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गर्मियों में पीते हैं गन्ने का जूस, जान लें इन गन्नों की मिठास बढ़ाने में था एक महिला का योगदान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Sugarcane Juice: गर्मियों में गन्ने का जूस सड़क के किनारे ठेलों पर निकालते और बेचते दिख जाते हैं। इन जूस की मिठास गर्मी में राहत देती है। लेकिन सालों पहले भारत के उगे गन्नों में फीकापन था और इन्हें मीठा बनाने में एक महिला बोटैनिस्ट का हाथ था। जानें कौन थी भारत की पहली महिला वनस्पतिशास्त्री।

शुगर को भले ही कई बीमारियों का कारण बताया जा रहा हो। लेकिन चीनी बनाने के लिए जरूरी गन्ने के प्रोडक्शन में भारत दुनियाभर में दूसरे नंबर पर है। और एक समय चीनी के प्रोडक्शन के लिए भारत को दूसरे देश के गन्नों पर निर्भर रहना पड़ता था और तब, बोटेनिस्ट जानकी अम्मल ने रिसर्च के बाद भारत की मिट्टी में उगने वाले गन्नों की मिठास को बढ़ाया था। लेकिन ये काम उतना आसान नहीं था। उस दौर में जब लड़कियों की शादी कम उम्र में कर दी जाती थी। जानकी अम्मल ने पढ़ाई की राह चुनी और पीएचडी के लिए वो विदेश तक गईं। अब अगर आप चीनी को सेहत का दुश्मन मानती हैं तो जरा चीनी बनाने वाले गन्ने के प्रोडक्शन से जुड़ी कहानी को जरूर जान लें

गन्ने की मिठास बढ़ाने में महिला बोटेनिस्ट का योगदान

1912 में जब भारत में गन्ने की फसल बोई जाती थी तो उनमे मिठास कम होती थी। मीठे गन्नों के लिए साउथ ईस्ट एशिया के जरिए दूसरे देशों से होने वाले आयात पर डिपेंट रहना पड़ता था। तब जानकी अम्मल नाम की बोटेनिस्ट ने कड़ी रिसर्च के बाद मीठे गन्नों की किस्म को भारत में उगाने के लिए विकसित किया।

कौन थी जानकी अम्मल

1897 में केरल के छोटे से गांव में जानकी अम्मल का जन्म हुआ था। उस दौर में जब लड़कियों की शादी कम उम्र में ही कर दी जाती थी तब उन्होंने शादी छोड़ पढ़ाई का रास्ता चुना। मद्रास के क्वीन मैरी कॉलेज से ग्रेजुएशन और प्रेसिडेंसी कॉलेज से वनस्पति विज्ञान में ऑनर्स की डिग्री लेने के बाद वो पीएचडी के लिए मिशिगन यूनिवर्सिटी चली गईं। वहां से लौटने के बाद जानकी ने 1932 में कोयंबटूर के शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट को ज्वॉइन किया और भारत की मिट्टी में उगने वाले ज्यादा मीठे और ज्यादा उपज वाले गन्नों की किस्म तैयार की।

तो गर्मियों में जब भी मीठे गन्ने के जूस का लुत्फ उठाते हैं तो जरा उस महिला के कड़ी मेहनत और संघर्ष को जरूर याद कर लें जिसने गन्ने को इंडोनेशिया से आयात करने की बजाय भारत में ज्यादा मात्रा और मिठास वाले उगाने में खास भूमिका निभाई थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN