Source :- LIVE HINDUSTAN
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा और जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें विशेषज्ञ और राजनीतिज्ञ इस संकट पर चर्चा करेंगे।
जिनेवा में बुधवार को आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में पाकिस्तान की खूब किरकिरी हुई। पाकिस्तान में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की कड़ी आलोचना की गई। जापानी मानवाधिकार कार्यकर्ता शुन फुजिकी ने पाकिस्तान के रिकॉर्ड की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि करीब 27 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों से बंधे होने के बावजूद पाकिस्तान में गंभीर उल्लंघन लगातार जारी हैं। लोगों को जबरन गायब किया जा रहा है। यातनाएं दी जा रही हैं। हत्या और लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। कई लोग या तो देश छोड़कर जा रहे हैं या फिर डर के साए में जी रहे हैं।
वहीं, यूएनएचआरसी के 61वें सत्र के दौरान स्विट्जरलैंड के जिनेवा में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। ‘बलूच नेशनल मूवमेंट’ (BNM) के सदस्यों ने एक रैली निकालकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने अपनी रैली ‘पार्क डेस क्रॉपेट्स’ से शुरू की, जो मानवाधिकारों के प्रतीक ‘ब्रोकन चेयर’ स्मारक तक पहुंची। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और पीड़ितों के परिवार शामिल हुए। उनके हाथों में लापता व्यक्तियों की तस्वीरें, बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर न्याय और जवाबदेही की मांग करने वाले नारे लिखे थे।
फोटो प्रदर्शनी से बयां किया दर्द
ब्रोकन चेयर स्मारक के पास एक विशेष फोटो प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में लापता व्यक्तियों के पोर्ट्रेट और उनके परिवारों की आपबीती को दर्शाया गया था। नियाज बलूच ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सत्र में हिस्सा लेने वाले राजनयिकों, स्विस नागरिकों और वैश्विक समुदाय को बलूचिस्तान की असली तस्वीर दिखाना है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा और जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें विशेषज्ञ और राजनीतिज्ञ इस संकट पर चर्चा करेंगे।
प्रदर्शन के दौरान हकीम बलूच ने पाकिस्तान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “पिछले एक साल में ही अपहरण के 1,300 से अधिक मामले सामने आए हैं। कार्यकर्ताओं के परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है ताकि विरोध की आवाज को दबाया जा सके। बलूच महिलाओं को हिरासत में रखा गया है और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना निष्पक्ष सुनवाई के जेलों में डाल दिया गया है।”
फेक एनकाउंटर के गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर फर्जी मुठभेड़ों का आरोप भी लगाया। हकीम बलूच ने दावा किया कि जिन लोगों को उग्रवादी बताकर मारा जा रहा है, उनमें से कई ऐसे नागरिक थे जिन्हें पहले हिरासत में लिया गया था और बाद में मुठभेड़ का नाम देकर उनकी हत्या कर दी गई।
वहीं, वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. लखू लुहाना ने पाक के सिंध प्रांत में बढ़ती गरीबी व असमानता पर चिंता व्यक्त की। कहा, संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद क्षेत्र में गरीबी बढ़ी है।
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