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बचपन में पिता को पुलिस से पिटते देखा, अयातुल्लाह खामेनेई से कितने अलग हैं मोजतबा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मध्यम श्रेणी के धर्मगुरु मोजतबा को 2022 में ही अयातुल्लाह की उपाधि दे दी गई थी। इसलिए इस पदोन्नति से संकेत मिलता है कि उन्हें अपने बूढ़े और बीमार पिता के बाद सत्ता संभालने के लिए तैयार किया जा रहा था।

Mojtaba Khamenei: ईरान में मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम बनते ही नए युग की शुरुआत हो चुकी है। अपने पिता से भी कट्टर माने जाने वाले मोजतबा की छवि एक ऐसे नेता की रही है जो पर्दे के पीछे रहकर इस्लामिक शासन में बड़ी भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने कैमरे से दूरी बनाई और ना ही कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा, और ना कभी मंत्री बने। अब ईरान के सर्वोच्च पद पर पहुंचे मोजतबा का बचपन मुश्किल दौर में बीता।

मोजतबा का जन्म 1969 में ईरानी शहर मशहद में हुआ था। यह इस्लामिक क्रांति का दौरा था। उस समय, उनके पिता और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई अमेरिका समर्थित शाह के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। मोजतबा जब छोटे थे, उनके घर पर SAVAK (शाह की सीक्रेट पुलिस) ने छापा मार दिया था। इस दौरान उनके सामने उनके पिता को पीटा गया और बच्चों से कहा गया कि पिता छुट्टी पर जा रहे हैं। इस घटना ने मोजतबा पर गहरा असर डाला।

17 साल की उम्र में लड़ा युद्ध

इसके बाद महज 17 वर्ष की उम्र में मोजतबा ने अपनी मर्जी से ईरान-इराक युद्ध में सेवा दी। उन्होंने 1990 के दशक के बीच जनता का ध्यान आकर्षित करना शुरू किया, क्योंकि उस समय तक उनके पिता की सत्ता सर्वोच्च नेता के रूप में सुदृढ़ रूप से स्थापित हो चुकी थी। उन्हें अक्सर एक औपचारिक पद धारण करने वाले सार्वजनिक राजनीतिक व्यक्ति के बजाय एक गेटकीपर और सत्ता के गलियारे के मध्यस्थ के रूप में देखा जाता था।

कैसी है मोजतबा की छवि?

समय के साथ उनकी प्रतिष्ठा दो प्रमुख विशेषताओं पर केंद्रित हो गई है। पहली, ईरान के सुरक्षा तंत्र विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और इसके कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके घनिष्ठ संबंध। दूसरी, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी हस्तक्षेप के प्रति उनका कड़ा विरोध। 2019 में ट्रंप प्रशासन ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया था। उन पर आरोप था कि वे कोई औपचारिक सरकारी पद धारण किए बिना सर्वोच्च नेता की ओर से आधिकारिक क्षमता में कार्य कर रहे थे।

अपने पिता से कितने अलग होंगे मोजतबा?

ईरान के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसका उत्तर संभवतः उतना अलग नहीं होगा जितना कई लोग उम्मीद कर रहे होंगे। अली खामेनेई क्रांतिकारी पीढ़ी के एक प्रमुख व्यक्ति थे। उनकी सत्ता वैचारिक वैधता, दशकों तक सत्ता संचय और सुदृढ़ीकरण और प्रतिस्पर्धी गुटों के बीच मध्यस्थता करने की उनकी क्षमता पर आधारित था। समय के साथ वे व्यवस्था के अंतिम निर्णायक बन गए।

इसके विपरीत, मोजतबा खामेनेई को अक्सर एक सार्वजनिक धर्मशास्त्री या राजनीतिक नेता के बजाय रक्षा प्रतिष्ठान की उपज के रूप में चित्रित किया जाता है। वे अपने भाषणों या धार्मिक अधिकार के बजाय अपने प्रभाव और पर्दे के पीछे समन्वय के लिए बनाए गए नेटवर्क के लिए अधिक जाने जाते हैं।

क्या रुख अपनाएगा ईरान?

मुजतबा खामेनेई की छवि एक अधिक सुरक्षा-केंद्रित नेतृत्व शैली का संकेत देती है, जिसके तीन संभावित रास्ते हैं। पहला, घरेलू नियंत्रण और सख्त हो सकता है। रक्षा प्रतिष्ठान से मुजतबा के कथित संबंधों को देखते हुए, अशांति को राजनीतिक सुलह के बजाय त्वरित दमन से दबाए जाने की अधिक संभावना है। दूसरा, मोजतबा के सुरक्षा बलों के साथ घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए आईआरजीसी क्षेत्रीय मामलों में अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। तीसरा, पश्चिम के साथ कोई भी परिवर्तनकारी वार्ता होने के बजाय सामरिक रणनीति के इस्तेमाल की संभावना होगी। संक्षेप में, मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान संभवतः बयानबाजी के स्तर पर टकरावपूर्ण रुख अपनाएगा, लेकिन शासन के अस्तित्व के खतरे में पड़ने पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN