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टी-20 वर्ल्ड कप: इंग्लैंड से सेमीफ़ाइनल मैच में ये ग़लतियां भारत को पड़ सकती हैं भारी

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Source :- BBC INDIA

भारतीय टीम

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टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में आज भारत की टक्कर इंग्लैंड के साथ है.

न्यूजीलैंड की टीम बुधवार को पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर फाइनल में पहुंच चुकी है.

फ़िन एलन ने सिर्फ़ 33 गेंदों पर सेंचुरी बनाकर दक्षिण अफ़्रीका को टूर्नामेंट से आउट कर दिया.

ये टी-20 वर्ल्ड कप की सबसे तेज़ सेंचुरी रही.

दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम का मुकाबला 8 मार्च को टूर्नामेंट के फाइनल में न्यूजीलैंड से होगा.

भारतीय टीम टी-20 वर्ल्ड कप की मौजूदा चैंपियन हैं. टूर्नामेंट की शुरुआत में भी भारत को फेवरेट के तौर पर रेट किया जा रहा था.

लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचते-पहुंचते टीम की कई ऐसी कमियां सामने आई हैं जिनके कारण टीम इंडिया के लिए फाइनल में पहुंचने का सफर मुश्किल हो सकता है.

हालांकि, सेमीफाइनल से पहले टीम इंडिया की ओर से उन कमियों से सबक लेने की ओर इशारा भी किया गया है.

नई बॉल से जोफ्रा आर्चर की चुनौती

जोफ्रा आर्चर

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टूर्नामेंट में बेशक भारतीय क्रिकेट टीम ने सेमीफाइनल तक पहुंचते हुए एक ही मैच गंवाया है लेकिन भारत के टॉप ऑर्डर का फ्लॉप होना टीम के लिए लगातार चिंता का सबब बना हुआ है.

दक्षिण अफ्रीका से मुकाबले में भारत की हार की एक बड़ी वजह पावरप्ले में ही तीन बल्लेबाजों का आउट होना रही. वहीं अमेरिका के खिलाफ तो भारत ने पावरप्ले में ही चार विकेट गंवा दिए थे.

हालांकि कप्तान सूर्यकुमार यादव की नाबाद 84 रन की पारी ने भारत को टूर्नामेंट के पहले ही मैच में उलटफेर से बचा दिया था. लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मैच में शायद भारत को ऐसी गलती से उबरने का मौका नहीं मिले, क्योंकि इंग्लैंड के तेज गेंदबाजी अटैक की कमान जोफ्रा आर्चर के हाथों में है.

पहले दो मैचों में 90 रन खर्च करने के बाद आर्चर ने टूर्नामेंट में अच्छी वापसी की है. आर्चर ने इस वर्ल्ड कप में पावरप्ले के दौरान 114 बॉल डाली हैं और उन्हें से 66 डॉट रही हैं.

वो इस टूर्नामेंट में पावरप्ले के दौरान सबसे ज्यादा डॉट फेंकने वाले गेंदबाज हैं.

आर्चर का संजू सैमसन के खिलाफ रिकॉर्ड भी शानदार है.

उन्होंने संजू सैमसन को पांच में से तीन टी-20 मैचों में आउट किया है.

संजू सैमसन आर्चर के खिलाफ 26 गेंद पर 23 रन ही बना पाए हैं और इस दौरान वो तीन बार अपना विकेट गंवा चुके हैं.

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसिस मानते हैं कि इंग्लैंड को संजू सैमसन की कमजोरी का पता है.

उन्होंने कहा, “संजू सैमसन इंग्लैंड की शॉर्ट बॉलिंग के खिलाफ अच्छा खेल सकते हैं. लेकिन आर्चर की स्पीड 140 से ज्यादा है, जहां शॉर्ट के खिलाफ खेलना मुश्किल हो जाता है. इंग्लैंड को ये बात बेहतर मालूम है.”

बल्लेबाजों का एक साथ परफॉर्म नहीं कर पाना

अभिषेक शर्मा

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जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच को छोड़ दिया जाए तो हर मैच में भारत की सबसे बड़ी समस्या उसके बल्लेबाजों का परफॉर्म नहीं कर पाना ही रही है.

अमेरिका के खिलाफ कप्तान सूर्यकुमार ने अकेले दम पर टीम इंडिया को जीत दिलाई. वहीं ईशान किशन नामीबिया और पाकिस्तान से मुकाबले में एक्स फैक्टर साबित हुए.

शिवम दुबे ने दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड्स से मैच में अच्छी बल्लेबाजी की. वहीं संजू सैमसन ने वेस्टइंडीज से मैच में 97 रन की नाबाद पारी खेलकर भारत को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया.

लेकिन भारत की भारी भरकम बैटिंग लाइनअप अभी तक इस टूर्नामेंट में एक यूनिट की तरह परफॉर्म करते हुए नजर नहीं आई है.

भारत के लिए बैटिंग में सबसे बड़ी समस्या अभिषेक शर्मा का नहीं चल पाना है. टूर्नामेंट में अभी तक उन्होंने 6 पारियों में 13.33 के औसत से 80 रन ही बनाए हैं जिनमें शुरुआती तीन पारियों में जीरो पर आउट होना भी शामिल है.

उन्होंने इस वर्ल्ड कप में एक ही फिफ्टी लगाई है और वो भी उनके बल्ले से जिम्बाब्वे के खिलाफ ही निकली थी. कप्तान सूर्यकुमार यादव के पहले मैच में 84 रन की पारी को हटा दिया जाए तो वो भी टी-20 वर्ल्ड कप में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं.

सेमीफाइनल में पहुंचने के बावजूद टूर्नामेंट में अभी तक पांच सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में भारत का एक भी खिलाड़ी शामिल नहीं है. कप्तान सूर्यकुमार 231 रन के साथ इस लिस्ट में 7वें पायदान पर हैं.

बीते दो मैचों में वरुण चक्रवर्ती का नहीं चलना

वरुण चक्रवर्ती

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भारतीय पिचों के स्पिनर्स के लिए मददगार होने की वजह से वरुण चक्रवर्ती टूर्नामेंट में भारत के लिए कहीं ना कहीं ‘ट्रंप कार्ड’ हैं.

वो 12 विकेट के साथ टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं. लेकिन टीम बैलेंस की वजह से कुलदीप यादव को एक ही मुकाबले में प्लेइंग 11 का हिस्सा बनाया गया. इसलिए भारत की निर्भरता वरुण चक्रवर्ती पर काफी ज्यादा है.

दक्षिण अफ्रीका से मैच में वरुण चक्रवर्ती ने चार ओवर में 47 और वेस्टइंडीज से मैच में 40 रन खर्च किए.

भारत के पूर्व कोच और स्पिन गेंदबाज अनिल कुंबले मानते हैं कि बल्लेबाजों को कहीं ना कहीं वरुण चक्रवर्ती की रणनीति समझ में आने लगी है.

ईएसपीएन क्रिकइंफो के एक शो में वरुण चक्रवर्ती की गेंदबाजी पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “वरुण चक्रवर्ती के खिलाफ बल्लेबाजी करना आसान नहीं है. लेकिन ये अब समझ आने लगा है कि वरुण चक्रवर्ती राइट हैंडर्स के खिलाफ किस तरह से गेंद को बाहर की तरफ रखते हैं.”

भारत के दूसरे स्पिनर और उपकप्तान अक्षर पटेल को टूर्नामेंट के दो मैचों से बाहर रखने पर पहले ही सवाल उठ चुके हैं. लेकिन जिन पांच मुकाबलों में अक्षर खेले हैं वहां वो विकेट चटकाने में ज्यादा कामयाब नहीं हो पा रहे हैं.

अक्षर को ग्रुप स्टेज में खेले गए तीन मुकाबलों में 6 विकेट मिले. पर सुपर-8 के दो मैचों में उन्हें एक विकेट ही मिला है. सुपर-8 के दो मैचों में वो 8 ओवर्स में 70 रन खर्च कर चुके हैं.

खराब फील्डिंग और टॉस

टीम इंडिया

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टूर्नामेंट में अभी तक भारतीय क्रिकेट टीम ने 33 कैच पकड़े हैं, पर 13 कैच छोड़े भी हैं. वेस्टइंडीज से हुए पिछले मैच में तो अकेले अभिषेक शर्मा ने दो कैच छोड़े.

टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने 71.7 फीसदी कैच सफलतापूर्वक पकड़े हैं.

टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने कहा है कि टीम इस मामले पर काम कर रही है. उन्होंने मैच से एक दिन पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ऐसा नहीं है कि हम ट्रेनिंग नहीं कर रहे हैं. फील्डिंग पर हमारा पूरा फोकस है. टूर्नामेंट से पहले भी हमन फील्डिंग को अहम माना और उसे लेकर खास तैयारी की.”

“अगर हम फील्डर्स को सही समय पर सही जगह पर रखने में कामयाब रहते हैं तो कैच पकड़ने के मामले में हम सुधार करते हुए नजर आ सकते हैं.”

इसके अलावा टॉस भी ऐसा फैक्टर है जो इस टूर्नामेंट में निर्णायक साबित हो रहा है. क्योंकि पूरे टूर्नामेंट के दौरान ड्यू की वजह से बाद में गेंदबाजी करने वाली टीम को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

पहले सेमीफाइनल में भी ड्यू का असर साफ तौर पर देखने को मिला. जहां दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज पहले बैटिंग आने पर रन बनाते हुए संघर्ष करते हुए दिखे, वहीं न्यूजीलैंड के ओपनर्स को रन बनाने में कोई समस्या नहीं हुई.

वानखेड़े स्टेडियम में भी ड्यू के बड़ा फैक्टर होने की संभावना है. रिपोर्ट के मुताबिक रात के वक्त वानखेड़े स्टेडियम में ह्यूमिडिटी का लेवल 82 फीसदी तक पहुंच सकता है. जिसकी वजह से स्पिनर्स के लिए गेंद पर ग्रिप बनाना मुश्किल हो सकता है. तेज गेंदबाजों को इस वजह से यॉर्कर डालने में परेशानी होती है.

मोर्ने मोर्कल ने कहा, “ड्यू हमेशा ही चिंता की बात होती है. लेकिन टॉस को कंट्रोल करना आपके हाथ में नहीं है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS