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अमेरिका और इजरायल ने शनिवार सुबह को ही क्यों ईरान पर किया हमला? बड़ी वजह आई सामने

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरानी राज्य मीडिया ने रविवार को खामेनेई की मौत की पुष्टि की और इसे शहीद के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि पुरानी तस्वीरें दिखाकर शोक मनाया गया। खामेनेई की बेटी, दामाद और पोती भी इस हमले में मारे गए। 

अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर बड़े पैमाने पर हवाई और नौसैनिक हमले किए, जो शनिवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अपने निकटतम सलाहकारों के साथ बैठक के दौरान हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने इस बैठक की जानकारी हासिल कर ली थी, जिसके कारण हमले को मूल योजना से पहले ही अंजाम दिया गया। खामेनेई की उच्च सुरक्षा वाली कंपाउंड को सबसे पहले निशाना बनाया गया, जिसे सैटेलाइट तस्वीरों से पूरी तरह नष्ट होने की पुष्टि हुई। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि हमले का उद्देश्य खामेनेई को पहले मारना था, क्योंकि वे पश्चिमी विरोधी नीतियों के प्रतीक थे। इस हमले में खामेनेई के साथ कई शीर्ष कमांडर भी मारे गए, जिनमें पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी और आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पाकपुर शामिल हैं।

ईरानी राज्य मीडिया ने रविवार को खामेनेई की मौत की पुष्टि की और इसे शहीद के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि पुरानी तस्वीरें दिखाकर शोक मनाया गया। खामेनेई की बेटी, दामाद और पोती भी इस हमले में मारे गए। हालांकि, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी बच गए और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दमनकारियों को कड़ी चेतावनी दी। ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और इजरायल, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमिरात, जॉर्डन व कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर संघर्ष फैल गया। ईरान के राष्ट्रपति ने इसे मुसलमानों, खासकर शिया समुदाय के खिलाफ युद्ध की घोषणा बताया। आईआरजीसी ने इतिहास की सबसे भयंकर आक्रामक कार्रवाई का वादा किया।

मोड़ पर खड़ा ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर खामेनेई को इतिहास के सबसे दुष्ट लोगों में से एक बताते हुए उनकी मौत पर खुशी जताई। इजरायल ने कहा कि हमले से ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा और तेहरान के दिल में आगे हमले जारी हैं। इस घटना ने ईरान के 46 साल पुराने शिया-धार्मिक शासन में एक अहम मोड़ ला दिया है। हाल ही में ईरान में महंगाई के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें क्रूरता से दबाया गया और हजारों लोग मारे गए। अब नेतृत्व की कमी से देश में अस्थिरता बढ़ गई है और उत्तराधिकार पर सवाल उठ रहे हैं।

मध्य-पूर्व में चरम पर तनाव

यह हमला जेनेवा में ओमान की मध्यस्थता वाली असफल वार्ताओं के दो दिन बाद हुआ, जिसने क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया है और बदला लेने की कसम खाई है, जबकि अमेरिका-इजरायल गठबंधन ने आगे की कार्रवाइयों का संकेत दिया है। इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की मौत और क्षेत्रीय देशों पर हमलों की खबरें आ रही हैं। दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जहां कुछ इसे मानवाधिकार उल्लंघन बता रहे हैं तो कुछ इसे आवश्यक कदम मान रहे हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN