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दवाओं पर 100%, स्टील-एल्यूमीनियम पर 50; ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने फोड़ा टैरिफ बम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इस बदलाव के पीछे का मुख्य कारण ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ को रोकना है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कई आयातक शुल्क कम करने के लिए कृत्रिम रूप से आयात मूल्य को कम दिखाते थे।

Iran War Updates: ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपनी “अमेरिका फर्स्ट” वाली आर्थिक नीति को और अधिक कड़ा करते हुए स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और विदेशी दवाओं पर नए आयात शुल्क नियमों की घोषणा की है। इन बदलावों का उद्देश्य न केवल आयात प्रक्रिया को सरल बनाना है, बल्कि विदेशी दवा कंपनियों और धातु निर्यातकों पर दबाव डालना है ताकि वे अपनी निर्माण यूनिट अमेरिका में स्थापित करें।

ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के आयात पर 50% का आयात शुल्क बरकरार रखा है। हालांकि, अब इसे गणना करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह शुल्क आयातित वस्तु के उस मूल्य पर लगेगा जो अमेरिकी ग्राहक भुगतान करते हैं, न कि केवल धातु की मात्रा पर।

ट्रंप ने क्यों लगाए नए टैरिफ?

इस बदलाव के पीछे का मुख्य कारण ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ को रोकना है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कई आयातक शुल्क कम करने के लिए कृत्रिम रूप से आयात मूल्य को कम दिखाते थे। नया नियम इस विसंगति को दूर करेगा।

यदि किसी उत्पाद में धातु का वजन 15% से कम है, तो उस पर से 50% का पिछला शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है। 15% से अधिक धातु सामग्री वाले भारी मशीनों, वाशिंग मशीन या गैस स्टोव जैसे उत्पादों पर अब धातु की मात्रा के बजाय पूरे उत्पाद के मूल्य पर 25% फ्लैट शुल्क लगेगा। विदेश में बने लेकिन पूरी तरह से अमेरिकी स्टील या तांबे से निर्मित उत्पादों पर रियायती दर से केवल 10% शुल्क लगेगा। बिजली ग्रिड और औद्योगिक उपकरणों के लिए टैरिफ को 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है, ताकि अमेरिका में बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाई जा सके।

विदेशी दवाओं पर 100% तक शुल्क

ट्रंप ने दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से एक बड़ा दांव खेला है। कुछ खास आयातित दवाओं पर अब 100% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। यह नया नियम उन पेटेंट दवाओं पर लागू होगा जो उन देशों में बनती हैं जिनका अमेरिका के साथ कोई टैरिफ समझौता नहीं है। बड़ी दवा कंपनियों के लिए ये नियम 120 दिनों में लागू होंगे, जबकि छोटे निर्माताओं को 180 दिनों की मोहलत दी गई है। यह कदम सीधे तौर पर उन कंपनियों को टारगेट करता है जिन्होंने अमेरिका के साथ ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ मूल्य निर्धारण समझौता नहीं किया है।

राजस्व में होगा इजाफा

वाइट हाउस का मानना है कि पहले का टैरिफ ढांचा अत्यंत जटिल था, जिससे आयातकों को हर पुर्जे में धातु की मात्रा निर्धारित करने में सिरदर्द होता था। प्रशासन के अधिकारी ने कहा, “अब यह आसान, सरल और सीधा है। कई उत्पादों के लिए दरें कम होंगी, कुछ के लिए थोड़ी बढ़ेंगी, लेकिन कुल मिलाकर यह उद्योग के लिए अनुकूल है।” प्रशासन को उम्मीद है कि इस नए ढांचे से सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी क्योंकि अब शुल्क पूरे बिक्री मूल्य पर वसूला जाएगा।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों से जूझ रहा है। रक्षा सचिव द्वारा हाल ही में किए गए सैन्य फेरबदल और अब इन कड़े व्यापारिक नियमों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन अपने दूसरे कार्यकाल में आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर एक आक्रामक और आत्मनिर्भर अमेरिका की छवि पेश करना चाहता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN