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उस वक्त मैं राष्ट्रपति होता तो… रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, अब क्या बोले?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इससे पहले G7 समूह ने मंगलवार को युद्ध के चार साल पूरे होने पर एक बयान जारी कर यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के लिए अपने अटूट समर्थन की पुष्टि की। बयान में शांति समझौता कराने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों की भी सराहना की गई।

Russia Ukraine war: दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को रुकवाने का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप इसमें अब तक कामयाब नहीं हो पाए हैं। कभी बातचीत तो कभी चेतावनियों का सहारा लेकर भी ट्रंप दोनों देशों के बीच सुलह नहीं करवा पाए हैं, जिसे लेकर ट्रंप खुद निराश हैं। मंगलवार को इस जंग को शुरू हुए चार साल पूरे हो गए। अब हाल ही में ट्रंप ने इसे लेकर एक नया दावा किया है।

अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए एक बड़ा दावा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर वह उस समय राष्ट्रपति होते तो युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। उन्होंने संसद को संबोधित करते हुए कहा, “रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा हूं। यह एक ऐसा युद्ध है, जो अगर मैं तब राष्ट्रपति होता तो कभी शुरू ही नहीं होता।”

G7 ने की ट्रंप की तारीफ

इससे पहले G7 समूह ने मंगलवार को युद्ध के चार साल पूरे होने पर एक बयान जारी कर यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता, अस्तित्व के अधिकार, स्वतंत्रता, संप्रभुता और स्वाधीनता की रक्षा के लिए अपने अटूट समर्थन की पुष्टि की। बयान में रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों की भी सराहना की गई। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मंगलवार को यूक्रेन के समर्थन में एक प्रस्ताव भी पारित किया। हालांकि भारत और अमेरिका उन 51 देशों में से एक रहे, जिन्होंने मतदान में भाग नहीं लिया।

अमेरिका के तेल हितों को पहुंचा नुकसान

इस बीच अमेरिका में यूक्रेन की मुख्य दूत ने मंगलवार को कहा है कि रूस के हालिया हमलों की वजह से अमेरिका के तेल हितों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने काला सागर स्थित रूसी बंदरगाह नोवोरोस्सियस्क पर यूक्रेन के उन हालिया हमलों को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है, जिनसे कजाकिस्तान में अमेरिकी तेल हितों पर असर पड़ा है। राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के चार साल पूरे होने के मौके पर अमेरिका की चिंता को रेखांकित किया।

स्टेफनिशिना ने वाशिंगटन में पत्रकारों से कहा, ”यह पहल यूक्रेन को रूसी सैन्य और ऊर्जा अवसंरचना पर हमला करने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करने से संबंधित नहीं थी। यह इस तथ्य से संबंधित थी कि इससे अमेरिकी आर्थिक हित प्रभावित हुए थे। ऐसा हुआ था और हमने इस पर संज्ञान लिया है।”

बता दें कि ‘कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम’ उत्तर-पश्चिमी कजाकिस्तान में कैस्पियन सागर तट से नोवोरोस्सियस्क बंदरगाह तक एक पाइपलाइन का संचालन करता है। यह पाइपलाइन कजाकिस्तान के तीन प्रमुख तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा संभालती है, जिनमें प्रमुख अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों, शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल की हिस्सेदारी है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN