Source :- LIVE HINDUSTAN
नए प्रावधान के अनुसार, यदि कर्मचारी किसी रिश्तेदार को किराया देता है, तो उसे फॉर्म 12BA में मकान मालिक के साथ अपने संबंध का खुलासा करना होगा। पहले सिर्फ मकान मालिक का पैन देना जरूरी था लेकिन अब ऐसा नहीं है।
अगर आप नौकरीपेशा हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स-2026 के में कुछ ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो नौकरीपेशा लोगों को जानना जरूरी है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जानना जरूरी है जो अपने किसी रिश्तेदार के घर में बतौर किरायेदार रहते हैं।
दरअसल, नौकरीपेशा लोगों द्वारा माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को किराया देकर हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में छूट लेना लंबे समय से एक वैध टैक्स प्लानिंग तरीका माना जाता रहा है। अब ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स-2026 में इसको लेकर क्या अपडेट है, आइए जान लेते हैं।
क्या है डिटेल?
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स-2026 में भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। नए प्रावधान के अनुसार, यदि कर्मचारी किसी रिश्तेदार को किराया देता है, तो उसे फॉर्म 12BA में मकान मालिक के साथ अपने संबंध का खुलासा करना होगा। पहले सिर्फ मकान मालिक का पैन देना जरूरी था लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब मकान मालिक से रिश्ते के बारे में भी बताना होगा। इसमें रिलेशनशिप विद लैंडलॉर्ड के तहत जानकारी देनी होगी। कहने का मतलब है कि ड्राफ्ट रूल किसी भी तरह से माता-पिता या रिश्तेदारों को किराया देने पर प्रतिबंध नहीं लगाता है। अगर आप अपने माता-पिता या रिश्तेदारों को किराया देते हैं तो आपके लिए टेंशन की बात नहीं है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
टैक्स से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक यह बदलाव टैक्स चोरी रोकने के लिए है। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों के बीच होने वाले किराया लेन-देन को पारदर्शी बनाना है, ताकि फर्जी या कागजी दावों पर अंकुश लगाया जा सके। यदि किरायेदारी वास्तविक है, विधिवत रेंट एग्रीमेंट बना हुआ है, भुगतान बैंकिंग माध्यम से हो रहा है और मकान मालिक अपनी आयकर रिटर्न में किराये की आय दिखा रहा है, तो HRA छूट पूरी तरह वैध रहेगी।
वहीं, किराया केवल कागजों पर दिखाया गया है, भुगतान वास्तविक नहीं है या मकान मालिक ने उसे अपनी आय में शामिल नहीं किया है, तो ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही
नियमों के ड्राफ्ट में विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट के क्लेम के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट के क्लेम के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी।
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