Source :- LIVE HINDUSTAN
इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (IIFCL) को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए सरकार से जरूरी मंजूरी मिल गई है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
आईपीआ पर दांव लगाकर कमाई का इरादा रखते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, सार्वजनिक क्षेत्र की इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (IIFCL) को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए सरकार से जरूरी मंजूरी मिल गई है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
IIFCL के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक (एमडी) रोहित ऋषि के मुताबिक निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने इस मंजूरी के बारे में कंपनी को बताया है। रोहित ऋषि के मुताबिक IIFCL इश्यू के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए सरकार को आवश्यक विवरण जमा करने की प्रक्रिया में है। इश्यू अगले वित्त वर्ष में आ सकता है। बता दें कि आम बजट 2026-27 में विनिवेश और संपत्ति के मौद्रीकरण पर जोर दिया गया है। प्रस्तावित आईपीओ सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए सरकार की व्यापक विनिवेश और पूंजी बाजार सूचीबद्धता रणनीति का हिस्सा है। इस समय आईआईएफसीएल में केंद्र सरकार की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
सितंबर 2013 से रजिस्टर्ड है कंपनी
IIFCL सितंबर 2013 से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ एक एनबीसीसी-एनडी-आईएफसी के रूप में रजिस्टर्ड है और भारतीय रिजर्व बैंक के लागू विवेकपूर्ण मानदंडों का पालन करती है। पिछले महीने संगठन का कार्यभार संभालने वाले रोहित ऋषि ने कहा- संस्था के लिए मेरा दृष्टिकोण तीन शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है – सुधार, विकास और रूपांतरण। उन्होंने आगे कहा- अनुशासित मूल्यांकन मानकों और प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी के माध्यम से हम अवसंरचना वित्तपोषण की गुणवत्ता और व्यापकता में सुधार करेंगे। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, परिसंपत्ति की गुणवत्ता और विवेकपूर्ण जोखिम प्रबंधन हमारे लिए अप्रतिबंधित रहेंगे।
कैसे रहे नतीजे
मार्च 2025 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए IIFCL का नेट प्रॉफिट पिछले वित्तीय वर्ष के 1,552 करोड़ रुपये के मुकाबले 39 प्रतिशत बढ़कर 2,165 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने लगातार पांचवें वर्ष अपना सर्वकालिक उच्च प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसमें कर पूर्व लाभ (PBT) 2,776 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 2,029 करोड़ रुपये से 37 प्रतिशत अधिक है। पिछले वित्तीय वर्ष में, कंपनी ने 51,124 करोड़ रुपये और 28,501 करोड़ रुपये की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक स्वीकृति और वितरण दर्ज किया था। इस मजबूत प्रदर्शन के आधार पर, IIFCL अपनी विकास गति को बनाए हुए है और पिछले वर्ष के परिणामों को पार करने की राह पर है। 31 जनवरी, 2026 तक, वार्षिक स्वीकृति 53,217 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है जबकि वितरण 25,470 करोड़ रुपये रहा।
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