Source :- LIVE HINDUSTAN
इंटरव्यू में अल-काबी ने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और तेज हुआ तो दुनिया की इकोनॉमी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष बढ़ने की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातक देशों को कुछ ही दिनों में उत्पादन बंद करना पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने एक ऐसी चेतावनी दी है जिससे ग्लोबल मार्केट के निवेशकों में टेंशन आ गई है। इस बयान ने शुक्रवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में अचानक हलचल मचा दी। उनकी टिप्पणी के बाद भारतीय शेयर बाजार समेत दुनिया के कई बाजारों में तेज गिरावट देखी गई और तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई।
क्या कहा कतर के मंत्री ने?
ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अल-काबी ने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और तेज हुआ तो दुनिया की इकोनॉमी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष बढ़ने की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातक देशों को कुछ ही दिनों में उत्पादन बंद करना पड़ सकता है। ऐसा होने पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। अल-काबी के मुताबिक अगर युद्ध तुरंत समाप्त भी हो जाए तब भी ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य स्थिति में लौटने में लंबा वक्त लग सकता है। ये कई हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय हो सकता है। मतलब ये कि किसी भी परिस्थिति में संकट कम नहीं होता दिख रहा है।
भारतीय बाजार पर असर
इस चेतावनी का असर भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत देखने को मिला। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,097 अंक यानी 1.37 प्रतिशत टूटकर 78,918.90 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,203.72 अंक लुढ़ककर 78,812.18 अंक तक आ गया था। इसी तरह, एनएसई का मानक सूचकांक निफ्टी भी 315.45 अंक यानी 1.27 प्रतिशत के नुकसान के साथ 24,450.45 अंक पर बंद हुआ।
एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
इस बीच, भारत सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देने के लिए ‘एस्मा’ कानून के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। इसका मकसद पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाना है। भारत की एलपीजी खपत वित्त वर्ष 2024-25 में 3.13 करोड़ टन थी, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया गया था, जबकि बाकी का आयात किया गया था। भारत का 85-90 प्रतिशत आयात सऊदी अरब जैसे देशों से आता है जो आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं।
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच एक सप्ताह से जारी संघर्ष के कारण यह समुद्री मार्ग बंद हो गया है। भारत में तेलशोधन क्षमता पर्याप्त होने के बावजूद तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार ने रिफाइनरियों को इसका उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश में तेल रिफाइनरियों से कहा गया है कि वे उत्पादित एलपीजी को केवल तीन सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल (आईओसी), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को ही उपलब्ध कराएं।
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