Source :- LIVE HINDUSTAN
आरबीआई ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS)’ नामक एक नई प्रणाली विकसित कर रहा है। अब बैंक अकाउंट को दूसरे बैंक में स्विच करना मोबाइल नेटवर्क के पोर्टेबिलिटी की तरह होगा। फिलहाल अधिकांश बैंक ग्राहकों के लिए बैंक खाता बदलना एक जटिल प्रक्रिया है।
पेमेंट्स विजन 2028 के तहत केंद्रीय रिजर्व बैंक (RBI) ग्राहकों को बेहतर बैंकिंग सर्विस देने के लिए बड़ी योजना पर काम कर रहा है। अब बैंक अकाउंट को दूसरे बैंक में स्विच करना मोबाइल नेटवर्क के पोर्टेबिलिटी की तरह होगा। इसके अलावा, आरबीआई का फोकस फ्रॉड से सुरक्षा सुनिश्चित करने, सीमा-पार पेमेंट्स फ्रेमवर्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने पर भी है।
बैंक अकाउंट स्विच करना होगा आसान
आरबीआई ‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS)’ नामक एक नई प्रणाली विकसित कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म एक सेंट्रल हब की तरह काम करेगा, जहां ग्राहक अपने सभी पेमेंट मेंडेट एक ही जगह पर देख और नियंत्रित कर सकेंगे। इसके साथ ही, वे इन निर्देशों को आसानी से एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर पाएंगे। कहने का मतलब है कि ग्राहक आसानी से बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी कर सकेंगे। यह ठीक वैसे ही होगा जैसे मोबाइल नंबर बदले बिना नेटवर्क बदला जाता है। अब उसी तरह ग्राहक बिना वित्तीय बाधा के बैंक भी बदल सकेंगे। फिलहाल अधिकांश बैंक ग्राहकों के लिए बैंक खाता बदलना एक जटिल प्रक्रिया है। एक बार खाता सैलरी, सब्सिडी, ईएमआई और बीमा जैसी सेवाओं से जुड़ जाता है, तो कई तरह के ऑटोमैटिक भुगतान के कारण इसे दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की योजना है। आरबीआई मौजूदा नियमों और तकनीकी बाधाओं की समीक्षा कर रहा है, ताकि सीमा-पार लेनदेन तेज, सस्ता और पारदर्शी हो सके। इसके साथ ही सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के विस्तार से भी वैश्विक भुगतान को और सुगम बनाने की उम्मीद है।
ई-चेक
चेक के मामले में RBI ने कहा कि धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजाइन और सुरक्षा सुविधाओं की समीक्षा करने की योजना पर काम हो रहा रहा है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक चेक भी शुरू किए जाएंगे। केंद्रीय रिजर्व बैंक के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रॉनिक चेक शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। अनधिकृत ट्रांजैक्शन को लेकर RBI अब ‘साझा दायित्व’ के तरीके पर काम कर रहा है।
RBI ने कहा कि अनधिकृत डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन से उत्पन्न होने वाले दायित्व को ग्राहक का बैंक (जारीकर्ता) और लाभार्थी का बैंक, दोनों मिलकर वहन करेंगे। RBI एक ऐसी सुविधा लाने की योजना बना रहा है, जिसके जरिए आप किसी भी डिजिटल पेमेंट मोड पर होने वाले लेन-देन को चालू या बंद कर सकेंगे। ठीक वैसे ही, जैसे आज कार्ड कंट्रोल काम करते हैं। RBI ने पेमेंट के लेन-देन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका पर ध्यान दिलाया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म अब काफी बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसलिए, सीधे रेगुलेशन का दायरा बढ़ाकर इन संस्थाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
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