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ईरान मान गया, अब वे परमाणु हथियार नहीं रखेंगे; ट्रंप का बड़ा दावा; होर्मुज पर कब्जे का प्लान?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका-ईरान युद्ध पर डोनाल्ड ट्रंप ने गुप्त समझौते और ईरान के ‘तोहफे’ का बड़ा दावा किया है। इजरायली हमलों, अमेरिकी सैन्य तैनाती और वैश्विक ऊर्जा संकट से जुड़ी मध्य-पूर्व की पूरी खबर पढ़ें।

पिछले 25 दिनों से चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। ट्रंप के अनुसार, ईरान ने सद्भावना के प्रतीक के रूप में अमेरिका को एक ‘तोहफा’ देने की पेशकश की है। हालांकि ट्रंप ने इस तोहफे का पूरा विवरण नहीं दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह बहुत अधिक मूल्य का है और इसका संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल व्यापार से है। उन्होंने ये भी कहा कि ईरान अब कभी परमाणु हथियार नहीं रखने पर भी राजी हुआ है।

परमाणु हथियार मुख्य मुद्दा

ट्रंप ने वाइट हाउस में पत्रकारों को बताया कि हम इस समय बातचीत कर रहे हैं। इस वार्ता में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ-साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि किसी भी संभावित समझौते की शुरुआत इस शर्त से होगी कि ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को अपने कब्ज़े में ले लेगा और दोनों पक्ष इस शर्त पर सहमत दिख रहे हैं। ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि यदि कोई समझौता होता है, तो अमेरिका और ईरान संयुक्त रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित कर सकते हैं।

ईरान का इनकार और विरोधाभासी बयान

जहां एक तरफ ट्रंप समझौते को लेकर आशान्वित हैं, वहीं ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को खारिज किया है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बागेर गालिबाफ और डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने ट्रंप के साथ किसी भी बातचीत से साफ इनकार किया है। निकजाद ने ट्रंप को झूठा करार दिया। ईरान ने अली लारीजानी (जो हाल ही में इजरायली हवाई हमले में मारे गए) की जगह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक कट्टरपंथी अनुभवी नेता मोहम्मद-बागेर जोलघद्र को अपना नया शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा नेता नियुक्त किया है।

एक तरफ वार्ता, दूसरी तरफ सैन्य तैनाती

ट्रंप की कूटनीतिक उम्मीदों के विपरीत, जमीन पर सैन्य गतिविधियां तेज हो रही हैं। पेंटागन ने मध्य पूर्व में और अधिक जमीनी सैनिकों को भेजना शुरू कर दिया है। अमेरिकी मरीन क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं और सेना की एलीट 82वीं एयरबॉर्न डिवीजन से एक ब्रिगेड कॉम्बैट टीम को भी तैनात करने की योजना है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर उनके हमले पूरी तीव्रता के साथ जारी रहेंगे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने करीबी रॉन डर्मर को अमेरिका-ईरान वार्ता पर नजर रखने को कहा है ताकि इजरायली हितों की रक्षा हो सके। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया है। सऊदी अरब ने अमेरिका से कहा है कि यदि ईरान उनके ऊर्जा और जल संयंत्रों पर हमला करता है, तो वे भी ईरान पर हमला करने के लिए तैयार हैं।

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की कोशिशें

कई देश इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने मध्यस्थता की पेशकश की है। ट्रंप ने इस संबंध में मुनीर से बात भी की है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत में शांति की अपील की है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के ऊर्जा आयात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। तुर्की, सऊदी अरब और ओमान भी युद्धविराम की कोशिशों के लिए पिछले दरवाजे से ईरान से बातचीत कर रहे हैं।

मानवीय त्रासदी

इस 25-दिवसीय संघर्ष में अब तक 4,350 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से लगभग तीन-चौथाई मौतें ईरान में हुई हैं, जबकि लेबनान में 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जहां इज़राइल ईरान समर्थित हिजबुल्लाह से लड़ रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN