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किसानों की आमदनी 3 गुनी करने वाली F4F की सक्सेस स्टोरी नितिन कामथ की जुबानी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नितिन कामथ ने बताया कि उनकी टीम पहली बार 2020 में F4F से मिली थी। तब यह 50 एकड़ में काम कर रहा था। आज यह 5,000 एकड़ में फैल चुका है और अगले तीन साल में 40,000 एकड़ तक पहुंचने के लिए फंडिंग मिल चुकी है।

“पिछले हफ्ते गर्मी ने कहर बरपाया। नागपुर में 45°, अहमदाबाद में 44°, प्रयागराज में 43°, दिल्ली में 42° तापमान रहा। बेंगलुरु में भी 37° पहुंच गया और अभी अप्रैल ही चल रहा है। तापमान बढ़ने का एक बड़ा कारण जंगलों का घटना है और भारत ने बहुत सारे जंगल खो दिए हैं। 2020 में हम ‘फार्मर्स फॉर फॉरेस्ट्स (F4F)’ नाम की टीम से मिले थे।”

यह जेरोधा के फाउंडर नितिन कामथ के उस X पोस्ट का अंश है, जो उन्होंने 27 अप्रैल 2026 को शाम 5:51 बजे किया था। इसे अबतक 4.91 लाख से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। दरअसल कहानी यहां ब्यूज की नहीं है। यह एक सक्सेस स्टोरी है, जिसमें पारंपरिक खेती की तुलना में किसानों की आमदनी 3 गुना बढ़ गई। आइए इस सक्सेस स्टोरी को पढ़ें…

जलवायु संकट के इस दौर में एक शांत, लेकिन बड़ी सोच भारत के ग्रामीण इलाकों में जड़ें जमा रही हैं। क्या किसान जंगलों की पहली पंक्ति के संरक्षक बन सकते हैं? इसी सवाल का जवाब है Farmers for Forests (F4F), एक स्टार्टअप, जो खेती, ईको सिस्टम और इनकम के बीच के रिश्ते को नए सिरे से परिभाषित करना चाहता है।

क्या है F4F

F4F की शुरुआत 2019 में भारत में हुई। इसे अर्ति धर, आदित्य अविनाशे और कृतिका रविशंकर ने मिलकर स्थापित किया। ये टीम ईको सिसटम, ग्रामीण विकास और तकनीक के क्षेत्र से आती है। उन्होंने एक ऐसा मॉडल बनाने की ठानी, जहां किसान सिर्फ फसल उगाने वाले न हों, बल्कि प्रकृति को पुनर्जीवित करने वाले कार्बनदाता बनें।

क्यों जरूरी है यह पहल?

भारत में खेती अब भी सबसे बड़ी आजीविका का साधन है, लेकिन किसानों के सामने कम आय, बेमौसम बारिश और बंजर होती जमीन जैसी समस्याएं हैं। F4F का मानना है कि किसानों को प्रोत्साहित करके उनकी जमीन पर पेड़ लगाने और ईको सिस्टम सुधारने का काम किया जा सकता है। इसे कृषि-वानिकी (अग्रोफॉरेस्ट्री) कहते हैं। इससे न केवल मिट्टी अच्छी होती है, बल्कि जैव विविधता बढ़ती है और कार्बन क्रेडिट या टिकाऊ उपज से किसानों की अतिरिक्त आय भी होती है। यानी खेती को खत्म नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाना है।

क्लाइमेट फंड रेनमैटर का समर्थन

F4F को शुरुआत में ही नितिन कामथ के क्लाइमेट फंड रेनमैटर का समर्थन मिला। रेनमैटर ऐसे ही असरदार और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले जलवायु समाधानों को अपनाता है। यह समर्थन देखकर लगा कि अब भारत के नए उद्यमी सिर्फ फिनटेक और टेक्नोलॉजी से आगे बढ़कर जलवायु समाधानों पर भी काम कर रहे हैं।

मिट्टी से 40,000 एकड़ तक का सफर

हाल ही में नितिन कामथ ने बताया कि उनकी टीम पहली बार 2020 में F4F से मिली थी। तब यह 50 एकड़ में काम कर रहा था। आज यह 5,000 एकड़ में फैल चुका है और अगले तीन साल में 40,000 एकड़ तक पहुंचने के लिए फंडिंग मिल चुकी है।

सबसे मुश्किल काम यह था कि किसान पेड़ बड़े होने का इंतजार नहीं कर सकते, और ज्यादातर पेड़ लगाने के प्रोजेक्ट पहली बारिश में ही खत्म हो जाते हैं। F4F ने इस समस्या को समझा। अब यह सरकार और बड़े संस्थानों के साथ मिलकर कार्बन बॉन्ड और फर्स्ट-लॉस गारंटी जैसे वित्तीय उपाय बना रहा है, जो पेड़ों के बढ़ने तक किसानों को सुरक्षा देते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN