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ट्रंप ईरान पर पका रहे कौन सी खिचड़ी, जेडी वेंस के पाकिस्तान जाने पर इतना सस्पेंस क्यों?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता होगी या नहीं, इस सवाल का स्पष्ट जवाब अभी किसी के पास नहीं है। विभिन्न अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और अधिकारियों के बयानों से भारी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता होगी या नहीं, इस सवाल का स्पष्ट जवाब अभी किसी के पास नहीं है। विभिन्न अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और अधिकारियों के बयानों से भारी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि युद्धविराम समाप्त होने से पहले वे पाकिस्तान में वार्ता के लिए एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे। ट्रंप ने संकेत दिया था कि सोमवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में टीम इस्लामाबाद पहुंचेगी और ईरान के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करेगी।

हालांकि, रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अभी भी अमेरिका में ही हैं और पाकिस्तान के लिए रवाना नहीं हुए हैं। ईरान के साथ वार्ता के दूसरे दौर की संभावनाएं अभी अनिश्चित बनी हुई हैं। एसोसिएट प्रेस (AP) ने भी यही खबर दी कि वेंस वाशिंगटन में मौजूद हैं और उनके इस्लामाबाद जाने पर सस्पेंस बरकरार है। दूसरी ओर, सीएनएन ने सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट दी कि जेडी वेंस मंगलवार को वॉशिंगटन से रवाना हो सकते हैं। वे पाकिस्तान पहुंचकर ईरान के साथ शांति वार्ता के नए दौर में शामिल होंगे। वाइट हाउस ने सीएनएन को बताया कि यात्रा के समय को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल जल्द रवाना होने की उम्मीद है।

इन विरोधाभासी रिपोर्टों के बीच सवाल उठ रहा है कि ट्रंप प्रशासन की रणनीति क्या है? क्या जानबूझकर सस्पेंस बनाया जा रहा है या वार्ता की आड़ में कुछ और तैयारी चल रही है? दरअसल, इन रिपोर्ट्स से कुछ घंटे पहले वाइट हाउस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ने एक्स पर सख्त संदेश पोस्ट किए गए थे। इसमें ईरान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा गया, ‘LOCKED IN MODE: ACTIVATED’ और ‘It’s Monday. No excuses. Just wins’। पोस्ट में संकेत दिया गया कि कोई बहाना नहीं चलेगा और अमेरिका जीत हासिल करके ही दम लेगा।

दूसरी ओर ईरानी पक्ष की ओर से भी सतर्क और सख्त प्रतिक्रियाएं आई हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान शांति वार्ता में शामिल होने पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखे हुए है, लेकिन तनाव बढ़ने की आशंका के बीच जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि ईरानी बल किसी के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने जोर दिया कि प्रतिबद्धताओं का सम्मान सार्थक संवाद का आधार है। ईरान को अमेरिकी सरकार के आचरण पर गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है और अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी संकेत आत्मसमर्पण की मांग जैसे लग रहे हैं।

वहीं, रूस के समाचार पत्र ‘वेदोमोस्ती’ से बात करते हुए रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान हर मोर्चे पर विफल रहा। उन्होंने अमेरिका-इजरायल के सैन्य विजय और सत्ता परिवर्तन के दावों को खारिज कर दिया। अल जजीरा से बात करते हुए जलाली ने तंज कसते हुए कहा कि शुरू में अमेरिका-इजरायल कुछ दिनों में ईरान पर कब्जा करने और सत्ता बदलने की बात कर रहे थे, लेकिन अब उनके लक्ष्य सिमटकर हॉर्मुज को सुरक्षित करने तक रह गए हैं। फिर भी ये लक्ष्य पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा कि ट्रंप युद्ध में जो हासिल नहीं कर सके, बातचीत के जरिए भी नहीं पा सकेंगे।

ईरान ने चेतावनी दी कि अमेरिका को युद्ध के मैदान में मिली नाकामी के बाद बातचीत की मेज पर सफलता की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। राजदूत जलाली ने कहा कि इस संघर्ष ने ईरान को कमजोर करने के बजाय उसके संकल्प को और मजबूत किया है। ईरान दबाव में कोई एकतरफा समझौता स्वीकार नहीं करेगा।

गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह का संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इससे पहले इस्लामाबाद में हुई पहली दौर की बातचीत बिना किसी ठोस प्रगति के खत्म हो गई थी, जिसमें हॉर्मुज पर नियंत्रण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गतिरोध बना रहा। संघर्ष विराम की समयसीमा समाप्त होने के साथ राजनयिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका का मानना है कि ‘उचित और तर्कसंगत’ समझौता अभी भी संभव है, जबकि ईरान बैकफुट पर जाने को तैयार नहीं है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN