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जेरोधा ने दिया ट्रेडर्स को झटका, 1 अप्रैल से ट्रेडिंग पर लगेगा दोगुना ब्रोकरेज चार्ज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जेरोधा (Zerodha) ने इंट्राडे डेरिवेटिव ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से कुछ इंट्राडे फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेड्स पर ब्रोकरेज शुल्क ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति ऑर्डर कर दिया जाएगा।

भारत के प्रमुख स्टॉक ब्रोकर जेरोधा (Zerodha) ने इंट्राडे डेरिवेटिव ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से कुछ इंट्राडे फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेड्स पर ब्रोकरेज शुल्क ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति ऑर्डर कर दिया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब डेरिवेटिव मार्केट पहले से ही दबाव में है और ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट देखी जा रही है।

किन ट्रेडर्स पर लागू होगा नया चार्ज

जेरोधा के अनुसार, यह बढ़ा हुआ शुल्क उन ट्रेडर्स पर लागू होगा जो SEBI के उस नियम का पालन नहीं करते, जिसमें ट्रेडिंग के लिए कुल मार्जिन का कम से कम 50% कैश या उसके बराबर रखना अनिवार्य है। अब तक कंपनी ऐसे मामलों में अपने फंड से यह कमी पूरी कर देती थी और ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेती थी, लेकिन अब इस सुविधा पर लागत वसूल की जाएगी।

इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग पर इसका कोई असर नहीं

इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत, अगर कोई ट्रेडर इंट्राडे F&O ट्रेड के लिए पर्याप्त कैश मार्जिन नहीं रखता और ब्रोकर के फंड का इस्तेमाल करता है, तो उस पर ₹40 प्रति ऑर्डर ब्रोकरेज लिया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल डेरिवेटिव सेगमेंट तक सीमित रहेगा और इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या कहते हैं सेबी के नियम

SEBI के नियमों के मुताबिक, चाहे ट्रेड इंट्राडे हो या ओवरनाइट, कुल मार्जिन का कम से कम आधा हिस्सा कैश या कैश इक्विवेलेंट में होना जरूरी है। कैश इक्विवेलेंट में नकद राशि, बैंक गारंटी, फिक्स्ड डिपॉजिट और मान्यता प्राप्त सिक्योरिटीज शामिल होती हैं। इस नियम का उद्देश्य बाजार में जोखिम को कम करना और अत्यधिक लीवरेज पर नियंत्रण रखना है।

इस फैसले के पीछे एक बड़ा कारण सरकार द्वारा प्रस्तावित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी भी है। 2026 के बजट में सरकार ने फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.10% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव रखा है। इससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी और बाजार में वॉल्यूम पर दबाव बना रहेगा।

तो क्या अन्य ब्रोकर्स भी बढ़ाएंगे चार्ज

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Zerodha का यह कदम पूरे ब्रोकरेज इंडस्ट्री में एक नई दिशा तय कर सकता है। जब इंडस्ट्री का एक बड़ा खिलाड़ी फीस बढ़ाता है, तो इससे अन्य कंपनियों के लिए भी ऐसा करने का रास्ता खुल सकता है और आने वाले समय में ब्रोकरेज चार्जेज में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।

सीईओ नितिन कामथ क्या बोले

Zerodha के सीईओ नितिन कामथ ने भी इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों द्वारा रखे गए कोलेटरल में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और कंपनी को जल्द ही ग्राहकों के लिए मार्जिन उपलब्ध कराने के लिए फंड उधार लेना पड़ सकता है, जिसकी एक लागत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी चाहती तो डेबिट बैलेंस पर ब्याज के रूप में शुल्क ले सकती थी, लेकिन इससे निवेशकों पर ज्यादा बोझ पड़ता। इसलिए कंपनी ने केवल उन्हीं ट्रेड्स पर अतिरिक्त ब्रोकरेज लगाने का फैसला किया है, जहां कैश मार्जिन की कमी है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN