालती हैं। आज के समय में बच्चों पर पढ़ाई और परफॉर्मेंस का दबाव पहले से कहीं ज्यादा है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चे अंदर से मजबूत बनें। उन्हें यह समझ आए कि हर बात दिल पर लेना जरूरी नहीं, हर परेशानी से भागना सही नहीं और मदद मांगना कमजोरी नहीं होती। ऐसे में अगर बच्चा ये 5 जरूरी लाइफ स्किल सीख लेता है, तो वह सिर्फ पढ़ाई में नहीं बल्कि जिंदगी के हर मोड़ पर खुद को संभाल पाएगा।

बेइज्जती को बिना टूटे संभालना

जीवन में हर जगह तारीफ नहीं मिलेगी। कभी स्कूल में, कभी दोस्तों के बीच तो कभी काम की जगह पर बच्चे को ऐसी बातें सुननी पड़ सकती हैं जो उसे बुरी लगें। ऐसे समय में अगर बच्चा हर बात से टूट जाता है तो उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। इसलिए उसे यह सिखाना जरूरी है कि हर किसी की राय उसकी पहचान तय नहीं करती। बच्चे को समझाएं कि कुछ लोग गलत बोल सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह गलत है। उसे शांत रहना, अपनी भावनाओं को संभालना और सही समय पर सही जवाब देना सीखना चाहिए। यह आदत उसे मेंटली स्ट्रांग बनाएगी।

थोड़ी परेशानी और असुविधा सहना जरूरी है

आज के समय में कई बच्चे छोटी-छोटी असुविधाओं से परेशान हो जाते हैं। थोड़ी हार, थोड़ा इंतजार या थोड़ी मेहनत भी उन्हें भारी लगने लगती है। लेकिन जिंदगी हमेशा आरामदायक नहीं होती। कई बार मुश्किल हालात से गुजरना पड़ता है। ऐसे में बच्चा तभी मजबूत रहेगा, जब वह थोड़ी असुविधा सहना सीख चुका होगा। उसे हर समय तुरंत सुविधा देने के बजाय कभी-कभी चीजों का इंतजार करना सिखाएं। हर समस्या का हल तुरंत देने की बजाय उसे खुद कोशिश करने दें। इससे उसके अंदर धैर्य और संघर्ष करने की आदत बनेगी। यही आदत आगे चलकर उसे मुश्किल हालात में मैनेज करना सिखाएगी।

अपनी भावनाएं खुलकर बताना जरूरी है

कई बच्चे अंदर ही अंदर दुख, गुस्सा या डर महसूस करते रहते हैं, लेकिन बोल नहीं पाते। धीरे-धीरे यही बातें उनके मन में जमा होने लगती हैं। इसलिए बच्चे को यह एहसास दिलाना जरूरी है कि अपनी भावनाएं बताना गलत नहीं है। उसे ऐसा माहौल दें जहां वह बिना डर के अपनी बात कह सके। अगर वह उदास है, परेशान है या किसी बात से डर रहा है, तो उसे ध्यान से सुनें। हर बार उसे टोकने या जज करने की बजाय उसकी बात समझने की कोशिश करें। जब बच्चा अपनी भावनाएं सही तरीके से व्यक्त करना सीख जाता है, तो उसके रिश्ते भी बेहतर होते हैं और उसका मेंटल स्ट्रेस भी कम होता है, जिससे बच्चा अच्छे से ग्रो कर पाएगा।

मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है

कई बार बच्चे यह सोचने लगते हैं कि अगर उन्होंने मदद मांगी, तो लोग उन्हें कमजोर समझेंगे। यही सोच उन्हें अकेला महसूस करवाने लगती है। जबकि सच यह है कि जरूरत पड़ने पर मदद मांगना एक अच्छी आदत है। बच्चे को समझाएं कि हर इंसान को कभी न कभी किसी की जरूरत पड़ती है। अगर पढ़ाई में दिक्कत हो, मन खराब हो या कोई समस्या समझ न आए, तो भरोसेमंद लोगों से बात करना सही होता है। इससे बच्चा अंदर ही अंदर घुटने की बजाय खुलकर अपनी परेशानी साझा करना सीखता है।

नंबरों से ज्यादा जरूरी है बच्चे की खुद की पहचान

बहुत से बच्चे अपने नंबरों के आधार पर खुद को आंकने लगते हैं। अच्छे मार्क्स आए तो खुश, वहीं कम आए तो खुद को बेकार समझने लगते हैं। यह सोच बच्चे के आत्मविश्वास को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है। ऐसे में उसे यह महसूस करवाना जरूरी है कि उसकी कीमत सिर्फ रिपोर्ट कार्ड से तय नहीं होती। उसकी मेहनत, व्यवहार, सोच और कोशिश भी उतनी ही जरूरी हैं। अगर बच्चा खुद को सिर्फ नंबरों से जोड़कर देखेगा तो छोटी असफलता भी उसे अंदर से तोड़ सकती है। लेकिन जब वह अपनी असली पहचान समझेगा, तब वह हर परिस्थिति में खुद पर भरोसा रखना सीखेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN