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पाकिस्तान ने काबुल और कंधार पर किए हवाई हमले, अफ़ग़ान तालिबान का सीमा पर जवाबी कार्रवाई का दावा

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Source :- BBC INDIA

अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी हमले

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4 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने अफ़ग़ान तालिबान के ख़िलाफ़ ‘खुली जंग’ का एलान किया है.

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने अफ़ग़ान तालिबान को चेतावनी देते हुए कहा कि “हमारा धैर्य समाप्त हो गया है” और अब “खुला युद्ध” होगा.

बीबीसी उर्दू के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में, उन्होंने अफ़ग़ान तालिबान पर “अफ़ग़ानिस्तान में दुनिया भर से आतंकवादियों को इकट्ठा करने” का आरोप लगाया और कहा कि काबुल में अंतरिम सरकार ने “आतंकवाद का एक्सपोर्ट” किया है.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने राजधानी काबुल, पक्तिका और कंधार में कुछ स्थानों पर बमबारी की है. हालाँकि उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ है.

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि अफ़ग़ान तालिबान ने “अपने लोगों को बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित कर दिया है और इस्लाम ने महिलाओं को जो अधिकार दिए हैं, उनसे भी वंचित कर दिया है.

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पाकिस्तान और अफ़गान तालिबान के बीच जंग के हालात पैदा हो गया है (फ़ाइल फ़ोटो)

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बीबीसी उर्दू के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार ने दावा किया है कि अब तक उसके सैन्य अभियानों में अफ़ग़ान तालिबान के 133 सदस्य मारे गए हैं और 200 घायल हुए हैं.

सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने एक्स पर अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के काबुल, पक्तिका और कंधार में अफ़ग़ान तालिबान के रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया है.

उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के अभियानों में अफ़ग़ान तालिबान के दो कोर मुख्यालय, दो हथियार डिपो, एक लॉजिस्टिक्स गोदाम, तीन बटालियन मुख्यालय, दो सेक्टर मुख्यालय और 80 से अधिक टैंक नष्ट हो गए.

बीबीसी इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है. हालांकि, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से अभियान अब भी जारी है.

देर रात से धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं

पाकिस्तान और अफ़गान तालिबान के बीच तनाव लंबे समय से जारी है

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समाचार एजेंसी एएफ़पी न्यूज़ टीम के मुताबिक, सुबह-सुबह अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें आईं

उन्होंने बताया कि रात क़रीब 1.50 बजे पूरे शहर में लड़ाकू विमानों की आवाज़ के साथ धमाकों की आवाज़ सुनी जा सकती थी, और बताया कि सेंट्रल काबुल में सुबह क़रीब 2.30 बजे तक गोलियों की आवाज़ सुनी गई.

काबुल और कंधार पर हमले पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच बीते कुछ समय से चली आ रही झड़पों की सीरीज़ में सबसे नए हैं, जबकि दोनों देश अक्तूबर 2025 में एक सीज़फ़ायर पर सहमत हुए थे.

पिछले हफ़्ते, पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान पर रात भर कई एयर स्ट्राइक किए, जिसमें तालिबान ने कहा कि महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 18 लोग मारे गए हैं.

पाकिस्तान ने कहा था कि हमलों में पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान बॉर्डर के पास सात कथित मिलिटेंट कैंप और ठिकानों को टारगेट किया गया था, और कहा कि ये हमले पाकिस्तान में हाल ही में हुए आत्मघाती बम हमलों के बाद किए गए थे.

इस बीच, तालिबान शासन ने कहा कि आम लोगों के घरों और एक धार्मिक स्कूल को टारगेट किया गया था, जिसमें मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

एक-दूसरे पर आरोप

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़

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पाकिस्तानी और अफ़ग़ान सेनाओं के बीच दुश्मनी के पिछले दौर की तरह, दोनों पक्षों ने एक- दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगाया है. और दोनों का दावा है कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुँचाया है.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने “बिना उकसावे के अफ़ग़ान हमलों” के जवाब में काबुल और कंधार समेत शहरों पर “काउंटर स्ट्राइक” किए.

अफ़ग़ान तालिबान ने कहा कि उसने इस हफ़्ते की शुरुआत में हुए हमलों के जवाब में “बड़े पैमाने पर” ऑपरेशन शुरू किया था, जिसमें उसने दावा किया था कि कम से कम 18 लोग मारे गए थे.

तालिबान के सैन्य प्रवक्ता वहीदुल्लाह मोहम्मदी ने कहा कि “जवाबी ऑपरेशन” गुरुवार को स्थानीय समय के हिसाब से रात क़रीब आठ बजे शुरू किया गया था.

मुख्य प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हमले में “कई” पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई अन्य को पकड़ लिया गया – लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस दावे से इनकार किया.

पाकिस्तान का कहना है कि गुरुवार देर रात अफ़ग़ान तालिबान ने अपनी साझी सीमा पर मिलिट्री ठिकानों पर ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें उसके दो सैनिक मारे गए.

अफ़ग़ान तालिबान ने कहा कि उसने इस हफ़्ते की शुरुआत में हुए हमलों के जवाब में “बड़े पैमाने पर” ऑपरेशन शुरू किया था, जिसमें उसने दावा किया था कि कम से कम 18 लोग मारे गए थे. इस्लामाबाद ने कहा कि उसने कथित मिलिटेंट कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया था

ताज़ा संघर्ष की शुरुआत

अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई (फ़ाइल फ़ोटो)

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अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने काबुल, कंधार और पक्तिका में हुए पाकिस्तानी हमलों की निंदा की है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “अफ़ग़ानिस्तान के लोग अपनी पूरी एकता के साथ अपनी धरती की रक्षा करेंगे और साहस के साथ आक्रामकता का जवाब देंगे.”

पाकिस्तान और अफ़ग़ान तालिबान के बीच हालिया संघर्ष की शुरुआत पिछले साल 7-8 अक्तूबर की दरमियानी रात को हुई थी, जब पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने ओरकज़ई में ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की.

8 अक्तूबर को ही पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने संसद में कहा था कि सरकार और सेना का धैर्य ख़त्म हो गया है और जिन लोगों ने चरमपंथियों को शरण दी है उन्हें अब इसके नतीजे भुगतने होंगे.

पाकिस्तान कई साल से अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार से प्रतिबंधित तहरीक़-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करता है. हाल के समय में यह मांग और तेज़ हो गई है.

इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है, हालाँकि इस तनाव को कम करने के लिए शांति वार्ता और समझौता भी हुआ, लेकिन संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ.

डूरंड लाइन और विवाद का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र के नक्शों में भी डूरंड लाइन को व्यावहारिक सीमा के रूप में दिखाया गया है

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दरअसल 133 साल पहले खींची गई डूरंड लाइन आज भी पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच तनाव की वजह है.

डूरंड लाइन का नाम ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान ख़ान के साथ एक एक समझौता किया था.

इस लाइन का पश्चिमी छोर ईरानी सीमा से मिलता है, जबकि पूर्वी छोर चीनी सीमा से.

रूस के दक्षिण की ओर बढ़ते क़दमों को रोकने के लिए, ब्रिटेन ने 1839 में अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया, जिसमें ब्रिटिश सेनाएं हार गईं.

1849 में अंग्रेज़ों ने पंजाब पर क़ब्ज़ा कर लिया. फिर उन्होंने सिंधु नदी के पश्चिम में अस्पष्ट सिख सीमा पर क़ब्ज़ा किया.

इस क्षेत्र में कई पश्तून जनजातियां रहती थीं. उनका प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था अंग्रेज़ों के लिए समस्याएं खड़ी कर रही थीं.

किसी ज़माने में ‘डूरंड रेखा’ को लेकर हुए समझौते को कई अफ़ग़ान शासकों ने मान्यता दी थी.

गुज़रते समय के साथ यह समझौता विवादास्पद हो गया और अफ़ग़ानिस्तान के शासकों ने पाकिस्तान के साथ सीमा के तौर पर इसे मान्यता देने से इनकार कर दिया.

ब्रिटिश सरकार ने तत्कालीन भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों पर अपना नियंत्रण मज़बूत करने के लिए सन 1893 में अफ़ग़ानिस्तान के साथ 2640 किलोमीटर लंबी सीमा पर समझौता किया था.

इसके एक ओर अफ़ग़ानिस्तान के 12 प्रांत हैं, और दूसरी ओर ख़ैबर पख़्तूनख़्वा, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे पाकिस्तानी क्षेत्र.

दरअसल पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच एक लंबी खुली सीमा है और कई इलाक़ों में दोनों तरफ़ के लोग परंपरागत रूप से एक-दूसरे के काफ़ी क़रीब हैं.

दोनों की यह क़रीबी धार्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी है. अफ़ग़ानिस्तान में हर सरकार का मानना है कि पाकिस्तान के साथ खींची गई डूरंड लाइन इसमें दख़ल देती है, इसलिए वह इसे मानने से इनकार करता है.

पाकिस्तान डूरंड रेखा को मान्यता देता है जिससे किसी भी अलगाव की प्रक्रिया को रोका जा सकता है, और उस पश्तून राष्ट्रवाद को दबाया जा सकता है जो पाकिस्तान के संघीय ढांचे को अस्थिर कर सकता है.

इस रेखा को ज़्यादातर देशों ने मान्यता दी है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है. संयुक्त राष्ट्र के नक्शों पर इसे व्यावहारिक (डि फैक्टो) सीमा के रूप में दिखाया गया है.

अफ़ग़ानिस्तान ने शुरुआत में दबाव में आकर इसे स्वीकार किया था, लेकिन तब भी अफ़ग़ान नागरिकों ने इसे पश्तून भूमि का मनमाना विभाजन माना और इसका विरोध किया.

यह रेखा 1894 से 1896 के बीच चिह्नित की गई थी, लेकिन कई दुर्गम इलाक़ों में इसे अस्पष्ट छोड़ दिया गया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS