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न्यूट्रीशनिस्ट ने बताया खाने के साथ 2 हरी मिर्च क्यों खानी चाहिए, शुगर से मोटापे तक..मिलेंगे ये फायदे!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

न्यूट्रीशनिस्ट बताती हैं कि अगर आप अपनी बैलेंस्ड मील के साथ दो हरी मिर्च खाने की आदत बना लें, तो ये काफी हेल्दी हैबिट हो सकती है। उन्होंने इसके फायदे, खाने का सही तरीका और किन-किन लोगों को इससे परहेज करना चाहिए, जैसी सभी जरूरी बातें डिटेल में शेयर की हैं।

हमारे भारतीय खाने में हरी मिर्च का इस्तेमाल आम है। दाल-सब्जी का तड़का हो या फिर चटनी, हरी मिर्च का स्वाद लगभग हर जगह देखने को मिल जाता है। वैसे कुछ लोग खाने के साथ भी कच्ची हरी मिर्च खाना पसंद करते हैं। अब जिन्हें तीखा पसंद है उनके लिए अपनी मील के साथ हरी मिर्च खाना स्वाद के मामले में बढ़िया हो सकता है। लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो सेहत के लिए भी ये आदत बड़ी फायदेमंद होती है। न्यूट्रीशनिस्ट लीमा महाजन बताती हैं कि अगर आप अपनी बैलेंस्ड मील के साथ दो हरी मिर्च खाने की आदत बना लें, तो ये काफी हेल्दी हैबिट हो सकती है। उन्होंने इसके फायदे, खाने का सही तरीका और किन-किन लोगों को इससे परहेज करना चाहिए- जैसी सभी जरूरी बातें डिटेल में शेयर की हैं। आइए जानते हैं।

हरी मिर्च में होता है ये खास तत्व

न्यूट्रीशनिस्ट बताती हैं कि हरी मिर्च में ‘कैप्साइसिन’ नाम का एक खास तत्व मौजूद होता है। इसकी वजह से शरीर में थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया थोड़ी बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि खाना खाने के बाद शरीर गर्मी पैदा करने के लिए थोड़ी ज्यादा एनर्जी खर्च करता है। इस प्रकिया के दौरान शरीर सामान्य से ज्यादा कैलोरी बर्न कर सकता है।

मेटाबॉलिज्म और वेट लॉस में सपोर्ट कर सकती है हरी मिर्च

न्यूट्रीशनिस्ट लीमा महाजन बताती हैं कि हरी मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन TRPV रिसेप्टर को एक्टिवेट करने में मदद कर सकता है, जो ब्राउन फैट एक्टिविटी से जुड़ा हुआ होता है। इससे बॉडी को ज्यादा एनर्जी यानी कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है, जिससे वेट लॉस में फायदा होता है। वहीं ये मेटाबॉलिज्म को भी सपोर्ट करता है।

नींबू से ज्यादा होता है विटामिन सी

एक्सपर्ट कहती हैं कि अगर आप 100 ग्राम नींबू लें और 100 ग्राम ही हरी मिर्च लें, तो मिर्च में ज्यादा मात्रा में विटामिन सी मौजूद होता है। यही वजह है कि हरी मिर्च इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है और कॉलेजन प्रोडक्शन बूस्ट में भी मदद करती है।

ब्लड शुगर बैलेंस में मदद कर सकती है हरी मिर्च

लीमा बताती हैं कि कुछ स्टडीज के मुताबिक हरी मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन इंसुलिन रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे खाने के बाद तुरंत ग्लूकोज स्पाइक कम होता है।

बॉडी को नेचुरली ठंडा रखने में मदद करती है

जी हां, हरी मिर्च की हीट बॉडी को कूलिंग इफेक्ट देने का काम करती है। दरअसल ये हीट रिसेप्टर को एक्टिवेट करती है, जिससे ब्रेन को ये सिग्नल मिलता है कि हमें ठंडा होने की जरूरत है। इससे पसीना आना शुरू हो जाता है और बॉडी नेचुरली खुद की ठंडा रखती है।

पाचन को सपोर्ट कर सकती है

हरी मिर्च डाइजेशन को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है। दरअसल जब आप खाने के साथ थोड़ी सी हरी मिर्च खाते हैं तो डाइजेस्टिव एंजाइम्स और गैस्ट्रिक जूस स्टीमूलेट होते हैं।

लाल मिर्च से कैसे बेहतर है हरी मिर्च?

न्यूट्रीशनिस्ट कहती हैं कि लाल मिर्च में भी कैप्साइसिन मौजूद होता है लेकिन इसमें विटामिन सी काफी कम होता है। जबकि हरी मिर्च में विटामिन सी की मात्रा भी भरपूर होती है। इसके अलावा लाल मिर्च गट लाइनिंग को इरिटेट कर सकती है और एसिडिटी का कारण भी बन सकती है।

किन लोगों को करना चाहिए हरी मिर्च से परहेज?

न्यूट्रीशनिस्ट कहती हैं कि ज्यादातर लोगों के लिए खाने के साथ 1-2 हरी मिर्च खाना आमतौर पर सेफ होता है। लेकिन अगर इससे आपको पाचन से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं, तो अवॉइड करें। इसके अलावा जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स या GERD (गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज), गैस्ट्राइटिस (अमाशय की सूजन), पेट में अल्सर, IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) या बहुत सेंसेटिव पाचन होने जैसी कोई भी समस्या है, तो हरी मिर्च का सेवन सावधानी के साथ करें। वहीं जिन लोगों को पाइल्स या बवासीर है, उन्हें भी हरी मिर्च से परहेज करना चाहिए।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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