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ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम से आने वाले दिनों में तेल, सोना और चांदी पर क्या होगा असर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ट्रंप के ईरान अल्टीमेटम ने एनर्जी मार्केट्स को हिलाकर रख दिया है। ऑस्ट्रेलिया-ट्रेडिंग डॉट कॉम के सीईओ पीटर मैकगायर का कहना है कि असली कहानी अगले चार से छह हफ्तों में तेल, सोने और चांदी पर क्या बीतती है, यह होगी।

ट्रंप के ईरान अल्टीमेटम ने एनर्जी मार्केट्स को हिलाकर रख दिया है, लेकिन असली कहानी अगले चार से छह हफ्तों में तेल, सोने और चांदी पर क्या बीतती है, यह होगी। ऑस्ट्रेलिया-ट्रेडिंग डॉट कॉम के सीईओ पीटर मैकगायर का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का मिडिल-ईस्ट के नेताओं के लिए संबोधन पूरी तरह से एक सेल्स पिच था, जिसमें अमेरिकी कच्चे तेल और एनर्जी एक्सपोर्ट पर फोकस किया गया और साथ में एक सख्त डेडलाइन भी दी गई। उन्होंने ईटी नाउ से बातचीत में ये बातें कही।

ट्रंप के बयान से बाजार में बेचैनी

मैकगायर बताते हैं कि बाजार ने इस डेडलाइन को अपने तरीके से समझा है और इससे बेचैनी बढ़ी है। ट्रंप के भाषण के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। मैकगायर के शब्दों में, “चीजें बेहद तेजी से बढ़ सकती हैं। यह फिलहाल एक ऐसी प्रक्रिया है, जो लगातार अपडेट हो रही है।”

तेल की कीमतों के लिए दो संभावित आउटलुक

पहला आउटलुक: अगर तनाव अप्रैल के अंत तक बढ़ता रहता है और अस्थिरता और गहरी हो जाती है, तो मैकगायर कच्चे तेल की कीमत 130 से 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना देखते हैं। यह वह लेवल है, जो रूस-यूक्रेन संकट के दौरान सप्लाई के झटके के चरम पर देखा गया था। हालांकि, कीमतों में तेजी का अंदाजा इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार में धारणा कैसी है और सप्लाई में रुकावटें कितनी जल्दी सामने आती हैं।

दूसरा आउटलुक: अगर यह गतिरोध अगले एक-दो हफ्तों में सीमित रहे और नियंत्रण में आ जाए, तो कच्चा तेल 85 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है। यह स्तर भी हाल के स्टैंडर्ड के हिसाब से ऊंचा ही होगा, लेकिन यह उस तरह की मांग में कमी और महंगाई से बचाएगा जो तेल के 100 डॉलर से ऊपर जाने पर एशिया की आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर आ सकती है।

सोने-चांदी में हैरान करने वाली हरकत

तेल के उछाल के बीच सबसे चौंकाने वाली चाल कीमती धातुओं में देखने को मिली है। सोना, जो 5400 डॉलर के करीब पहुंच गया था, अचानक तेजी से लुढ़क गया। चांदी भी करीब 121 डॉलर तक दौड़ी, लेकिन उसके बाद मैकगायर के शब्दों में कहें तो “जोरदार सफाई” हुई। इंटरव्यू के समय सोना 4720 डॉलर और चांदी करीब 73 डॉलर प्रति फ्यूचर्स पर मंडरा रही थी।

सोने-चांदी की उल्टी चाल

यह गिरावट कई एनॉलिस्ट्स को हैरान कर रही है, क्योंकि जियो पॉलिटिकल टेंशन के समय आमतौर पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है। मैकगायर कई वजहें बताते हैं। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.36 फीसद के करीब पहुंच गई, जिससे निवेशकों का पैसा निश्चित आय वाली संपत्तियों की ओर खिंच गया। साथ ही, कच्चे तेल और गैस फ्यूचर्स में बड़े दांव लगाने वाले कारोबारियों ने अपना ध्यान और पूंजी इन तेजी वाले पोजीशनों में लगा दी।

शेयर बाजारों की कमजोरी ने भी दबाव डाला, क्योंकि मार्जिन कॉल का सामना कर रहे कई निवेशकों को दूसरी जगहों पर नुकसान भरने के लिए अपनी धातुओं की स्थिति को बेचना पड़ा। इसके अलावा मजबूत डॉलर ने भी कीमती धातुओं पर भार डाला।

क्या बढ़ सकते हैं सोने-चांदी के दाम?

मैकगायर का मानना है कि अप्रैल से मई के बीच जब एनर्जी और शेयरों के शुरुआती उत्साह का असर कम होगा और सुरक्षित निवेश की मांग फिर से उभरेगी, तब सोना और चांदी फिर से अपने पैर जमा सकते हैं और तेजी दिखा सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है संदेश

इस माहौल में निवेशकों के लिए मैकगायर का संदेश साफ है। यह कोई मजबूत विश्वास वाली सलाह नहीं है। ईरान मामला अभी बदलता रहेगा, ट्रंप प्रशासन की डेडलाइन तो सख्त है लेकिन उसकी कार्रवाई का अंदाजा लगाना मुश्किल है और कमोडिटी मार्केट हर छोटी घटना पर तुरंत रिएक्शन दे रहे हैं।

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। कमोडिटी मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN