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ईरान पर पलक झपकते वार की तैयारी, मिडिल ईस्ट में ‘डार्क ईगल’ तैनात करेगा अमेरिका; जानें खासियत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Iran US Tension: ईरान के खिलाफ अमेरिका संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए मिडिल ईस्ट में अपना हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम तैनात करने की तैयारी कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो यह अमेरिकी सेना की इस अत्याधुनिक हथियार की पहली ऑपरेशनल तैनाती होगी।

ईरान के खिलाफ अमेरिका संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए मिडिल ईस्ट में अपना हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम तैनात करने की तैयारी कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो यह अमेरिकी सेना की इस अत्याधुनिक हथियार की पहली ऑपरेशनल तैनाती होगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लंबे समय से विकासाधीन डार्क ईगल (Dark Eagle) हाइपरसोनिक सिस्टम को क्षेत्र में भेजने का अनुरोध किया है। इसका उद्देश्य ईरान के अंदरूनी इलाकों में स्थित बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाना है, जो पारंपरिक सटीक हमलों की सीमा से बाहर हैं। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि ईरान ने अपने लॉन्चरों को 300 मील से अधिक दूरी पर शिफ्ट कर दिया है, जिसके चलते अमेरिकी सेना लंबी दूरी की हाइपरसोनिक क्षमता चाहती है। हालांकि अभी तक इस अनुरोध पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।

युद्धविराम के बावजूद इलाके में तनाव

बता दें कि 9 अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन इस अनुरोध से साफ संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर फैसला करते हैं तो अमेरिका हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की डिफेंस लीड बेक्का वासर ने कहा कि दोनों पक्ष इस समय का इस्तेमाल हथियार जमा करने और नई रणनीति बनाने में कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाली लड़ाई और अधिक घातक हो सकती है। अगर डार्क ईगल को मंजूरी मिलती है तो यह रूस और चीन जैसे रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी कड़ा संदेश होगा कि अमेरिका अब उनकी हाइपरसोनिक क्षमता का मुकाबला करने में सक्षम है।

डार्क ईगल की खासियत

बता दें कि डार्क ईगल को लॉन्ग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन (LRHW) भी कहा जाता है। इसकी मारक क्षमता 1,725 मील (करीब 2,780 किलोमीटर) से अधिक बताई जाती है। बताया जाता है कि इसे साउंड की गति से पांच गुना तेज (मैक 5+) गति से लक्ष्य तक पहुंचने और मैन्यूवर करके दुश्मन की एयर डिफेंस को चकमा देने के लिए डिजाइन किया गया है। लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित प्रत्येक मिसाइल की अनुमानित कीमत लगभग 1.5 करोड़ डॉलर है और फिलहाल इनकी संख्या आठ से अधिक नहीं है। सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) के अनुसार, एक पूरी बैटरी की लागत करीब 2.7 अरब डॉलर आएगी।

ईरान संघर्ष में अमेरिका की मिसाइल खपत

गौरतलब है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग में अपनी अधिकांश गुप्त JASSM-ER क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल कर ली हैं। अब तक करीब 1100 मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। अमेरिकी सेना दावा करती है कि उसे कुछ इलाकों में हवाई श्रेष्ठता हासिल है, लेकिन दर्जनों MQ-9 ड्रोन और कई मानवयुक्त लड़ाकू विमानों के नुकसान से साबित होता है कि ईरान के कई हिस्से अभी भी उसके लिए खतरनाक बने हुए हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN