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हाल ही में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन किया. वे ‘एपस्टीन फ़ाइल’ में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम आने और यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन के साथ मेल-मुलाक़ात की वजह से उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस ने हाल ही में एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइलों का भारी पुलिंदा जारी किया है.
एपस्टीन फ़ाइल से पता चलता है कि हरदीप सिंह पुरी और जेफ़री एपस्टीन के बीच साल 2014 और 2015 के बीच ईमेल के ज़रिए कई बार बातचीत हुई.
हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि उनका एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों से किसी तरह का संबंध नहीं है.
इसी सिलसिले में बीबीसी ने एपस्टीन फ़ाइल का विश्लेषण करते हुए यह जानने की कोशिश की है कि इनमें ऐसा क्या है जिसे आपत्तिजनक कहा जा रहा है.
इसके लिए सिलसिलेवार तरीक़े से एपस्टीन फ़ाइल के उन ईमेल को पढ़ना ज़रूरी है जिनकी वजह से हरदीप सिंह पुरी विवादों के घेरे में हैं.
हम यहाँ इन ईमेल में लिखी बातों के उन हिस्सों को पेश कर रहे हैं जिनसे पता चलता है कि इनके बीच किस तरह की बातचीत हो रही थी.
‘कोई और सलाह’
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रीड हॉफ़मैन एक अमेरिकी इंटरनेट उद्यमी और लिंक्डइन के सह संस्थापक हैं. जेफ़री एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को एक ईमेल में लिखा, “…मेरी टेर्जे से बात हुई. रीड हॉफ़मैन भारत आने के लिए तैयार हैं”.
एपस्टीन की 18 जून की ईमेल के जवाब में हरदीप सिंह पुरी ने लिखा, “रीड हॉफ़मैन की यात्रा के लिए सहायता/सुविधा प्रदान करके मुझे ख़ुशी होगी”.
एपस्टीन ने रीड हॉफ़मैन और हरदीप सिंह पुरी का आपस में परिचय कराते हुए एक मेल में लिखा, “रीड, भारत में हरदीप ही आपके (मददगार) शख़्स हैं.”
रीड हॉफ़मैन ने 24 सितंबर की इस ईमेल के जवाब में लिखा, “हरदीप, आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा. लोगों को चुनने की जेफ़री की पसंद बहुत अच्छी है (मैं अपवाद हूँ).”
25 सितंबर 2014 को ही इस ईमेल का जवाब देते हुए हरदीप पुरी ने लिखा, “लोगों के बारे में जेफ़री की समझ पर मुझे कोई शक़ नहीं है. उनके ‘इंस्टिंक्टस’ (लोगों को पहचानने और समझने की सलाहियत) तो और भी बेहतर है.”
एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी से पूछा, “क्या रीड से मीटिंग हुई?”
इसके जवाब में 4 अक्तूबर को ही हरदीप सिंह पुरी ने लिखा, “मैं आज दोपहर एक मीटिंग के लिए एसएफ़ (सैन फ्रैंसिस्को) में हूँ. आप, मेरे दोस्त, सच में काम करवा लेते हैं.”
“कोई और सलाह?”
एपस्टीन ने 4 अक्तूबर को ही दिए जवाब में लिखा, “उन्हें बताओ कि विज्ञान और तकनीक से जुड़े लोगों और सोशल नेटवर्किंग गुरुओं से मिलने के लिए आप उनकी भारत यात्रा का इंतज़ाम करेंगे.”
वीज़ा की व्यवस्था
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एपस्टीन ने हॉफ़मैन से एक ईमेल में पूछा, “क्या आपको हरदीप उपयोगी लगे?”
इसके जवाब में 12 अक्तूबर 2014 को रीड हॉफ़मैन ने लिखा, “कॉम्प्लिकेटेड (जटिल या उलझे हुए)”.
जेफ़री एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को एक ईमेल में लिखा, “हरदीप, मुझे एक मदद चाहिए. मेरी सहायक को भारत में एक शादी में शामिल होने के लिए तुरंत वीज़ा चाहिए. क्या दूतावास में कोई ऐसा व्यक्ति है जिससे वह बात कर सकें?”
इसके जवाब में हरदीप सिंह पुरी ने 24 अक्तूबर को ही एक ईमेल में सेवानिवृत्त राजदूत प्रमोद बजाज को लिखा, “प्रमोद, अगर आप इसे प्राथमिकता के आधार पर करवा सकें तो मैं आभारी रहूँगा. मैं आवेदक से अनुरोध करूँगा कि वह आपसे सीधे संपर्क करें.”
“जेफ़री, राजदूत बजाज, जो अब मेरे साथ काम करते हैं, इसकी व्यवस्था करेंगे.”
“प्रमोद, यदि आप उनसे अनुरोध करना चाहें तो न्यूयॉर्क में रह रहे संजीव को भी इसमें (मेल में) कॉपी किया गया है.”
24 अक्तूबर को ही प्रमोद बजाज ने जेफ़री एपस्टीन को एक ईमेल लिखी. इसमें उन्होंने एपस्टीन की हरदीप सिंह पुरी को लिखी ईमेल का हवाला देते हुए कहा, “हमें वीज़ा संबंधी आपकी सहायता करने में बहुत ख़ुशी होगी”.
इसके बाद प्रमोद बजाज ने लिखा कि आजकल “वीज़ा प्रक्रिया ऑनलाइन होती है” और ऑनलाइन आवेदन करने के बाद “वीज़ा आवेदन की हार्ड कॉपी आउटसोर्सिंग कंपनी के दफ़्तर में जमा करनी होगी”.
आख़िर में प्रमोद बजाज ने लिखा, “जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाए, कृपया हमें सूचित करें. हम आगे की प्रक्रिया में आपकी सहायता करेंगे.”
“यदि आपके सहकर्मी को किसी अन्य जानकारी या सहायता की आवश्यकता हो तो कृपया बेहिचक हमसे संपर्क करें.”
डिजिटल इंडिया
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हरदीप सिंह पुरी ने जेफ़री एपस्टीन को एक ईमेल लिखा. इसमें उन्होंने ‘एक्सोटिक आइलैंड’ या ‘अनूठे टापू’ का ज़िक्र किया. पुरी ने लिखा, “जब आप अपने ‘एक्सोटिक आइलैंड’ से वापस आ जाएँ तो कृपया बताइएगा. मैं आपसे मिलकर थोड़ी बातचीत करना चाहूँगा. साथ ही, आपको भारत में रुचि जगाने वाली कुछ किताबें भी देना चाहता हूँ.”
इसके जवाब में उसी दिन एपस्टीन ने लिखा, “मैं तो आपको लिख ही रहा था- कमाल है! मैंने रीड से बात की.”
जवाब में हरदीप सिंह पुरी ने लिखा, “वास्तव में, यह तो टेलीपैथी ही है. जब आप वापस आ जाएँ तो मुझे ज़रूर बताइएगा. और मज़े कीजिए- वैसे भी, उसके लिए आपको किसी और के उत्साहवर्धन की ज़रूरत नहीं पड़ती!”
डिजिटल इंडिया का ज़िक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में ‘डिजिटल इंडिया’ को एक जुलाई 2015 को लॉन्च किया गया था.
लेकिन इसके क़रीब साढ़े सात महीने पहले 13 नवंबर 2014 को हरदीप सिंह पुरी ने जेफ़री एपस्टीन को एक ईमेल लिखा. इसमें इसका ज़िक्र मिलता है.
हरदीप सिंह पुरी ने लिखा, “जेफ़, मैंने आपको 3 अक्तूबर को सिलिकॉन वैली में रीड के साथ हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया था. आपकी प्रतिक्रिया थी कि रीड को जल्द से जल्द भारत का दौरा करना चाहिए. अक्तूबर के मध्य में भारत लौटने के बाद, मैं पहले से कहीं अधिक आश्वस्त हूँ कि आज भारत में इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए शानदार मौक़ा है.”
हरदीप सिंह पुरी ने इस मेल में आगे लिखा, “उदाहरण के लिए जापानी दूरसंचार और इंटरनेट दिग्गज सॉफ़्ट बैंक ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने अगले 10 सालों में भारतीय ई-कॉमर्स क्षेत्र में 10 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है. भारतीय कंपनी स्नैपडील 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग प्राप्त करने वाली पहली कंपनी है. मज़बूत जनादेश के साथ चुनी गई नई सरकार के आने से बाज़ार में हलचल और बढ़ गई है. यह ‘डिजिटल इंडिया’ पर ख़ास फ़ोकस के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है.”
राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जब डिजिटल इंडिया लॉन्च ही साल 2015 में हुआ तो हरदीप सिंह पुरी नवंबर 2014 में ही एपस्टीन से इसकी चर्चा कैसे कर रहे थे?
चेतावनी: इस ईमेल संवाद में आगे नस्लीय टिप्पणी है.
25 दिसंबर 2015 को एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी का एक ईमेल नॉर्वे के राजनयिक टेर्जे रोड-लार्सन को भेजा.
इस ईमेल के निचले हिस्से में पुरी ने एपस्टीन से “कॉफ़ी के लिए समय” माँगा था.
रोड-लार्सन को फॉरवर्ड किए गए इस ईमेल में एपस्टीन ने लिखा “टू-फ़ेस्ड (दोमुँहा)”.
रोड-लार्सन ने जवाब दिया, “क्या आपने यह कहावत सुनी है: जब आप एक भारतीय और एक साँप से मिलें तो पहले भारतीय को मार डालें!”
एपस्टीन ने जवाब दिया, “सवाल यह है कि आप दोनों में फ़र्क़ कैसे करेंगे.”
विपक्ष ने इन बातचीत पर क्या सवाल उठाए?
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कांग्रेस ने एपस्टीन फ़ाइलों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम आने के बाद सरकार पर हमला तेज़ कर दिया है. पार्टी ने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए मंत्री से जवाबदेही की माँग की है और कई सवाल खड़े किए हैं.
कांग्रेस ने सबसे पहले माँग की है कि हरदीप सिंह पुरी को अपने पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए. पार्टी का कहना है कि जब किसी केंद्रीय मंत्री का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर की आपराधिक जाँच से जुड़े दस्तावेज़ों में आता है तो उन्हें नैतिक रूप से पद पर बने नहीं रहना चाहिए.
1. एपस्टीन को रीड के साथ हरदीप की मुलाक़ात के बारे में पहले ही कैसे पता चल गया?
2. क्या एपस्टीन ही वह ‘कॉन्टेक्ट’ था जिसने रीड हॉफ़मैन के साथ मुलाक़ात करवाई थी?
3. हरदीप उससे मुलाक़ात की जानकारी क्यों डिस्कस कर रहे थे?
4. एपस्टीन को ‘दोस्त’ कहकर क्यों संबोधित किया गया?
5. एपस्टीन हरदीप के लिए क्या ‘करवा’ रहा था?
6. अगर उनका संबंध महज संयोगवश या सतही था तो हरदीप एपस्टीन से ‘सलाह’ क्यों मांग रहे थे?
इस बीच, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मंगलवार को दावा किया कि साल 2014 से 2017 के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन के बीच 62 बार ईमेल का आदान-प्रदान हुआ. कांग्रेस ने एक बार फिर हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफ़े की माँग की है.
हरदीप पुरी ने अपने बचाव में क्या-क्या कहा?
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हरदीप सिंह पुरी ने इस दौरान कहा, “एपस्टीन से जुड़े मामले ग़लत काम और अपराधों से संबंधित हैं. एपस्टीन के मामलों में आरोप हैं कि उसके पास एक टापू था. वहाँ वह लोगों को यौन गतिविधियों में लिप्त होने के लिए ले जाता था. उस पर बाल यौन शोषण का भी आरोप है. इसके पीड़ित भी हैं. उन पीड़ितों ने मुक़दमे दायर किए हैं. मेरा इससे कोई संबंध नहीं है.”
उन्होंने कहा, “एपस्टीन से जुड़ी 30 लाख फ़ाइलें रिलीज़ हुई हैं और मैं न्यूयॉर्क में आठ साल रहा. हम मई 2009 से उस दौर के बारे में बात कर रहे हैं जब मैं न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत का राजदूत बना और 2017 में मंत्री बना. इन आठ सालों में संभवतः तीन या चार बैठकों के संदर्भ मिलते हैं.”
हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “पिछले साल नवंबर में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी मेरे पास आए और कहा कि ‘कुछ नाम दिलचस्प जगह पर आए हैं.’ उसके बाद मैंने युवा नेता राहुल गांधी को बताने का फ़ैसला किया और मैंने कहा कि उन्हें एक नोट भेजूँगा.”
उन्होंने कहा, “इस नोट में मैंने लिखा कि अमेरिका में भारतीय राजदूत के पद से रिटायर होने के कुछ महीने बाद मुझे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) में आमंत्रित किया गया था. मैं आईसीएम (इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलैटरलिज़्म ) में सेक्रेट्री जनरल था. इसके अध्यक्ष ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री थे. आईसीएम, आईपीआई का प्रोजेक्ट था. आईपीआई में मेरे बॉस टेर्जे रोड-लार्सन उस कुख़्यात व्यक्ति एपस्टीन को जानते थे. आईपीआई और आईसीएम के डेलिगेट के तौर पर मैं एपस्टीन से कुछ मौक़ों पर मिला. मैं तीन या अधिकतम चार बार उससे मिला. आईसीएम अंतरराष्ट्रीय मामलों को देखता था और एपस्टीन इसका हिस्सा नहीं थे.”
इस सवाल पर कि वे एक सज़ायाफ़्ता दोषी से क्यों संपर्क में थे, हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “वह न्यूयॉर्क समाज का एक बेहद प्रमुख सदस्य था. उससे जुड़े हुए आधे लोगों को उसके अतीत के बारे में ज़रा भी जानकारी नहीं थी. लेकिन यहाँ मुद्दा वह नहीं है. हम जैसे लोगों को अपनी ज़िंदगी में तरह-तरह के लोगों से मिलना-जुलना पड़ता है.”
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हरदीप सिंह पुरी ने अपने बचाव में कहा, ” कोलंबो में मैं एक युवा प्रथम सचिव था और मुझे वेलुपिल्लई प्रभाकरण नाम के व्यक्ति से बातचीत करने के लिए भेजा गया था, जो एलटीटीई (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम) का प्रमुख था. सिर्फ़ इसलिए कि मैं प्रभाकरण से बातचीत कर रहा था… जो एलटीटीई का प्रमुख था और जिस पर बाद में हमारे प्रधानमंत्री की हत्या के लिए ज़िम्मेदार होने का आरोप लगाया गया… सिर्फ़ इसलिए कि मैं एक आतंकवादी से बात कर रहा हूँ… क्या इसका मतलब यह है कि मैं भी उस आतंकवादी के मूल्यों को साझा करता हूँ?”
हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “आठ सालों में, केवल दो संदर्भ हैं- या एक ईमेल, मेरे संपर्कों ने मेरी मुलाक़ात एक व्यक्ति से कराई जिसका नाम रीड हॉफ़मैन था. रीड हॉफ़मैन लिंक्डइन के संस्थापक थे. तो मैं लिंक्डइन के रीड हॉफ़मैन से मिला और बैठक के बाद मैंने एक संदेश भेजा.”
रीड हॉफ़मैन से जुड़े प्रकरण पर पुरी ने कहा, “नवंबर 2014 में मैं एक निजी नागरिक था. किसी ने कहा कि वे भारत को समझना चाहते हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका के वेस्ट कोस्ट पर हमारी मुलाक़ात रीड हॉफ़मैन से होती है, जो लिंक्डइन के संस्थापक हैं. और मैं अपनी ईमेल की शुरुआत इस बात से करता हूँ कि अब मैं पहले से कहीं अधिक आश्वस्त हूँ कि आज का भारत एक बेहतरीन अवसर प्रस्तुत करता है और रीड हॉफ़मैन को भारत आकर उन बदलावों को देखना चाहिए जो आ रहे हैं.”
“मैं नवंबर 2014 में डिजिटल इंडिया की बात कर रहा हूँ. अगर मेरी याददाश्त सही है तो ये परियोजनाएँ 2015 में शुरू हुई थीं. तो वहाँ मैं एक दूरदर्शी निजी नागरिक था जो यह समझ रहा था कि मोदी सरकार किस तरह का काम करने जा रही है.”
एपस्टीन की सहयोगी के लिए वीज़ा दिलवाने में मदद करने के मामले पर हरदीप पुरी ने कहा, “जो वीज़ा की रिक्वेस्ट आई तो मैंने जवाब नहीं दिया. मैंने इसे अपने एक सहकर्मी को भेज दिया… जिसने इसे एक ऐसे व्यक्ति को भेज दिया जिसने कहा कि ऑनलाइन आवेदन करें. क्या यह किसी पर एहसान करना है?”
उन्होंने कहा, “एपस्टीन ने मेरे बारे में लिखा टू-फ़ेस्ड (दोमुँहा). ‘टू-फ़ेस्ड’ का क्या मतलब है- कि ये आदमी ठीक नहीं है. उनके वैल्यू सिस्टम में मैं बिल्कुल ठीक नहीं था.”
साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने ‘भारतीय और साँप’ वाली बात का ज़िक्र करते हुए यह जताने की कोशिश भी की कि उनकी एपस्टीन से कोई नज़दीकी नहीं थी.
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SOURCE : BBC NEWS



