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मिलिए आग उगलने वाले, ऊंची स्टिल्ट्स पर चलने वाले अरबपति जोकर से: गाय लालिबर्टे
खुद को आधा कलाकार और आधा पूंजीपति कहने वाले लालिबर्टे ने सर्कस को, जैसा कि वह कहते हैं, ‘रीपैकेज’ किया है. उन्होंने अपनी कंपनी (सह-स्थापित) के ज़रिए इसे एक उच्च कला वाले तमाशे में बदल दिया, जिसे आज पूरी दुनिया ‘सर्क द सोलेए’ के नाम से जानती है.
लालिबर्टे का जन्म 1959 में कनाडा के पूर्वी हिस्से, क्यूबेक सिटी में हुआ. वह एक चमत्कारी शख़्सियत हैं, जो रात में कभी एक घंटे तो कभी छह घंटे ही सोते हैं.
वह हाई-स्टेक्स पोकर खिलाड़ी हैं- वास्तविकता में भी और कारोबार में भी. वह अपनी भव्य पार्टियों के लिए भी मशहूर हैं, जिनमें सितारे और कलाबाज़ शामिल होते हैं.
विद्रोही किशोर
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गाय लालिबर्टे एक शोरगुल वाले परिवार में बड़े हुए, जिसमें 120 से ज़्यादा रिश्तेदार थे. ये लोग 48 घंटे तक चलने वाली पार्टियां करते थे, जिनमें संगीत, ताश के खेल और शरारतों का माहौल रहता था.
कई अरबपतियों की तरह, बचपन से ही उनकी कारोबारी समझ की झलक मिलने लगी थी. पाँच साल की उम्र में वे स्कूल के मैदान में बेसबॉल कार्ड बेचते थे और अपने पिता की अलमारी में मिला एक एकॉर्डियन बजाने की प्रैक्टिस करते थे.
बचपन में एक पारंपरिक अमेरिकी सर्कस देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गए थे. लेकिन स्कूल से नहीं. दस साल का होते-होते उन्हें एक सख़्त अनुशासन वाले बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया, जिसके बारे में उन्होंने बाद में कहा कि उसने उनके आस-पास के कई बच्चों की ‘आत्मा को मार दिया’.
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किशोरावस्था के उनके साल गुस्से से भरे हुए गुज़रे. उन्हें कई स्कूलों से निकाल दिया गया, माता-पिता से करियर के चयन को लेकर झगड़े हुए, और चौदह साल की उम्र में वह घर से भाग गए.
आख़िरकार जब वह लौटे, तो परिवार से एक समझौता किया. वह पढ़ाई करेंगे, लेकिन अपने लंबे बाल कटाएंगे नहीं और अपनी कमाई खुद करेंगे. इसके लिए उन्होंने क्यूबेक की सड़कों पर राहगीरों का मनोरंजन कर पैसे कमाए.
अठारह साल की उम्र में वह अपना एकॉर्डियन और 50 डॉलर नकद लेकर यूरोप की यात्रा पर निकल पड़े. लंदन में पार्क की बेंचों पर सोए और सर्कस कलाकारों से मिले, जिन्होंने उन्हें जगल (कई चीज़ें हवा में उछालते-कैच करते जाना) करना, आग उगलना और स्टिल्ट्स पर चलना सिखाया.
1970 के दशक के आख़िर में सीखी गई ये कलाएं आगे चलकर दुनिया के सबसे जाने-पहचानने लाइव शो का आधार बनीं.
सर्कस को नए सिरे से गढ़ना
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कनाडा लौटने के बाद लालिबर्टे ने कई तरह की नौकरियाँ कीं- कुछ समय फैक्ट्री में, फिर एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम पर. लेकिन यूनियन की हड़ताल ने उन्हें क्यूबेक के छोटे शहर बे सेंट पॉल पहुंचा दिया.
वहीं उनकी मुलाक़ात दो लोगों से हुई, जिन्होंने उनकी ज़िंदगी बदल दी: डैनियल गॉथियर और गिलेस स्टे-क्रोए, जो ‘ब्रेड एंड पपेट थिएटर’ से जुड़े एक राजनीतिक रूप से उग्र कठपुतली कलाकार थे.
स्टे-क्रोए ने स्टिल्ट्स पर चलने वाली एक मंडली बनाई. लालिबर्टे इसमें शामिल हुए और तेज़ी से तरक्की करते हुए शो आयोजित करने और फंड जुटाने वाले नेताओं में गिने जाने लगे.
तीनों को बड़ा आइडिया आया 1982 में- एक स्ट्रीट फ़ेस्टिवल का. जिसमें सभी तरह के सर्कस कलाकार हों और उनके साथ कुछ ऐसे जोकर भी थे जो कथित तौर पर एलएसडी बेचते थे. इस उत्सव से उनमें एक नए तरह का सर्कस बनाने की महत्वाकांक्षा ने जन्म लिया- एक ऐसा सर्कस जिसमें कलात्मक ईमानदारी हो और जानवरों का प्रदर्शन न हो.
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1984 में उन्हें बड़ा मौका मिला. तब कनाडा अपनी 450वीं वर्षगांठ मनाने के लिए सांस्कृतिक परियोजनाओं के प्रस्ताव मांग रहा था. लालिबर्टे ने घुमंतु सर्कस का विचार पेश किया. उम्मीदों के विपरीत, सरकार ने हामी भर दी और उन्हें 10 लाख डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया.
इस तरह, नीले और पीले रंग के तंबू के नीचे, जिसमें 800 लोग बैठ सकते थे- सर्क द सोलेए्- का जन्म हुआ. तब लालिबर्टे की उम्र सिर्फ़ 25 साल थी. वे खुद आग उगलने वाले कलाकार के रूप में मंच पर उतरे, यह दावा करते हुए कि वे दुनिया के बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं.
लेकिन शुरुआती साल कठिन रहे. 2004 में फोर्ब्स को उन्होंने बताया: “हमें हर वह समस्या झेलनी पड़ी जो किसी नए बिग टॉप को हो सकती है. पहले ही दिन तंबू गिर गया. शो में लोगों को लाने में दिक़्क़तें आईं. हम सिर्फ़ युवाओं के साहस और अहंकार के दम पर बचे.”
कर्ज़ बढ़ता गया और बैंकों ने फाइनेंस देने से इनकार कर दिया.
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सिर्फ़ एक छोटे से सामुदायिक बैंक ने उन पर दांव लगाया. कनाडा से बाहर विस्तार की पहली कोशिश ही नाकाम रही… नियाग्रा फॉल्स जैसे बड़े पर्यटन स्थल पर इतने कम टिकट बिके कि शो बंद करना पड़ा.
कंपनी लगभग बंद होने के कगार पर थी, लेकिन स्थानीय सप्लायरों ने उधार बढ़ा दिया. लालिबर्टे के मुताबिक़, उन्होंने ऐसा सिर्फ़ इसलिए किया क्योंकि “वे हमें पसंद करते थे, हम पर भरोसा करते थे.”
उनका विश्वास रंग लाया. 1987 तक सर्क द सोलेए् को लॉस एंजेलिस फेस्टिवल के उद्घाटन स्लॉट में जगह मिल गई.
लालिबर्टे ने उस एक प्रदर्शन पर सब कुछ दांव पर लगा दिया- मतलब एक-एक पैसा. उन्होंने हॉल को सितारों से भर दिया, जिनमें सिल्वेस्टर स्टेलोन और अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर भी शामिल थे.
2005 में सीबीएस ने लालिबर्टे को उद्धृत किया कि वे हर संस्कृति को जोड़ने की कोशिश करते थे, “हमारा तरीका बहुत आसान था. यह एक सार्वभौमिक भाषा बनाने के बारे में था. ऐसा शो जो दुनिया के हर कोने से आने वाले लोगों को आकर्षित करे. और यही बड़ी बात थी.”
शो बड़ा हिट हो गया और हॉलीवुड को उससे प्यार हो गया. कहा जाता है कि माइकल जैक्सन हर महीने भेष बदलकर आते थे. लालिबर्टे ने सीबीएस से कहा: “हमने इस शहर को सांस्कृतिक और कलात्मक रूप से बढ़ने में योगदान दिया. हमने साबित किया कि लोग परिष्कृत हो सकते हैं.”
आदर्शों से समझौता करने से इनकार
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जल्द ही सर्क द सोलेए् दुनिया भर में दौरे करने लगा- लंदन, पेरिस और जापान में शो हाउसफुल हुए. लेकिन लालिबर्टे की नज़र लास वेगास में स्थायी ठिकाने पर थी.
एक शुरुआती समझौते के दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से टूटने के बाद, उन्हें कैसिनो मुगल स्टीव विन का फ़ोन आया. विन ने भरोसा जताने के लिए रेगिस्तानी शहर में सर्क द सोलेए् के लिए 3.6 करोड़ डॉलर का अपना थिएटर बनवाया. उनका शो ‘मिस्टीयर’ ज़बरदस्त हिट साबित हुआ.
सिर्फ़ एक साल में राजस्व 3 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया. 90 के दशक के अंत तक सर्क द सोलेए् के वेगास में किए कार्यक्रमों ने शहर के मनोरंजन परिदृश्य को बदल दिया- इसे सिर्फ़ जुए की राजधानी से बदलकर बड़े, पारिवारिक शोज़ का ठिकाना बना दिया.
सिर्फ़ दो साल में लास वेगास में ‘मिस्टीयर’ का राजस्व 3 करोड़ डॉलर से बढ़कर 11 करोड़ डॉलर हो गया. यह उस समय लाइव एंटरटेनमेंट में हो रहे बदलावों का प्रतिबिंब था. बड़े शो, बड़े टूर.
1990 के दशक के अंत तक कंपनी 23 देशों से आए 1,300 जोकरों, कलाबाज़ों और नर्तकों को रोज़गार दे रही थी, और सिर्फ़ वेतन पर ही 8 करोड़ डॉलर ख़र्च हो रहे थे.
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लालिबर्टे ने शेयर बेचकर कंपनी को शेयर बाज़ार में लाने के प्रस्ताव ठुकरा दिए. उनका कहना था कि तिमाही रिपोर्ट देना ‘ऐसी चीज़ है जिसे मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता’. उन्होंने कंपनी को डिज़्नी को बेचने से भी इनकार कर दिया.
इसके बजाय उन्होंने मर्चेंडाइजिंग, फ़िल्म निर्माण और हाई-प्रोफ़ाइल कोलेब्रेशन्स में विस्तार किया- जिनमें बीटल्स, एल्विस प्रेस्ली और माइकल जैक्सन पर आधारित शो शामिल थे.
लेकिन सब कुछ सही नहीं चल रहा था. 1999 में, लालिबर्टे के सह-संस्थापक और सर्क द सोलेए् के अध्यक्ष डैनियल गॉथियर ने कंपनी छोड़ने का फ़ैसला किया, और 2000 के दशक में कई शो में बहुत ज़्यादा पैसा डूबा. लेकिन 2004 तक फोर्ब्स ने सर्क द सोलेए् की कीमत 1.2 अरब डॉलर आँकी और लालिबर्टे आधिकारिक तौर पर अरबपति बन गए.
उसी साल टाइम मैग़ज़ीन ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया और शायद वह इस सूची में जगह पाने वाले पहले जोकर थे.
2008 में उन्होंने कंपनी का 20% हिस्सा दुबई के निवेशकों को बेचा, लेकिन वैश्विक वित्तीय संकट ने उनके विस्तार की योजनाओं को पटरी से उतार दिया. राजस्व गिर गया. 2015 तक लालिबर्टे ने अपनी ज़्यादातर हिस्सेदारी अमेरिकी, चीनी और कनाडाई निवेशकों को लगभग 1.5 अरब डॉलर में बेच दी. बाद में महामारी ने सर्क द सोलेए् को सैकड़ों मिलियन डॉलर के कर्ज़ में डाल दिया.
पैसे लेकर आगे बढ़ना
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लालिबर्टे की निजी ज़िंदगी उनके शोज़ जितनी रंगीन रही है. दो पार्टनरों से उनके पाँच बच्चे हैं और उन्होंने कभी सुपरमॉडल नाओमी कैंपबेल को डेट भी किया था. वे अपनी भव्य पार्टियों के लिए भी मशहूर हैं- ख़ासकर मॉन्ट्रियल ग्रां प्री के दौरान- जहां कलाबाज़ और सितारे एक साथ मिलते हैं. एक किताब में उन पर फ़िज़ूलख़र्ची का आरोप लगाया गया था, जिस पर कानूनी विवाद हुआ और अंततः लेखक ने माफ़ी माँगी.
वे उत्साही जुआरी भी हैं, हालाँकि शायद दुनिया के सबसे अच्छे नहीं. 2006 से 2009 के बीच उन्होंने ऑनलाइन पोकर खेलों में लगभग 3 करोड़ डॉलर गंवाए, लेकिन बड़े टूर्नामेंट जीते भी हैं.
लालिबर्टे ने सबसे महंगी रोमांचक यात्राओं में से एक का आनंद भी लिया है. 2009 में वह कनाडा के पहले अंतरिक्ष पर्यटक बने. उन्होंने 12 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए- जोकर की नाक पहनकर और यू2 कॉन्सर्ट के दौरान बोनो से सैटेलाइट लिंक पर बातचीत करते हुए.
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उन्होंने इसे ‘बिज़नेस ट्रिप’ बताया, जिसका मक़सद उनकी चैरिटी ‘वन ड्रॉप फ़ाउंडेशन’ के ज़रिए पानी की कमी पर जागरूकता फैलाना था. हालाँकि बाद में कनाडा की टैक्स कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि यह यात्रा टैक्स कटौती योग्य नहीं थी.
आज लालिबर्टे अपना समय मॉन्ट्रियल, इबीज़ा और हवाई के घरों के बीच बिताते हैं, साथ ही फ्रेंच पोलिनेशिया के एक निजी द्वीप पर भी, जिसे एक हफ़्ते के लिए 10 लाख यूरो में किराए पर लिया जा सकता है. 2019 में उन्हें वहाँ भांग उगाने के आरोप में हिरासत में लिया गया, लेकिन जब उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ व्यक्तिगत उपयोग के लिए था तो उन्हें बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया.
लालिबर्टे उस अरबपति के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने पैसे लेकर आगे बढ़ने का फ़ैसला किया- क्योंकि वे अच्छी ज़िंदगी जीना चाहते थे.
वह गिने-चुने अरबपतियों में से हैं, जो मनोरंजन जगत के हैं- यह इस बात का सबूत है कि बाग़ी स्वभाव का लंबे बालों वाला, सड़क का कलाकार भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की मेज़ पर जगह पा सकता है और फिर भी खुद को जोकर कहलाना पसंद कर सकता है.
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