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भारत-यूके व्यापार समझौता एक महीने में लागू होगा, आर्थिक संबंधों में मजबूती लाएगा

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भारत के व्यापारिक संबंधों में मिलेगें महत्वपूर्ण प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की G7 समिट में भागीदारी के बाद

भारत के व्यापारिक संबंधों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की G7 समिट में भाग लेने के बाद महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 24 जुलाई, 2025 को हस्ताक्षरित UK-India फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई, 2026 से लागू होगा, जो यूके संसद द्वारा तेज़ी से स्वीकृति प्रक्रिया को दर्शाता है। यह समझौता आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, जिसमें 99% भारतीय निर्यात यूके में बिना शुल्क के जाएगा और 90% यूके उत्पादों को भारत में शून्य-टैरिफ पहुंच प्राप्त होगी।

साथ ही, India-EU FTA भी प्रगति पर है, जिसमें दोनों पक्ष 2026 के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन дер लेयेन ने इस “सभी सौदों की जननी” के शीघ्र क्रियाशील बनाने पर जोर दिया है, जिसका लक्ष्य 90% से अधिक वस्तुओं पर शुल्क में कटौती करना और यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत की अर्थव्यवस्था तक पहुंच को बढ़ाना है।

ये विकास भारत की वैश्विक व्यापार भागीदारियों को मजबूत करने की रणनीतिक कोशिशों को दर्शाते हैं, जो आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देंगे।

**India-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: द्विपक्षीय व्यापार में एक मील का पत्थर**

India-UK FTA, जिसका हस्ताक्षर 24 जुलाई, 2025 को प्रधानमंत्री मोदी के लंदन के आधिकारिक दौरे के दौरान किया गया, द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस समझौते का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $120 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करना है, जिसके लिए 90% से 99% वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करना और मुख्य सेवा क्षेत्रों का उदारीकरण करना शामिल है, जो इसे G7 राष्ट्र के साथ भारत का सबसे व्यापक व्यापार समझौता बनाता है।

**India-UK FTA के मुख्य प्रावधान:**

– **वस्तुओं के लिए बाज़ार पहुँच:** यूके अपने कस्टम्स शुल्क को सात वर्षों की अवधि में अपने 100% टैरिफ लाइनों पर समाप्त करेगा, जो मूल्य के आधार पर 99.6% भारतीय निर्यात को कवर करता है। भारत, 10 वर्षों के शेड्यूल के तहत, यूके के आयात का लगभग 70% प्रतिनिधित्व करने वाली 80% से अधिक टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्ति या कटौती प्रदान करेगा।

– **सेवाओं का उदारीकरण:** यह समझौता मुख्य सेवा क्षेत्रों में उदारीकरण के प्रावधान शामिल करता है, जिससे भारतीय और यूके सेवा प्रदाताओं दोनों के लिए पहुँच बढ़ेगी।

– **निवेश प्रोत्साहन:** यह FTA दोनों देशों के बीच निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल बनाने का लक्ष्य रखता है, जो आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा।

**India-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: आर्थिक संबंधों को मज़बूत बनाना**

India-EU FTA, जिसका निष्कर्ष 27 जनवरी, 2026 को हुआ, लगभग दो दशकों की वार्ताओं के बाद, विश्व के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से एक बनने जा रहा है। यह समझौता 2032 तक यूरोपीय संघ के भारत के लिए माल निर्यात को दोगुना करने की उम्मीद करता है, जिससे 96.6% EU निर्यात पर शुल्क समाप्त या कम होंगे, और प्रति वर्ष लगभग 4 अरब यूरो की बचत होगी।

**India-EU FTA की मुख्य विशेषताएं:**

– **शुल्क में कटौती:** यह समझौता EU से भारत को किए जाने वाले 96% से अधिक माल निर्यात पर शुल्क समाप्त या कम करने का लक्ष्य रखता है, जो विभिन्न उत्पादों को कवर करता है।

– **बाज़ार पहुँच:** यूरोपीय कंपनियां भारत की 1.45 बिलियन की जनसंख्या वाले बाज़ार में बेहतर पहुंच प्राप्त करेंगी।

– **निवेश संरक्षण:** FTA में निवेश संरक्षण के प्रावधान शामिल हैं, जो दोनों क्षेत्रों के व्यवसायों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करते हैं।

**वैश्विक व्यापार के लिए प्रभाव**

ये समझौते भारत की व्यापार नीति में एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाते हैं, जो प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है। India-UK FTA द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, जबकि India-EU FTA भारत को यूरोपीय बाज़ार के साथ और अधिक निकटता से जोड़ते हुए आर्थिक विकास और सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।

**निष्कर्ष**

G7 समिट में भारत की भागीदारी ने उसके व्यापार संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति को बढ़ावा दिया है, विशेषकर UK और EU के साथ। जल्द ही लागू होने वाला India-UK FTA और अपेक्षित India-EU FTA का अंतिम रूप, भारत की वैश्विक व्यापार भागीदारियों को बढ़ावा देने, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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