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संसद मानसून सत्र नहीं बढ़ेगा, सरकार एफसीआरए संशोधन विधेयक पारित कराने को ला सकती है

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संसद का मानसून सत्र समाप्त होने में कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं और सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मूल समयसीमा से आगे **कोई विस्तार नहीं** होगा। इसके साथ ही, सरकार Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 (FCRA Amendment Bill) को **विचार और पारित करने** के लिए आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम पर प्रमुख हितधारकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

## सत्र की समयसीमा पर सरकार अडिग

संसद का मानसून सत्र, जो आधिकारिक रूप से **20 जुलाई से 13 अगस्त** तक चलना है, बिना किसी विस्तार के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रहेगा। यह निर्णय सत्र को संभावित रूप से आगे बढ़ाए जाने की अटकलों के बाद लिया गया है—जिस विचार को सरकार ने अब स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। विधायी सूत्रों ने पुष्टि की है कि निर्धारित समाप्ति तिथि के बाद सत्र बढ़ाने का **कोई प्रस्ताव** नहीं है।

## FCRA संशोधन विधेयक: सरकार पारित कराने के लिए तैयार

### पारित कराने पर जोर

लोकसभा में **25 मार्च, 2026** को पेश किया गया FCRA Amendment Bill, Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में बदलाव करने का लक्ष्य रखता है। इसका उद्देश्य केवल विनियमन तक सीमित रहने के बजाय निगरानी को मजबूत करना है, खासकर उन संगठनों के संबंध में जिनका FCRA पंजीकरण रद्द, निरस्त या नवीनीकृत न होने के कारण समाप्त हो जाता है। विधेयक में प्रस्तावित प्रावधान ऐसे मामलों में एक “Designated Authority” को विदेशी अंशदान और उससे संबंधित परिसंपत्तियों का अधिग्रहण या निपटान करने की अनुमति देंगे।

अधिकारियों ने इस विधेयक को मानसून सत्र के दौरान विचार और पारित किए जाने वाले **लंबित विधेयकों** में शामिल किया है। यह उन दो विधेयकों में से एक है जिन्हें संसदीय एजेंडे में अंतिम रूप देने के लिए निर्धारित किया गया है। दूसरा विधेयक Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025 है।

## विधायी प्रक्रिया में अन्य विधेयक

सरकार पारित होने की प्रतीक्षा कर रहे दो पुराने विधेयकों के साथ **पांच नए विधेयक** पेश कर रही है। इनमें शामिल हैं:

– **Income-tax (Amendment) Bill, 2026** – मौजूदा अध्यादेश की जगह लेने वाला यह विधेयक भारत के संप्रभु ऋण बाजार को गहरा करने और स्थिर वैश्विक पूंजी आकर्षित करने का उद्देश्य रखता है।
– **Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026** – इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश शामिल नहीं होंगे।
– **Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026** – 1969 के कानून के तहत देरी से पंजीकरण के नियमों को और कड़ा करने का प्रस्ताव है।
– **Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026** – यह राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दों से निपटने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
– **Micro, Small and Medium Enterprises Development (Amendment) Bill, 2026** – इसमें MSMEs के लिए कारोबारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के उपाय प्रस्तावित हैं। इनमें सुविधा परिषदों और मध्यस्थता संबंधी निर्णयों के प्रवर्तन के संबंध में राज्यों को अधिकार प्रदान करना भी शामिल है।

## परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण: एजेंडे में शामिल नहीं

हालांकि पहले इस पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन **Constitution (131st Amendment) Bill, 2026**, जिसे आम तौर पर “Delimitation Bill” कहा जाता है और जिसका उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण से जोड़ना है, मौजूदा सत्र के एजेंडे में शामिल नहीं है। पिछले सत्र के दौरान लोकसभा में यह आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा था। जब तक सरकार यह बहुमत जुटाने में सक्षम नहीं होती, तब तक यह विधेयक एजेंडे से बाहर ही रहेगा।

## विपक्ष की प्रतिक्रिया और चिंताएं

विपक्षी नेताओं ने FCRA Amendment Bill का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) KC Venugopal ने इस योजना को “पूरी तरह अलोकतांत्रिक” करार दिया और आरोप लगाया कि संशोधनों से केंद्र सरकार को नागरिक समाज संगठनों पर व्यापक अधिकार मिल जाएंगे तथा असहमति की आवाजों को दबाया जा सकेगा।

इस बीच, ईसाई संगठनों और Meghalaya के मुख्यमंत्री Conrad Sangma जैसे राज्य नेताओं ने विधेयक के प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पंजीकरण समाप्त होने पर परिसंपत्तियों को जब्त करने जैसी शक्तियों से लंबे समय से कमजोर वर्गों की सेवा कर रहे धर्मार्थ संस्थान प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक समुदाय उनका निशाना नहीं हैं। उनका तर्क है कि विधेयक का ध्यान पारदर्शिता, जवाबदेही सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर है।

## सरकार अब कार्रवाई क्यों कर रही है

कई कारक एक साथ आए हैं, जिससे सरकार के लिए यह समय उपयुक्त बना है:

– **चुनाव संबंधी संवेदनशीलता**: केरल में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच विपक्ष ने पहले विधेयक पर विचार में देरी कराई थी।
– **सीमित एजेंडा और समयसीमा**: मानसून सत्र के विस्तार से जुड़ी नकारात्मक अटकलों को खारिज किए जाने के बाद सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने विधायी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है।
– **व्यापक सुधारों पर जोर**: निगरानी को मजबूत करने, नियामकीय ढांचे को सुव्यवस्थित करने और लंबित विधेयकों के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में सुधार के प्रयास एक समेकित विधायी रणनीति का संकेत देते हैं।

## किन बातों पर नजर रहेगी

– दोनों सदनों में बहस की तीव्रता, खासकर नागरिक स्वतंत्रता और नियामकीय अतिरेक से जुड़े मुद्दों पर।
– क्या आलोचकों की आपत्तियों के जवाब में संशोधन या स्पष्टीकरण पेश किए जाते हैं, जिनमें धार्मिक संस्थाओं के लिए सुरक्षा और पूर्वव्यापी प्रभाव की सीमाएं शामिल हैं।
– विदेशी फंडिंग पर निर्भर NGOs और FCRA नवीनीकरण की प्रक्रिया में शामिल संगठनों पर प्रभाव।
– राज्य सरकारों और गैर-सरकारी निकायों की प्रतिक्रियाएं, खासकर केरल और धार्मिक आधार पर काम करने वाले समूहों की।

जैसे-जैसे मानसून सत्र 13 अगस्त की समयसीमा की ओर बढ़ रहा है, संसद का सत्र बढ़ाए बिना FCRA Amendment Bill को पारित कराने का सरकार का संकल्प उसके विधायी एजेंडे की प्रमुख विशेषता होगा। विपक्षी दल जोरदार बहस की तैयारी कर रहे हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि विदेशी अंशदान पर अधिक निगरानी के लिए यह विधेयक आवश्यक है।

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