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छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में होगा बदलाव? कल आएगा फैसला

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Small Savings Scheme Interest Rate: अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा से पहले निवेशकों की नजरें सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।

Small Savings Scheme Interest Rate: अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा से पहले निवेशकों की नजरें सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं। खासतौर पर सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) और किसान विकास पत्र (केवीपी) जैसी योजनाएं लंबे समय से सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में लोकप्रिय रही हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह का बदलाव आम निवेशकों के लिए अहम माना जाता है।

क्या है डिटेल

सरकार इन छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा हर तिमाही में करती है। इस सूची में आरडी, पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई), केवीपी, एनएससी और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) जैसी योजनाएं शामिल हैं। हालांकि, 31 दिसंबर 2025 को जारी ताजा अधिसूचना में आर्थिक मामलों के विभाग ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, जिससे स्थिरता का रुख जारी रहा।

किन योजनाओं पर कितना ब्याज

वर्तमान तिमाही में सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम दोनों पर 8.2% का आकर्षक ब्याज मिल रहा है। वहीं पीपीएफ पर 7.1%, एनएससी पर 7.7% और केवीपी पर 7.5% ब्याज दिया जा रहा है, जिसकी मैच्योरिटी अवधि 115 महीने है। मासिक आय योजना (MIS) पर 7.4% का रिटर्न मिल रहा है, जबकि पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट पर 4% ब्याज जारी है।

फिक्स्ड डिपॉजिट की बात करें तो 1 साल की अवधि पर 6.9% ब्याज मिल रहा है, जो अल्पकालिक निवेश के लिए उपयुक्त माना जाता है। 2 साल की एफडी पर 7.0% और 3 साल की एफडी पर 7.1% ब्याज दिया जा रहा है। वहीं 5 साल की एफडी पर 7.5% का रिटर्न मिल रहा है, जो लंबी अवधि के निवेशकों को आकर्षित करता है। इसके अलावा 5 साल की आवर्ती जमा (RD) पर फिलहाल 6.7% ब्याज मिल रहा है।

क्या है लास्ट टाइम का बदलाव

अगर पिछली बार दरों में बदलाव की बात करें, तो जनवरी-मार्च 2023-24 तिमाही के दौरान इसमें संशोधन देखा गया था। इसके बाद अप्रैल 2024 में केवल दो योजनाओं—तीन साल की टाइम डिपॉजिट और सुकन्या समृद्धि योजना—की ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी की गई थी, जबकि बाकी सभी योजनाओं की दरें तब से अब तक स्थिर बनी हुई हैं।

ब्याज दरों का निर्धारण सरकार एक तय फॉर्मूले के आधार पर करती है, जो बाजार में सरकारी बॉन्ड यानी जी-सेक की यील्ड से जुड़ा होता है। उदाहरण के लिए, 5 साल की योजना के लिए 5 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड को ध्यान में रखा जाता है। अब वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई के रुझान और बाजार में तरलता की स्थिति को देखते हुए निवेशक अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए सरकार के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार ब्याज दरों में कोई बदलाव करती है या फिर स्थिरता का रुख बरकरार रखती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN