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खाने में छौंक, बघार या तड़का कब लगाएं? जानें तीनों में क्या है अंतर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Cooking tips: खाना पकाते वक्त कब तड़का लगाना है और कब छौंक और बघार, इसकी जानकारी तभी हो पाएगी जब आपको पता हो कि इन तीनों के बीच अंतर क्या है। तड़का, छौंक और बघार को एक समझने की गलती ना करें, जानें क्या होता है तीनों के बीच अंतर।

खाना पकाने के कई सारे स्टेप होते हैं। इन्हीं में से होता है छौंक या तड़का। जो खाने के टेस्ट को बढ़ाने के लिए लगाया जाता है। अब अगर आप सोचते हैं कि छौंक, तड़का, बघार ये सारे शब्द एक की काम के लिए यूज होते हैं। तो गलत है, दरअसल, हर शब्द का अपना अलग मतलब होता है। खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए सूखे, खड़े मसालों का इस्तेमाल तेल में अलग-अलग तरीके से किया जाता है। जिसे छौंक और तड़का बोला जाता है। जानें छौंक और तड़के में क्या अंतर होता है।

छौंक लगाने का क्या मतलब होता है

खाने में छौंक हमेशा पहले लगाई जाती है। तेल में मसालों को डालकर जब उसमे सब्जी या दाल को डालकर पकाया जाता है। जिससे तेल और मसालों का स्वाद और महक पकने के साथ आती है। आमतौर पर छौंक लगाकर सब्जियों को बनाने की परंपरा होती है। जिससे कि सब्जियों में तेल और मसालों का स्वाद पूरी तरह से रच-बस जाए।

तड़का लगाने का मतलब होता अलग

वहीं तड़का लगाना छौंक लगाने से बिल्कुल अलग होता है। तड़का हमेशा पके हुए खाने के ऊपर से लगाया जाता है। जिससे कि खाने के टेस्ट को और भी ज्यादा बढ़ाया जा सके। आमतौर पर देसी घी, मिर्च और सूखे मसालों को डालकर दाल, कढ़ी, चटनी जैसे पकवान में तड़का लगाया जाता है।

तो बघार क्या है?

कुछ लोग बघार शब्द का भी इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बघार तड़का और छौंक से बिल्कुल अलग होता है। बघार को हमेशा खाने के बीच में लगाया जाता है। और बघार खाने पकने के बीच में कई बार लगाया जाता है। खाने में छौंक लगाने के बाद कई बार बघार लगाया जाता है। जिससे कि सारे मसाले अच्छी तरह से पकवान में घुल जाएं और स्वाद आ सके। खाना पकाने के प्रोसेस में ये तीनों ही चीजें बिल्कुल अलग हैं और हर प्रोसेस का अपना अलग टेस्ट खाते वक्त मिलता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN