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टैरिफ से वसूले गए 133 अरब डॉलर, क्या अब वापस मिलेंगे? अमेरिकी SC के फैसले के बाद बड़ा सवाल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जानकारों के मुताबिक, फिलहाल तो रिफंड प्रक्रिया काफी जटिल होने की उम्मीद है। अमेरिकी सीमा शुल्क और बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी को दावों को संभालना होगा, जो इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट और निचली अदालतों से जुड़ा रहेगा। 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। यह फैसला 6-3 के बहुमत से 20 फरवरी को आया, जिसमें कोर्ट ने माना कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आयात पर कर लगाने का अधिकार नहीं है। यह शक्ति केवल कांग्रेस के पास है। ट्रंप ने जनवरी में वापस व्हाइट हाउस लौटने के बाद इन टैरिफ की घोषणा की थी और अगस्त में इन्हें लागू किया गया था। ये टैरिफ लगभग हर देश पर लगाए गए थे, जिससे वैश्विक व्यापार व्यवस्था प्रभावित हुई। ट्रंप ने इसे अपनी दूसरी पारी की प्रमुख आर्थिक नीति का हिस्सा बताया था, लेकिन अब यह पहली बड़ी नीति है जो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बाद रद्द हो गई। ट्रंप ने फैसले की निंदा की और कहा कि यह मामला अगले कई वर्षों तक अदालतों में चलेगा।

अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी के अनुसार, दिसंबर मध्य तक इन टैरिफ से 133 अरब डॉलर से अधिक राशि एकत्र की जा चुकी है। कुछ अनुमानों में फरवरी 2026 तक यह राशि 160 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुकी है। ये टैरिफ अब अवैध घोषित होने के कारण रिफंड का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कोर्ट ने अपने फैसले में रिफंड के मुद्दे पर कोई साफ निर्देश नहीं दिया, जिससे स्थिति जटिल हो गई है। न्यायाधीश ब्रेट कवानॉ ने असहमति में कहा कि रिफंड प्रक्रिया एक बड़ा गड़बड़झाला साबित होगी। कंपनियां जैसे कोस्टको, रेवलॉन आदि पहले से ही मुकदमे दायर कर चुकी हैं और रिफंड की मांग कर रही हैं। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि आयातकों को आखिरकार पैसा वापस मिल सकता है, लेकिन इसमें 12 से 18 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।

कितनी जटिल है रिफंड की प्रक्रिया

रिफंड प्रक्रिया काफी जटिल होने की उम्मीद है। अमेरिकी सीमा शुल्क और बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी को दावों को संभालना होगा, जो इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट और निचली अदालतों से जुड़ा रहेगा। हजारों आयातक शामिल हैं, इसलिए प्रशासनिक चुनौतियां बहुत बड़ी होंगी। उपभोक्ताओं को सीधे रिफंड मिलने की संभावना कम है, क्योंकि कंपनियां बढ़ी हुई कीमतों को ग्राहकों पर डाल चुकी हैं और इसे ट्रैक करना मुश्किल है। इलिनोइस के गवर्नर जेबी प्रिट्जकर ने राज्य के परिवारों के लिए करीब 87 अरब डॉलर (प्रति घर 1700 डॉलर) की मांग की है। इसी तरह नेवादा से भी 21 अरब डॉलर की मांग की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार रिफंड को जितना संभव हो उतना कठिन बना सकती है, लेकिन अवैध रूप से एकत्र धन रखना गैरकानूनी होगा।

ट्रंप की व्यापार नीति को बड़ा झटका

यह फैसला ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति को बड़ा झटका है और मुद्रास्फीति कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि टैरिफ हटने से कीमतें घट सकती हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में अन्य टैरिफ बने रहेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे IEEPA के बजाय अन्य तरीकों से टैरिफ लागू करेंगे। कुल मिलाकर, 133 अरब डॉलर से अधिक की राशि का भविष्य अनिश्चित है और आने वाले वर्षों में कई मुकदमे चल सकते हैं। यह मामला अमेरिका में कार्यकारी शक्तियों और कांग्रेस के बीच व्यापार अधिकारों की बहस को फिर से उजागर करता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN