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यूक्रेन के छह नागरिकों को हिरासत में लेने का क्या है मामला, यूक्रेन के आरोपों पर भारत ने क्या कहा?

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Source :- BBC INDIA

यूक्रेन के नागरिकों को 16 मार्च 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट में एनआईए अदालत में पेश किया गया

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3 घंटे पहले

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यूक्रेन ने अपने छह नागरिकों को भारत में हिरासत में लिए जाने पर विरोध जताया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ इन लोगों पर बगैर अनुमति के मिज़ोरम में प्रवेश करने और गैरक़ानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है.

यूक्रेन के दूतावास ने इस मामले पर एक्स पर जारी प्रेस रिलीज में कहा है कि इन लोगों को हिरासत में लिए जाने की कार्यवाही ‘रूसी पक्ष की ओर से दी गई सूचना के आधार पर हुई है.’

गुरुवार को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस पर टिप्पणी की है.

रणधीर जायसवाल ने कहा, “उन इलाकों में जाने के लिए परमिट लेना जरूरी होता है. उनके ( यूक्रेनी नागरिकों) पास यह विशेष अनुमति थी या नहीं, इसका फ़ैसला अब अदालत करेगी. अदालत में ये मामला पेश किया जाएगा तभी सच्चाई सामने आएगी.”

रणधीर जायसवाल ने कहा, “मैं ये कहूंगा कि अगर इस मामले में एनआईए अगर कोई बयान जारी करे तो आप उसे देखें. मैं अभी इसके तकनीकी ब्योरे में नहीं गया हूं, लेकिन मेरी समझ है कि उस इलाके में यात्रा करने के लिए उनके पास कुछ जरूरी दस्तावेज नहीं थे.”

यूक्रेन के दूतावास ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा है कि यूक्रेन किसी भी ‘आतंकवादी गतिविधि’ में शामिल होने के लिए दिए जाने वाले बढ़ावे को ख़ारिज करता है. यूक्रेन हर दिन रूस के ‘आतंक’ का नतीज़ा भुगत रहा है. यही वजह है कि सैद्धांतिक तौर पर वो हर तरह के ‘आतंकवाद’ के खिलाफ़ बिना किसी समझौते के लड़ने का पक्षधर है.

यूक्रेन ने क्या कहा?

यूक्रेन के दूतावास का प्रेस बयान

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दूतावास ने आगे लिखा है, ”छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लेने की सार्वजनिक सूचनाएं और मीडिया रिपोर्ट्स संकेत देती हैं कि ये कार्यवाही रूसी पक्ष की ओर से मुहैया कराई गई जानकारियों के आधार पर की गई है. भारत में यूक्रेन का दूतावास इस पर काफी चिंतित है. ख़ासकर मौजूदा परिस्थितियों को लेकर जो ये संकेत देती है कि ये मामला सुनियोजित और राजनीति से प्रेरित है.”

यूक्रेन की समाचार एजेंसी यूकेआरइन्फ़ॉर्म ने विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात की और हिरासत में लिए गए यूक्रेनी नागरिकों तक कॉन्सुलर पहुंच (दूतावास से संपर्क) देने और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है.

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी है.

यूकेआरइन्फ़ॉर्म के मुताबिक़ यूक्रेनी नागरिकों के साथ एक अमेरिकी नागरिक को भी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कथित गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप में हिरासत में लिया है.

पीटीआई ने इस बारे में दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के एक प्रवक्ता ने पूछा तो उन्हें जवाब मिला, “हमें इसकी जानकारी है, लेकिन गोपनीयता कारणों से हम अमेरिकी नागरिकों से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकते.”

भारत और रूस के मीडिया पर लगाए ये आरोप

एनआईए के अधिकारी यूक्रेनी नागरिकों को अदालत में ले जाते हुए

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फ़िलहाल यह साफ़ नहीं है कि ये विदेशी नागरिक मिज़ोरम में क्यों थे.

पीटीआई के मुताबिक़ यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह मामला मिज़ोरम में बिना अनुमति मौजूद रहने से जुड़ा है.

पीटीआई के मुताबिक़ मंत्रालय ने यह भी कहा कि मामला भारत और म्यांमार की सीमा को कथित रूप से अवैध तरीके से पार करने से भी जुड़ा है.

यूक्रेन की समाचार एजेंसी यूकेआरइन्फ़ॉर्म ने विदेश मंत्रालय के हवा अंतरराष्ट्रीय मानकों के उलट, भारत में यूक्रेन के दूतावास को इन नागरिकों की हिरासत के बारे में भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई. यूक्रेन ने अपने नागिरकों तुरंत और बिना बाधा कॉन्सुलर पहुंच देने की गुज़ारिश की है.

पीटीआई के मुताबिक़ राजदूत पोलिशचुक ने सिबी जॉर्ज से मुलाकात के दौरान एक आधिकारिक विरोध-पत्र भी सौंपा, जिसमें यूक्रेनी नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की गई.

यूकेआरइन्फ़ॉर्म ने विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि ये नागरिक भारत या म्यांमार में किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल थे. यूक्रेन ने आरोप लगाया कि कुछ भारतीय और रूसी मीडिया संस्थान इस मामले को लेकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.

यूक्रेन के अनुसार, इन छह नागरिकों को कानूनी सहायता और वकील उपलब्ध कराया गया है.

पीटीआई के मुताबिक़ 16 मार्च को इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें यूक्रेन दूतावास के प्रतिनिधि भी मौजूद थे, लेकिन उन्हें हिरासत में लिए गए लोगों से सीधे मिलने की अनुमति नहीं दी गई.

सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 27 मार्च तक हिरासत में भेज दिया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS