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युद्ध में ईरान को मिली सफलता; इजरायल के पूर्व वाइस NSA ने खोली अमेरिकी अभियान की पोल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इजरायल के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ईरान युद्ध को लेकर कहा है कि अमेरिका और इजरायल इसमें असफल रहे। उन्होंने कहा कि ट्रंप और नेतन्याहू प्रशासन को अपने उद्देश्यों को पूरा किए बिना इस युद्ध को खत्म करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

Iran War Update: पश्चिम एशिया में जारी संकट के खत्म होने के संकेत मिलने लगे हैं। दोनों पक्षों के बीच मौजूद अविश्वास के बाद भी अब शांति के प्रयास जारी हैं। कोई भी पक्ष अब युद्ध को शुरू करने की तरफ नहीं देख रहा है। युद्ध के बंद होने और शांति के प्रयासों के बीच अब इस पूरे घटनाक्रम के परिणामों के बारे में बात हो रही है। इसी पर इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार चक फ्रैलिइच का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में अमेरिका और ईरान अपने मुख्य उद्देश्यों को हासिल करने में नाकाम रहे, जबकि ईरान इन दोनों शक्तियों का सामना करने में सफल रहा।

फर्स्टपोस्ट को दिए इंटरव्यू में चक ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू द्वारा किए जा रहे जीत को दावों की पोल खोली। उन्होंने कहा,”इस युद्ध को पलटकर देखने पर तस्वीर साफ होती है कि अमेरिका और इजरायल अपने प्रमुख लक्ष्यों को हासिल करने में सफल नहीं हुए। पहला लक्ष्य था ईरान की सत्ता परिवर्तन करना, वह विफल रहा। दूसरे नंबर पर था, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म कर देना, लेकिन वह भी पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के बहुत से सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है, लेकिन अभियान सफल नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा, “इसमें संदेह नहीं है कि ईरान की सैनिक शक्ति को काफी नुकसान पहुंचाया गया है। उसके परमाणु कार्यक्रम को काफी हद तक पीछे धकेल दिया गया है। मिसाइल कार्यक्रम, खासतौर पर भविष्य में मिसाइल निर्माण की क्षमता को नष्ट कर दिया है।”उन्होंने कहा कि इस आधार पर यह साफ है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान में चलाया गया अभियान सैन्य रूप से सफल रहा है। लेकिन अगर इसे राजनीतिक तौर पर देखें, तो यह असफल रहा है।

ईरान का इस युद्ध में खड़े रहने ही उसकी सफलता: चक

28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायली हमले के साथ जब युद्ध शुरू हुआ था, तब इसके परिणाम को लेकर असमंजस की स्थिति थी। लेकिन ईरान ने पांच हफ्तों तक लगातार इन दोनों शक्तियों का सामना किया। चक ने कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के खतरे को पूरी दुनिया के लिए एक डर का इस्तेमाल किया। इस रणनीतिक हथियार ने अमेरिका जैसी महाशक्ति को अपने लक्ष्य बदलने और अपने उद्देश्यों को पूरा किए बिना युद्ध को खत्म करने के लिए मजबूर कर दिया।

दोनों देशों के बीच में विश्वास का संकट: चक

दोनों देशों के बीच में लगातार लटकती शांति वार्ता को लेकर भी चक ने अपनी राय रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दोनों देशों के बीच में काफी पहले से अविश्वास की स्थिति है। अमेरिका और ईरान के बीच 2015 में हुए समझौते के बाद यह विश्वास थोड़ा बढ़ा था। लेकिन 2018 में जब ट्रंप ने इसे रद्द कर दिया, तो यह संकट बढ़ गया। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह और भी ज्यादा बढ़ गया है।

चक ने कहा, “अमेरिका चाहता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए। वह इजरायल के साथ मिलकर पूरी तरह से इनरिच्ड यूरेनियम को खत्म करना चाहता है, लेकिन ईरान इस पर सहमत नहीं है। दूसरी तरफ, इस लड़ाई में अमेरिका और इजरायल की साझा ताकत के सामने मजबूती से खड़ा रहा ईरान स्वयं को विजेता की तरह देख रहा है। इसी वजह से वह अपने ऊपर लगे सभी प्रतिबंधों को खत्म करने और विदेशों में फंसे अपने धन को वापस मांग रहा है। दोनों देशों के बीच मांगो में काफी अंतर है। ऐसे में समझौते की संभावना काफी कम है।

बता दें, अमेरिका और ईरान के बीच में फिलहाल बयानबाजी का दौर जारी है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि वह अमेरिका पर भरोसा नहीं करता है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक ईरान ने मध्यस्थ पाकिस्तान को अपनी शर्तें बता दी हैं। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका की तरफ से साफ कहा जा रहा है कि वह ईरान के साथ बातचीत में है। हालांकि, अभी तक किसी भी तरह के समझौते पर सहमति बनती नहीं दिख रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN