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जब अफ़ग़ानिस्तान से पाकिस्तान पर स्कड मिसाइलों की हुई थी बारिश

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Source :- BBC INDIA

जलालाबाद पर विद्रोही हमले के दौरान मुजाहिदीन, गोला-बारूद के गोले लिए हुए.

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सात अप्रैल 1989 की सुबह जिस सोवियत स्कड मिसाइल ने पाकिस्तानी सरहदी इलाक़े तोरख़म में डाकख़ाना तबाह किया, वो काबुल से दाग़ी गई थी.

पाकिस्तान ने इस हमले को अफ़ग़ानिस्तान सरकार के एक स्पष्ट उकसावे वाली कार्रवाई बताया. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान ने इसे “दुर्घटना” बताया और इस बारे में माफ़ी मांगने से इनकार कर दिया.

उस वक़्त तक साल 1979 में ‘मुजाहिदीन’ कहलाने वाले जंगजूओं के ख़िलाफ़ अफ़ग़ान हुकूमत की मदद को आई सोवियत फ़ौज का आख़िरी दस्ता अपने वतन वापस जा चुका था.

लेकिन सोवियत संघ, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और अमेरिका के बीच अप्रैल 1988 के जिनेवा समझौते (जिसके तहत सैनिकों की वापसी शुरू हुई थी) का उल्लंघन जारी रहा.

यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल (यूपीआई) के जेराल्ड नैडलर की 2 नवंबर, 1988 की रिपोर्ट के अनुसार, सोवियत संघ ने घोषणा की कि वह अफ़ग़ानिस्तान को अपने सबसे उन्नत हथियार, जिनमें मध्यम दूरी की मिसाइलें भी शामिल हैं, दे रहा है.

घोषणा के मुताबिक़ ये “उन विद्रोही हमलों का मुक़ाबला करने के लिए किया गया है जिन्हें राष्ट्रपति नजीबुल्लाह की काबुल सरकार ने ‘पाकिस्तान समर्थित’ बताया है.”

नैडलर ने लिखा, “अमेरिका ने इन हथियारों को तरल ईंधन से चलने वाली सतह से सतह पर मार करने वाली स्कड मिसाइलों के रूप में पहचाना, जो पाकिस्तान तक पहुंचने में सक्षम थे. साथ ही पाकिस्तान के लिए अपने निरंतर ‘पूर्ण समर्थन’ की स्पष्ट रूप से घोषणा भी की.”

जनवरी 1989 को पूर्वी नांगरहार में अफगान मुजाहिदीन सरकारी सैनिकों पर रॉकेट हमले की तैयारी करते हुए. (फ़ाइल तस्वीर)

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जब पहली बार स्कड मिसाइल दाग़ी गई

अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े समझौतों को लागू करने और उल्लंघनों की जांच करने के लिए मई 1988 में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के लिए एक संयुक्त राष्ट्र मिशन की स्थापना की गई थी.

यह मिशन मार्च 1990 तक सक्रिय रहा. ‘द ऑक्सफोर्ड हैंडबुक ऑफ़ यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग ऑपरेशंस’ के अनुसार, मिशन की शुरुआत से ही अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान एक-दूसरे के हस्तक्षेप की शिकायत करते रहे.

हैंडबुक में लिखा है, “अफ़ग़ानिस्तान ने 1989 की शुरुआत से सीमा पार मुजाहिदीनों की आवाजाही और उनके सैन्य अभियानों की शिकायत की. पाकिस्तान ने हवाई क्षेत्र के उल्लंघन, अफ़ग़ान ख़ुफ़िया एजेंसी के हमलों और पाकिस्तानी क्षेत्र पर मिसाइल हमलों के बारे में शिकायत की.”

लेकिन मिशन के अनुसार, उसके पास न तो राजनीतिक समर्थन था और न ही संसाधन. इसलिए, वह केवल “संघर्ष में शामिल पक्षों की शिकायतों को बिना जांच किए लिख सकता था और उन्हें समझौतों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता था.”

युद्ध के बाद से लाखों अफ़ग़ान नागरिक पाकिस्तान और ईरान में शरणार्थी बन गए. सोवियत संघ की वापसी के बाद, यह उम्मीद की जा रही थी कि राष्ट्रपति नजीबुल्लाह की सरकार गिर जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

माइकल क्लाउडफे़ल्टर ने अपनी पुस्तक ‘वॉरफेयर एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट्स’ में लिखा है कि सोवियत संघ की वापसी के तुरंत बाद नजीबुल्लाह की सरकार के गिरने की उम्मीद की जा रही थी.

उन्होंने लिखा, “1986 में, सोवियत ख़ुफ़िया विभाग ने अनुमान लगाया था कि नजीब सरकार केवल 6 से 18 महीने तक ही टिकेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.”

माइकल क्लाउडफेल्टर के अनुसार, “मार्च 1989 में जलालाबाद की सबसे बड़ी और सबसे ख़ूनी लड़ाई शुरू हुई, लेकिन छह सप्ताह की लड़ाई के बाद, मुजाहिदीन अफ़ग़ान सेना से हार गए.”

यूपीआई के मोहम्मद ज़ियाउद्दीन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफ़ग़ान ‘मुजाहिदीन’ नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार ढाका में थे और बांग्लादेश से अपनी अंतरिम सरकार को मान्यता दिलाने की उम्मीद कर रहे थे.

तभी अप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तान पर स्कड मिसाइल से हमला हुआ.

नजीबुल्लाह की सरकार गिरने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में मुजाहिदीन और उज़्बेक मिलिशिया के बीच जंग छिड़ गई, उस दौरान काबुल के बाहर, संभवतः सोवियत निर्मित स्कड मिसाइल के साथ पोज देते हुए एक मुजाहिदीन.

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इससे पहले, 16 नवंबर, 1988 की यूपीआई रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि अफ़ग़ानिस्तान से दागी गई एक मिसाइल पाकिस्तान के सीमावर्ती गांव में गिरी, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए और 15 घायल हो गए.

लेकिन उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि ये मिसाइल सोवियत संघ ने अफ़ग़ान सेना को दो थी.

उस समय अमेरिकी अख़बार द न्यूयॉर्क टाइम्स के विशेष संवाददाता जॉन एफ. बर्न्स ने लिखा था, “पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि सात अप्रैल, 1989 को जलालाबाद और पेशावर के बीच की सड़क के पास एक मध्यम दूरी की स्कड मिसाइल पाकिस्तानी क्षेत्र में गिरी थी. इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी.”

अफ़ग़ान सरकार ने कहा कि ‘मिसाइल ग़लती से सीमा पार पाकिस्तान में दागी गई.’

सोवियत अधिकारियों ने जलालाबाद की हिफ़ाज़त में सरकारी बलों की सफलता का श्रेय स्कड मिसाइलों को दिया.

उन्होंने कहा कि मिसाइलों की मदद से जलालाबाद हवाई अड्डे के बाहरी घेरे के ठीक अंदर मोर्चा संभाले हुए छापामार लड़ाकों को पीछे धकेलने में सफलता मिली. उन्होंने यह भी बताया कि मिसाइलों का इस्तेमाल शहर से 15 मील दक्षिण-पूर्व में स्थित समर खेल के सरकारी सैन्य छावनी से भी गुरिल्लाओं को खदेड़ने में किया गया.

अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत सेना की वापसी 15 मई, 1988 को शुरू हुई और  15 फरवरी, 1989 को ख़त्म हुई.

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कब-कब पाकिस्तान पर हुए स्कड मिसाइल हमले

4 मई, 1989 को सुबह 8:20 बजे, बन्नू ज़िले में एक अफ़ग़ान शरणार्थी शिविर के पास एक स्कड मिसाइल गिरी, जिसमें तीन अफ़ग़ान नागरिक मारे गए और 17 घायल हो गए.

22 मई, 1989 को पाकिस्तान पंजाब के भाकर ज़िले के पास एक स्कड मिसाइल गिरी. ब्रिटिश समाचार पत्र द इंडिपेंडेंट के अनुसार, यह तीसरा हमला था जिसने पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच गंभीर तनाव पैदा कर दिया. इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर शांति प्रयासों को बाधित करने का आरोप लगाया.

23, 24 और 26 जून को, दिन के अलग-अलग समय पर, अफ़ग़ानिस्तान से दागे गए बम पाकिस्तान में गिरे, लेकिन किसी के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं आई.

15 अगस्त को सुबह 8:45 बजे कुर्रम एजेंसी में एक स्कड मिसाइल गिरी, 1 अक्तूबर, 1989 को रात 8:15 बजे उत्तरी वज़ीरिस्तान एजेंसी के आदमखेल के पास और 27 अक्तूबर को कुर्रम एजेंसी के टेडी मंगल क्षेत्र में भी मिसाइलें गिरीं.

क्लाउडफेल्टर के अनुसार, मुजाहिदीन की काबुल पर क़ब्ज़ा करने की अंतिम योजना दिसंबर 1989 में शुरू हुई थी, लेकिन यह भी विफल रही, क्योंकि सरकारी बलों ने हमले को नाकाम कर दिया था.

इसके बाद मुजाहिदीन बिखर गए. अलग-अलग गुट अपने-अपने क्षेत्रों में लौट गए. काबुल में राशन की कमी और ग़रीबी बढ़ गई.

1990 आते-आते अफ़ग़ानिस्तान एक बर्बाद देश बन चुका था.

10 जनवरी को दोपहर 1:40 बजे, अफ़ग़ानिस्तान से दाग़ी गई एक स्कड मिसाइल अटक ज़िले के हिसार गांव में गिरी.

14 जून को सुबह 2:00 बजे कुर्रम एजेंसी के टेडी मंगल में एक स्कड मिसाइल गिरी, जिसमें एक अफ़ग़ान शरणार्थी घायल हो गया.

बख़्तरबंद गाड़ी

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26 जून को शाम 4:15 बजे कुर्रम एजेंसी के पेवार कोटल में एक स्कड मिसाइल गिरी, जिसमें चार अफ़ग़ान नागरिक घायल हो गए. 13 सितंबर को कुर्रम एजेंसी के शाहदल के पास और 20 नवंबर को सुबह 10:35 बजे खैबर एजेंसी के अवल खान के पास एक स्कड मिसाइल गिरी. इस हमले में भी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली.

28 नवंबर को दोपहर 3:40 बजे, अफ़ग़ानिस्तान से दागी गई दो स्कड मिसाइलें कुर्रम एजेंसी के टेडी मंगल में गिरीं. यह पाकिस्तानी धरती पर अफ़ग़ानिस्तान द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा और घातक हमला था. इसमें तीन अफ़ग़ान नागरिकों सहित 28 लोग मारे गए और 15 अन्य घायल हो गए.

पाकिस्तान में कुल 17 मिसाइलें गिरीं, जिनमें 35 से अधिक लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. अफ़ग़ान सरकार के हमले अफ़ग़ानिस्तान के भीतर भी नहीं रुके.

मुजाहिदीन के अनुसार, 21 अप्रैल, 1991 को, पूर्वोत्तर अफ़ग़ानिस्तान में उनके नियंत्रण वाले कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद में तीन स्कड हमलों में 300 से अधिक लोग मारे गए और 400 से 500 लोग घायल हुए.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि मरने वालों की संख्या अधिक इसलिए है क्योंकि वसंत ऋतु में बुवाई के मौसम के दौरान कई शरणार्थी अफ़ग़ानिस्तान में थे. हर साल, उनमें से बड़ी संख्या में लोग फसल बोने के लिए सीमा पार करते हैं, फिर गर्मियों के लिए पाकिस्तान के शिविरों में लौट आते हैं और शरद ऋतु की फसल के लिए घर लौटते हैं.

सोवियत संघ की वापसी के बाद नजीबुल्लाह की सरकार तीन साल तक चली. इस दौरान छिड़ी जंग ने पूरे देश को तबाह कर दिया था.

आख़िरकार 16 अप्रैल 1992 को नजीबुल्लाह ने अपना पद छोड़ दिया. अफ़ग़ान प्रतिरोध सिविल वॉर में उलझ गया. मुजाहिदीन के विभिन्न गुट आपस में लड़ने लगे. जनवरी 1994 से फरवरी 1995 तक 13 महीनों तक काबुल पर तोपखाने और रॉकेट से बमबारी की गई.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS