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द्वितीय विश्व युद्ध का हवाला देकर ईरान पर हमले की बात; खर्ग द्वीप पर क्या है अमेरिका का प्लान?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर अमेरिकी मरीन द्वारा कब्जा करने की ठोस कार्रवाई की मांग की है।

ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर अमेरिकी मरीन द्वारा कब्जा करने की ठोस कार्रवाई की मांग की है। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ग्राहम ने कहा कि हमने इवो जिमा पर विजय प्राप्त की थी, हम यह भी कर सकते हैं। मेरा भरोसा हमेशा मरीन पर है। ग्राहम ने आगे कहा कि खर्ग द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने से ईरानी शासन की रीढ़ टूट जाएगी और यह आतंकवादी शासन ‘सूखी लता की तरह मुरझा जाएगा’। उन्होंने दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट्स के द्वीप की ओर रवाना होने का भी जिक्र किया। ग्राहम का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की संभावनाएं चर्चा में हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट के तेल निर्यात मार्ग अभी भी विवाद का केंद्र बने हुए हैं।

80 साल पुरानी महंगी जीत

ग्राहम द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के इवो जिमा युद्ध का स्मरण कराए जाने पर विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि यह लड़ाई इतनी आसान नहीं थी जितनी लगाई जा रही है। 19 फरवरी 1945 को शुरू हुई यह 36 दिनों की भयंकर जंग थी। लगभग 80000 अमेरिकी मरीन सैनिकों ने जापान के मजबूत गढ़ पर हमला किया। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस छोटे से 8 वर्ग मील (लगभग 20 वर्ग किलोमीटर) द्वीप पर कब्जे के लिए 6821 अमेरिकी सैनिक शहीद हुए और 19000 से अधिक घायल हुए। जापान की ओर से करीब 18000 से 21000 सैनिक मारे गए, जिनमें से बहुत कम ने आत्मसमर्पण किया। माउंट सूरीबाची पर अमेरिकी झंडा फहराने वाली ऐतिहासिक तस्वीर जो रोसेन्थल ने कैद की, जिसके लिए उन्हें पुलित्जर पुरस्कार मिला, लेकिन इस जीत की कीमत हजारों जिंदगियों की थी।

ईरान का तेल हृदय है खर्ग द्वीप

बता दें कि खर्ग द्वीप भी इवो जिमा के लगभग बराबर आकार का है, लगभग 20 वर्ग किलोमीटर। यह द्वीप ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है, जहां पेट्रोलियम भंडारण, पाइपलाइनें और सैन्य ठिकाने स्थित हैं। अमेरिका ने हाल के दिनों में खर्ग पर सैन्य लक्ष्यों पर हमले किए हैं, लेकिन तेल अवसंरचना को जानबूझकर बचाया गया है। जानकारों का मानना है कि द्वीप पर सफल कब्जा ईरान की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दे सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तेहरान को मजबूर कर सकता है।

खतरे की चेतावनी

नाटो के पूर्व सुप्रीम कमांडर और अमेरिकी नौसेना के सेवानिवृत्त एडमिरल जेम्स स्टावरिडिस ने ब्लूमबर्ग में लिखा कि खर्ग पर कब्जा ‘कम फायदे के लिए बड़ा जोखिम’ हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि मरीन यूनिट के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करते समय ईरानी या उनके सहयोगी रूसी खुफिया जानकारी से खतरा होगा। स्टावरिडिस ने कहा कि द्वीप पर उतरने के बाद भी ड्रोन हमले, बारूदी सुरंगें, लगभग 20000 नागरिकों की मौजूदगी और संभावित जल-थलीय हमलों जैसे खतरे बने रहेंगे। हालांकि, खर्ग की मूंगा-आधारित संरचना इवो जिमा की ज्वालामुखी रेत जितनी चुनौतीपूर्ण नहीं है, लेकिन हताहतों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

ईरान युद्ध पर वियतनाम की छाया

ट्रंप प्रशासन को इस बात का सामना करना पड़ रहा है कि क्या यह युद्ध, जिसे राष्ट्रपति ने ‘तेज और निर्णायक’ बताया था, एक और लंबा संघर्ष बन रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वियतनाम युद्ध की तुलना की और ‘फाइव ओ’क्लॉक फॉलीज’ जैसी आशावादी ब्रीफिंग्स का जिक्र किया। इस बीच, ट्रंप के पूर्व आतंकवाद-विरोधी सलाहकार जो केंट ने इस्तीफा दे दिया है और आरोप लगाया कि इजरायल ने अमेरिका को इस युद्ध में धकेला है।

दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि खर्ग पर कोई भी अभियान सटीक नहीं होगा और ईरान को अराजकता फैलाने के कई रास्ते उपलब्ध रहेंगे। फिलहाल युद्ध की समाप्ति और शांति प्रक्रिया की दिशा में बातचीत जारी है, लेकिन सैन्य विकल्पों पर चर्चा तेज हो गई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN