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दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत पर छिड़ा ‘टॉयलेट वॉर; ईरान से जंग लड़ने आए US सैनिक आपस में ही भिड़े

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Source :- LIVE HINDUSTAN

करीब 13 अरब डॉलर की लागत से बने इस युद्धपोत में वैक्यूम-आधारित सीवेज सिस्टम लगाया गया था, जिसे पानी की बचत के लिए डिजाइन किया गया था लेकिन यह सिस्टम जहाज पर मौजूद 4,500 से अधिक कर्मियों के दबाव को संभालने में बार-बार फेल हो रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कभी भी जंग छिड़ सकती है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रखी है। एक तरफ ईरान ने इसके लिए तैयारी कर रखी है तो दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ने भी ईरान के करीब भारी सैन्य तैनाती कर रखी है। अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड को ईरान के करीब तैनात कर रखा है, जिस पर करीब 5000 जवान तैनात हैं, जो अब आपस में ही लड़ रहे हैं।

दरअसल, यह विमानवाहक पोत एक अजीब से समस्या से जूझ रहा है। जहाज पर लगे सीवेज सिस्टम में खराबी आ गई है और टॉयलेट जाम हो चुके हैं। इस वजह से इस युद्धपोत पर तैनात हजारों नाविकों को नित्य क्रिया के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। हालात ये है कि एक-एक सैनिक को टॉयलेट जाने के लिए 45 मिनट तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वैसे तो इस युद्धपोत पर 650 टॉयलेट हैं लेकिन अधिकांश जाम पड़े हैं। इस वजह से सैनिक रोज आपस में ही उलझ रहे हैं।

बार-बार हो रहे टॉयलेट जाम

करीब 13 अरब डॉलर की लागत से बने इस अत्याधुनिक युद्धपोत में वैक्यूम-आधारित सीवेज सिस्टम लगाया गया था, जिसे पानी की बचत के लिए डिजाइन किया गया था लेकिन यह सिस्टम जहाज पर मौजूद 4,500 से अधिक कर्मियों के दबाव को संभालने में बार-बार विफल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाइपों का आकार छोटा होने और कैल्शियम जमाव जैसी तकनीकी समस्याओं के कारण बार-बार जाम और खराबी की स्थिति बन रही है।

40 से अधिक बार मदद लेनी पड़ी

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2025 में केवल चार दिनों के भीतर 200 से अधिक बार टॉयलेट सिस्टम फेल हुआ था, जबकि इंजीनियरों को इसे ठीक करने के लिए 19-19 घंटे तक काम करना पड़ा। इसके अलावा, 2023 से अब तक बाहरी तकनीकी सहायता के लिए 40 से अधिक बार मदद लेनी पड़ी है।

लंबी तैनाती ने समस्या को और बढ़ा दिया

समंदर में इसकी लंबी तैनाती ने समस्या को और बढ़ा दिया है। आमतौर पर छह महीने की तैनाती के बजाय यह युद्धपोत आठ महीने से अधिक समय से समुद्र में है और यह अवधि और बढ़ सकती है। लगातार ऑपरेशन के कारण नियमित मेंटेनेंस प्रभावित हुआ है, जिससे सिस्टम की खराबी और बढ़ी है। यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड जून 2025 से समुद्र में तैनात है। जनवरी में इसी जहाज ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया गया था। अब ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इसे मध्य पूर्व में तैनात किया गया है।

युद्ध क्षमता या मिशन पर कोई असर नहीं पड़ा

हालांकि अमेरिकी नौसेना का कहना है कि इन तकनीकी समस्याओं का जहाज की युद्ध क्षमता या मिशन पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स में यह चिंता जताई गई है कि ऐसी समस्याएं लंबे समय तक रहने पर सैनिकों के मनोबल और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी है और दोनों देशों के बीच जिनेवा में वार्ता की तैयारी चल रही है। ऐसे संवेदनशील माहौल में दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक पर इस तरह की तकनीकी दिक्कतें रणनीतिक और मानवीय दोनों स्तरों पर सवाल खड़े कर रही हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN