Home विश्व समाचार न दिखे, न रुके… हिज्बुल्लाह की नई ड्रोन चाल से बढ़ी टेंशन;...

न दिखे, न रुके… हिज्बुल्लाह की नई ड्रोन चाल से बढ़ी टेंशन; कैसे बचेगा इजरायल?

13
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

लंदन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के ड्रोन विशेषज्ञ रॉबर्ट टोलस्ट ने कहा कि अगर आपको पता है कि आप क्या कर रहे हैं, तो यह बिल्कुल घातक है। उन्होंने बताया कि ये ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़कर चुपके से लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच सकते हैं।

इजरायल-हिज्बुल्लाह संघर्ष के नए चरण में लेबनान की ईरान समर्थित आतंकवादी संगठन हिज्बुल्लाह ने एक खतरनाक नया हथियार उतारा है। ये छोटे ड्रोन दंत सूत्र (डेंटल फ्लॉस) जितनी पतली फाइबर-ऑप्टिक केबल से नियंत्रित होते हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्शन और जैमिंग से बच निकलते हैं। दरअसल, यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे इन ड्रोन का आकार बेहद छोटा है, इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल है और ये घातक साबित हो सकते हैं। सामान्य ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से प्रभावित होते हैं, लेकिन फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन में एक पतली केबल ऑपरेटर को सीधे ड्रोन से जोड़े रखती है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक जामिंग लगभग असंभव हो जाता है।

लंदन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के ड्रोन विशेषज्ञ रॉबर्ट टोलस्ट ने कहा कि अगर आपको पता है कि आप क्या कर रहे हैं, तो यह बिल्कुल घातक है। उन्होंने बताया कि ये ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़कर चुपके से लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन ड्रोन को रोकने के दो ही विकल्प हैं, या तो उन्हें उड़ान में ही मार गिराना, जो उनके छोटे आकार और निचली उड़ान के कारण कठिन है, या फिर लगभग अदृश्य फाइबर-ऑप्टिक केबल को काटने का कोई तरीका खोजना। हिज्बुल्लाह इन ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से दक्षिणी लेबनान और सीमा क्षेत्रों में तैनात इजरायली सैनिकों के खिलाफ कर रहा है।

नई तकनीक का सहारा ले रहा हिज्बुल्लाह

एक इजरायली सैन्य अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि हिज्बुल्लाह के साथ चल रही लड़ाई में फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन अपेक्षाकृत नया खतरा बनकर उभरे हैं। अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम बड़े रॉकेट, मिसाइल और अन्य ड्रोनों के खिलाफ प्रभावी साबित हुए हैं, इसलिए हिज्बुल्लाह ने इस नई तकनीक का सहारा लिया है। इजरायल का अनुमान है कि ये ड्रोन लेबनान में स्थानीय स्तर पर आसानी से बनाए जा रहे हैं। इनके लिए बाजार में उपलब्ध ड्रोन, थोड़ी मात्रा में विस्फोटक और पारदर्शी फाइबर-ऑप्टिक तार ही काफी हैं। अधिकारी ने इन्हें लेबनान में तैनात सैनिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया, हालांकि इजरायली सेना इनसे निपटने के लिए तकनीकी समाधान विकसित कर रही है। इस बीच सैन्य वाहनों पर जाल और सुरक्षा पिंजरे लगाए जा रहे हैं।

इजरायली वायु रक्षा कमान के पूर्व प्रमुख रान कोचाव ने चेतावनी दी कि इजरायल फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन से बचाव में अभी भी संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये बहुत नीचे और बहुत तेज उड़ते हैं, आकार में बेहद छोटे होते हैं। इसलिए इन्हें पहचानना बेहद मुश्किल है और पहचानने के बाद भी उन्हें मार गिराना कठिन है। कोचाव ने कहा कि इजरायल ने वर्षों तक रॉकेट और मिसाइलों से बचाव पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन ड्रोन को उतनी प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्हें लगता है कि इजरायल को यूक्रेन युद्ध में हो रही फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन तकनीक की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए थी।

यूक्रेन युद्ध में प्रौद्योगिकी की होड़

यूक्रेन में रूस और यूक्रेन दोनों नई ड्रोन तकनीक विकसित करने की होड़ में लगे हैं। रूस ईरानी शाहेद ड्रोनों का इस्तेमाल कर रहा है, जिन्हें जैमिंग से रोका जा सकता है। इसी समस्या का समाधान फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन में निकाला गया, हालांकि इनकी रेंज रेडियो या AI नियंत्रित ड्रोनों जितनी नहीं होती। टोलस्ट के अनुसार, कुछ फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन 50 किलोमीटर तक लंबी केबल के साथ देखे गए हैं। यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों में आसमान इन चमकदार तारों से भरा दिखता है, जो मकड़ी के जाल की तरह लगते हैं। कोचाव ने कहा कि इजरायल के पास ड्रोन मारक क्षमता तो है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है इन्हें समय रहते पहचानना। इजरायल के पास प्रकाश परिवर्तन, संकेत पहचान और प्रोपेलर की आवाज को ट्रैक करने वाली तकनीक पहले से मौजूद है, लेकिन उत्तरी सीमा पर इनका व्यापक विस्तार नहीं किया गया है।

हिज़्बुल्लाह के हमले और वीडियो

बता दें कि पिछले कुछ हफ्तों में हिज्बुल्लाह ने सोशल मीडिया और अल-मनार टीवी पर इन ड्रोनों से किए हमलों के वीडियो जारी किए हैं। इनमें एक हमले में एक इजरायली सैनिक की मौत हो गई और छह अन्य घायल हुए। मंगलवार को एक इजरायली नागरिक ठेकेदार की भी मौत हुई। एक वीडियो में दिखाया गया कि ड्रोन सैनिकों के पास जमा वाहन के बीच फट गया। दूसरा ड्रोन उसी जगह हेलीकॉप्टर पर हमला करने पहुंचा, जो घायलों को बचाने उतरा था, लेकिन बाल-बाल बच गया। हिज्बुल्लाह ने दावा किया है कि 2 मार्च से शुरू हुए मौजूदा संघर्ष में उसने पहली बार फाइबर-ऑप्टिक गाइडेड ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN