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ईरानी सैनिकों को वापस मत भेजना, श्रीलंका पर हुक्म चला रही ट्रंप सरकार; पाला बदलवाने की कोशिश

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ को टॉरपीडो से डुबा दिया है। अब अमेरिका श्रीलंका पर दबाव डाल रहा है कि वह बचे हुए ईरानी नौसैनिकों और चालक दल को वापस ईरान न भेजे।

अमेरिका अब श्रीलंका सरकार पर दबाव डाल रहा है कि वह इस सप्ताह डुबाए गए ईरानी युद्धपोत के बचे हुए जीवित नौसैनिकों और श्रीलंकाई हिरासत में मौजूद दूसरे ईरानी जहाज के चालक दल को वापस ईरान न भेजे।

‘आईआरआईएस देना’ युद्धपोत को किया गया नष्ट

बुधवार को एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह शहर गाले से लगभग 19 समुद्री मील दूर ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ को टॉरपीडो से डुबा दिया। इस हमले में 100 से ज्यादा ईरानी नौसैनिक मारे गए, जबकि 32 नौसैनिकों को जीवित बचा लिया गया।

‘देना’ युद्धपोत पिछले महीने बंगाल की खाड़ी में भारत द्वारा आयोजित नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर वापस ईरान लौट रहा था। नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि हमला करते समय युद्धपोत पूरी तरह से हथियारों से लैस था और अमेरिका ने स्ट्राइक से पहले कोई चेतावनी नहीं दी थी।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस टॉरपीडो हमले को शांत मौत का नाम दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा की गई यह इस तरह की पहली कार्रवाई है।

दूसरे ईरानी जहाज ‘आईआरआईएस बुशहर’ की स्थिति

गुरुवार को श्रीलंका ने एक अन्य नौसैनिक सहायक पोत ‘आईआरआईएस बुशहर’ से 208 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित उतारना शुरू किया। यह जहाज श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में फंस गया था। श्रीलंकाई अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि बुशहर को पूर्वी तट के एक बंदरगाह पर ले जाया जा रहा है और चालक दल के अधिकांश सदस्यों को कोलंबो के पास एक नौसेना शिविर में स्थानांतरित किया जा रहा है। अमेरिकी केबल के अनुसार, जब तक यह संघर्ष चलेगा तब तक यह जहाज श्रीलंका की हिरासत में ही रहेगा। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि एक द्वीपीय देश होने के नाते इस चालक दल को शरण देना उनके देश की मानवीय जिम्मेदारी है।

अमेरिकी और इजरायली कूटनीतिक दबाव

रॉयटर्स द्वारा देखे गए अमेरिकी विदेश विभाग का आंतरिक दस्तावेज (केबल) 6 मार्च को जारी किया गया था। इस आंतरिक केबल में कई कूटनीतिक बातों का खुलासा हुआ है। कोलंबो में अमेरिकी दूतावास की प्रभारी जेन हॉवेल ने श्रीलंका सरकार पर जोर दिया है कि न तो बुशहर के चालक दल को और न ही देना युद्धपोत के 32 बचे हुए नौसैनिकों को वापस ईरान भेजा जाए।

अमेरिका ने श्रीलंका से यह भी कहा है कि वह इस बात का ध्यान रखे कि ईरान इन बंदियों का इस्तेमाल किसी भी तरह के प्रोपेगेंडा के लिए न कर सके। हॉवेल ने भारत और श्रीलंका के लिए नियुक्त इजरायली राजदूत को भी यह स्पष्ट किया कि इन लोगों को ईरान भेजने की कोई योजना नहीं है। इसके जवाब में इजरायली दूत ने पूछा कि क्या ईरानी चालक दल को दल-बदल यानी पाला बदलने के लिए प्रोत्साहित करने की कोई कोशिश की जा रही है।

शवों की वापसी पर श्रीलंका का बयान

श्रीलंका के स्वास्थ्य और जनसंचार उप मंत्री, हंसका विजेमुनि ने बुधवार को बताया कि ईरान (तेहरान) ने कोलंबो से ‘देना’ युद्धपोत पर मारे गए लोगों के शवों को वापस भेजने में मदद मांगी है। हालांकि, अभी तक इसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। फिलहाल इस मुद्दे पर अमेरिकी विदेश विभाग, श्रीलंकाई राष्ट्रपति कार्यालय या इजरायली दूतावास की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN