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लग जा गले…लिखने वाला एक ऐसा गीतकार जिसने मौत के बिस्तर पर किया था दोस्त से मिलने का वादा, कब्र पर हुई मुलाकात

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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लग जा लगे जैसा गाना लिखने वाले इस गीतकार ने कम उम्र में ही छोड़ दी थी दुनिया। दोस्त को वादा किया कि फिर मुलाकात होगी। लेकिन वो मुलाकात गीतकार की मौत के बाद उनकी कब्र पर हुई। एक शानदार गीतकार इस दुनिया से जा चुका था।

मेहदी1964 में एक फिल्म आई थी ‘वो कौन थी?’। इस फिल्म में मनोज कुमार और साधना ने लीड किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी दो जुड़वा बहनों पर बेस्ड थी, कोर्टरूम ड्रामा और खूब सारा इमोशन। उस दौर की ये सबसे फिल्म मानी गई। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाका किया था। लेकिन फिल्म की कहानी से ज्यादा चर्चे म्यूजिक के हुए। इस फिल्म के गाने उस दौर में कमाल कर रहे थे। आज भी अगर गाने सुनने बैठ जाओ तो आप साथ में गुनगुना से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इन खूबसूरत गाने बनाने वालों को कम ही याद किया जाता है। लेकिन इस फिल्म के गाने दो दोस्तों की मिसाल थे।

बीमारी से पीड़ित थे गीतकार

फिल्म ‘वो कौन थी?’ के गाने ‘आप क्यों रोए’, ‘नैना बरसे रिमझिम’, ‘छोड़कर तेरे प्यार का दामन’, ‘शोख नजर की बिजलियां’ और ‘लग जा गले कि फिर हसीं रात हो’। उस दौर में ये गाने खूब मशहूर हुए। इन गानों को म्यूजिक दिया था मदन मोहन और उनके दोस्त और उस समय के सबसे बड़े गीतकारों में से एक राजा मेहदी अली खान ने। ऐसा कहा जाता है जब फिल्म ‘वो कौन थी? के गाने दुनियाभर में धूम मचा रहे थे उस समय राजा मेहदी हॉस्पिटल के बिस्तर पर थे। बताया जाता है कि वो लंबे समय से कई बीमारियों से पीड़ित थे। हॉस्पिटल में भर्ती के दौरान भी वो लिखते और मिलने आने वाले लोगों के साथ हंसी-मजाक करते।

राजा मेहदी के लिखे गीत
राजा मेहदी अली खान असल में पाकिस्तान से थे। लेकिन विभाजन के बाद उन्होंने भारत में रहना चुना। इस देश में रहकर उन्होंने कला के क्षेत्र में अपने मरते दम तक काम किया। राजा मेहदी ने अपने फिल्मी करियर के दौरान कई बेहतरीन गाने लिखे। उनकी गानों की लिस्ट में अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे सब अपने गम दे दो’, ‘झुमका गिरा रे’, ‘नैनों में बदरा छाए’ शामिल हैं। लेकिन ‘लग जा गले कि फिर हसीं रात हो न हो’ उनके मन में छुपे दर्द को बयां कर रहा है। इस गाने में हमेशा के लिए बिछड़न के बारे में बात की गई है। ऐसी ही एक बात उन्होंने इस गाने के म्यूजिक कंपोजर मदन मोहन से अपने आखिरी वक्त में की थी।

दोस्त को किया था मिलने के वादा

ये बात उनकी मौत से कुछ दिनों पहले का है। राजा मेहदी अली खान उस समय ज्यादा बीमार थे। उनसे जुड़े लोगों को आभास होने लगा था कि कुछ बुरा होने वाला है। ऐसे में उनके खास दोस्त मदन मोहन जिनके म्यूजिक के लिए उन्होंने कई गीत लिखे थे उनसे मिलने हॉस्पिटल आए। अपने आखिरी समय में भी राजा मेहदी हंसी-मजाक कर रहे थे। लेकिन मदन मोहन शांत और निराश थे। इसी दौरान राजा मेहदी को पता चला कि मदन मोहन को जरूरी काम से कलकाता जाना है, लेकिन दोस्त को हॉस्पिटल के बिस्तर पर छोड़कर नहीं जाना चाहते। ऐसे में गीतकार ने उन्हें मनाया और कलकाता भेजा। साथ ही वादा किया कि जब आप आएंगे तो हम फिर से मिलेंगे। मदन मोहन उम्मीद के साथ चले गए लेकिन जब वो वापस लौटे तो उन्हें नहीं पता था कि दोस्त राजा मेहदी से उनकी अगली मुलाकात उनकी कब्र पर होगी। एक शायर, कवि, गीतकार इस दुनिया से जा चुका था। रिपोर्ट के मुताबिक 51 साल की उम्र में 1966 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN