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ईरान जंग के बीच खाड़ी देशों में तैनात सैनिकों से गुपचुप मिलने क्यों पहुंचे US रक्षा मंत्री; अटकलें तेज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

हेगसेथ के अनुसार, सैनिकों के बीच और अधिक आक्रामक कार्रवाई के लिए भी ज़ोर बढ़ रहा है; सैनिक ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बड़े बम और हथियार मांग रहे हैं।

ईरान युद्ध का आज 32वां दिन है। इस बीच खबरें आ रही हैं कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने खाड़ी क्षेत्रों में तैनात अमेरिकी सैनिकों से वहां जाकर गुपचुप मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि युद्ध निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन लंबा खिंचने की संभावना भी बनी हुई है। सैनिकों से मिलने के बाद हेगसेथ ने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो समेत एक पोस्ट डाला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि मध्य पूर्व में लड़ रहे अमेरिकी सैनिक अपनी “विरासत” पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और एक लंबे युद्ध के लिए तैयार हैं। हेगसेथ ने शनिवार को गुप्त दौरे पर इन सैनिकों से गुपचुप मुलाकात की थी।

जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेगसेथ ने कहा, “सप्ताहांत में, मुझे ‘ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी’ में लड़ रहे अपने सैनिकों से मिलने का अवसर मिला। शनिवार को हम लगभग आधे दिन तक CENTCOM में जमीन पर मौजूद थे।” उन्होंने कहा, “ये सैनिक अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लिए इस लड़ाई को खत्म करना चाहते हैं। यह इतिहास की बात है, यह विरासत की बात है।”

सैनिकों में आक्रामक रुख

रक्षा मंत्री के अनुसार, कई सैनिक और अधिक आक्रामक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा बड़े और शक्तिशाली हथियारों के इस्तेमाल की मांग भी बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने सुरक्षा कारणों से यह नहीं बताया कि उन्होंने किन ठिकानों का दौरा किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ग्राउंड फोर्स (जमीनी सेना) उतार सकता है, तो उन्होंने सीधे जवाब से बचते हुए कहा, “युद्ध में अपनी रणनीति पहले से नहीं बताई जाती।” यानी, अमेरिका ने सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं।

“ईरान के पास सैन्य विकल्प सीमित”

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दावा किया कि ईरान के पास अब सैन्य विकल्प बहुत कम बचे हैं और आने वाले दिन निर्णायक साबित हो सकते हैं। बड़ी बात यह है कि सैन्य कार्रवाई जारी रहने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन शांति वार्ता की प्रक्रिया पर भी आगे बढ़ रहा है। इस दौरान ट्रंप ने नई चेतावनी जारी की है और कहा है कि अगर जल्द युद्धविराम नहीं हुआ और होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो अमेरिका हमले और तेज कर सकता है, जिसमें खार्ग द्वीप (तेल निर्यात केंद्र) और डिसैलिनेशन (जल शुद्धिकरण) प्लांट्स पर हमले शामिल हो सकते हैं। बहरहाल, हेगसेथ के गुपचुप दौरे और सैनिकों से मुलाकात के बाद अटकलें तेज हैं कि अमेरिका मिडिल-ईस्ट में अब क्या नया करने जा रहा है?

SOURCE : LIVE HINDUSTAN